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शाहजहांपुर: बालिग लड़की ने कहा- मर्जी से गई, पुलिस ने लिख दिया- 'मर्जी नहीं थी'; कोर्ट पहुंचा मामला तो खुली पोल

यूपी के शाहजहांपुर में पुलिस की एक बड़ी लापरवाही और हेरफेर का खुलासा हुआ है. एक प्रेमी युगल के मामले में विवेचक ने युवती के बयानों को ही बदल डाला. कोर्ट में वीडियो ग्राफी सामने आने के बाद पुलिस की पोल खुल गई, जिसके बाद दोषी विवेचक के निलंबन की कार्रवाई शुरू कर दी गई है.

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प्रेमी को जेल भेजने के लिए पुलिस ने रची थी साजिश.(Photo: Representational)
प्रेमी को जेल भेजने के लिए पुलिस ने रची थी साजिश.(Photo: Representational)

Uttar Pradesh News: शाहजहांपुर जिले के जलालाबाद थाने में तैनात पुलिसकर्मियों ने एक बालिग युवती के बयानों में हेरफेर कर उसे साजिश में बदलने की कोशिश की. 19 वर्षीय युवती अपने 24 वर्षीय प्रेमी के साथ राजस्थान चली गई थी, जिसे पुलिस ने बरामद किया. पुलिस ने लिखित बयानों में युवती की मर्जी को 'मर्जी नहीं थी' में बदल दिया. 

मामला तब उजागर हुआ जब आरोपी युवक ने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर वीडियो ग्राफी की जांच की मांग की. कोर्ट के आदेश पर जब वीडियो देखा गया, तो पुलिस का झूठ पकड़ा गया. इस गंभीर चूक पर एसपी ग्रामीण ने विवेचक को दोषी मानते हुए उनके निलंबन की संस्तुति की है.

अदालत में खुली पुलिस की पोल

अभियोजन अधिकारी आशीष शुक्ला के अनुसार, 16 अप्रैल को आरोपी युवक ने अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीष सिंह की अदालत में गुहार लगाई. कोर्ट ने जब साक्ष्यों का मिलान किया, तो पाया कि पुलिस के कागजों में लिखा था कि युवती अपनी मर्जी से नहीं गई, जबकि वीडियो ग्राफी में युवती स्पष्ट कह रही थी कि वह अपनी इच्छा से प्रेमी के साथ गई है. बयान लेखक और विवेचक द्वारा की गई इस जालसाजी ने न्यायिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए.

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विवेचक पर गिरी निलंबन की गाज

इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए एसपी ग्रामीण दीक्षा भाबरे ने बताया कि लिखित और वीडियो बयानों में अंतर पाए जाने पर प्रारंभिक जांच कराई गई. जांच में विवेचक, बयान लेखक और थानाध्यक्ष की भूमिका संदिग्ध पाई गई. मुख्य रूप से विवेचक को दोषी पाते हुए उनके निलंबन की कार्रवाई प्रेषित कर दी गई है. 

रस्सी का सांप बनाने की कोशिश पड़ी भारी

शाहजहांपुर पुलिस का 'रस्सी का सांप' बनाने वाला यह तरीका खुद उन्हीं पर भारी पड़ गया. पुलिस अक्सर दावों में महिलाओं की सुरक्षा की बात करती है, लेकिन इस घटना ने कार्यप्रणाली पर दाग लगा दिया है. फिलहाल, कोर्ट के कड़े रुख के बाद विभाग के भीतर हड़कंप मचा हुआ है. 

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