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'हमारे साथ लुका-छिपी मत खेलो', मुस्लिम धर्मगुरु पर हमले के मामले में SC की यूपी पुलिस को फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा में मुस्लिम धर्मगुरु काजिम अहमद शेरवानी पर धार्मिक पहचान के आधार पर हुए हमले की जांच में लापरवाही को लेकर यूपी पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है. कोर्ट ने यूपी पुलिस से पूछा कि उसके आदेश के बावजूद आईपीसी की धारा 153बी को एफआईआर में क्यों नहीं जोड़ा गया.

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नोएडा हेट क्राइम केस की जांच में लापरवाही बरतने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने यूपी पुलिस को फटकार लगाई. (Photo: PTI)
नोएडा हेट क्राइम केस की जांच में लापरवाही बरतने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने यूपी पुलिस को फटकार लगाई. (Photo: PTI)

सुप्रीम कोर्ट ने एक मुस्लिम व्यक्ति पर हमले की जांच में लापरवाही बरतने को लेकर उत्तर प्रदेश पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है. यह मामला मुस्लिम धर्मगुरु काजिम अहमद शेरवानी से जुड़ा है, जिन्होंने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि उन पर 2021 में नोएडा में धार्मिक पहचान के आधार पर हमला किया गया था. याचिकाकर्ता काजिम अहमद शेरवानी ने आरोप लगाया है कि नोएडा में 2021 में हुई घटना में उनकी दाढ़ी खींची गई, टोपी उतारी गई और उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर उन्हें अपमानित किया गया.

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई के दौरान यूपी पुलिस के खिलाफ सख्त रुख अपनाया. कोर्ट ने कहा कि उसके स्पष्ट निर्देशों के बावजूद एफआईआर में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 153बी को शामिल नहीं किया गया. पीठ ने यह भी पूछा कि जांच अधिकारी अदालत के साथ 'लुका-छिपी' क्यों खेल रहा है और क्या वह आईपीसी की 153बी और 295ए जैसी धाराओं से पीछे हट सकता है.

यह भी पढ़ें: 'धार्मिक प्रथा को विज्ञान की कसौटी पर परखा गया, तो कोई धर्म नहीं बचेगा...' सबरीमाला केस पर सुप्रीम कोर्ट में बहस

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के.एम नटराज ने कोर्ट को बताया कि आगे की जांच के लिए आवश्यक अनुमति मांगी गई है और चार्जशीट दाखिल करते समय संबंधित धाराएं जोड़ी जा सकती हैं. हालांकि, पीड़ित पक्ष के वकील ने इसका विरोध करते हुए कहा कि 2023 में दर्ज एफआईआर से जानबूझकर धारा 153बी हटाई गई, जबकि अदालत ने इसे जोड़ने के निर्देश दिए थे. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस प्रशासन के रवैये पर नाराजगी जताते हुए संबंधित एसीपी को तलब करने की बात कही, जिन्होंने यह रिपोर्ट तैयार की थी.

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कोर्ट ने कहा कि अधिकारी को पेश होकर यह स्पष्ट करना होगा कि उन्होंने हमारे निर्देशों का पालन क्यों नहीं किया. साथ ही, अदालत ने 16 फरवरी 2026 के अपने आदेश के अनुपालन में दाखिल हलफनामे को असंतोषजनक बताया. हालांकि एएसजी नटराज के अनुरोध पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य को अंतिम मौका देते हुए अपने आदेश को पूरी तरह लागू करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया. मामले की अगली सुनवाई 19 मई को निर्धारित की गई है. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि वह अधिकारियों को तलब करने में रुचि नहीं रखता, लेकिन प्रशासन के रवैये के कारण उसे ऐसा करने पर मजबूर होना पड़ता है.
 

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