सेना की वर्दी, ब्रिगेडियर का रुतबा, आगे-पीछे सुरक्षा जैसा माहौल, टाटा हैरियर पर लगा सेना मुख्यालय का झंडा और साथ में काले कपड़ों में दो कथित कमांडो. पहली नजर में देखने वाला शायद यही समझता कि कोई बड़ा सैन्य अधिकारी इलाके में पहुंचा है. लेकिन शाहजहांपुर में जो कहानी सामने आई, उसने हर किसी को हैरान कर दिया.
यह कहानी है 21 वर्षीय आर्यन वर्मा की, जो पुलिस और सेना के अधिकारियों के अनुसार खुद को सेना का अधिकारी बताकर घूम रहा था. हैरानी की बात यह है कि पूछताछ में उसने जो वजह बताई, उसने इस सभी को और हैरान कर दिया. उसका दावा है कि वह डॉक्टर बनना चाहता था, उसने NEET की परीक्षा दी थी, लेकिन सफल नहीं हो सका. इसके बाद उसने अपनी दिल की मरीज मां को यह कह दिया कि उसका चयन Armed Forces Medical College (AFMC) में हो गया है. यहीं से शुरू हुई एक ऐसी कहानी, जिसका अंत शाहजहांपुर के शहीद संग्रहालय में जाकर हुआ.
दो महीने से मिल रही थीं सूचनाएं
शाहजहांपुर और आसपास के इलाकों में पिछले करीब दो महीनों से एक ऐसे युवक की चर्चा थी, जो सेना के वरिष्ठ अधिकारी जैसी वर्दी पहनकर घूमता दिखाई देता था. कभी उसकी गाड़ी लोगों का ध्यान खींचती, तो कभी उसके साथ चलने वाले लोग. पूर्व सैनिकों तक भी इस तरह की सूचनाएं पहुंच रही थीं. सूत्र बताते हैं कि कुछ लोगों को उसकी गतिविधियां संदिग्ध लगीं. जानकारी धीरे-धीरे स्टेशन मुख्यालय शाहजहांपुर तक पहुंची. इसके बाद प्रशासनिक कमांडेंट कर्नल जे.एस. जगलान और स्थानीय पूर्व सैनिकों ने मामले की पड़ताल शुरू की. सीधे कार्रवाई करने के बजाय एक ऐसी योजना बनाई गई, जिससे बिना किसी विवाद के सच्चाई सामने आ सके. उद्देश्य केवल इतना था कि यदि युवक वास्तव में सेना का अधिकारी है तो उसकी पहचान स्पष्ट हो जाए और यदि नहीं है तो कानून के अनुसार कार्रवाई हो सके.
सम्मान समारोह का न्योता और बिछ गया जाल
योजना के तहत युवक को स्थानीय छात्रों को प्रेरित करने और सम्मानित करने के नाम पर शहीद संग्रहालय में आयोजित कार्यक्रम में बुलाया गया. बताया जाता है कि निमंत्रण मिलने के बाद वह पूरे आत्मविश्वास के साथ कार्यक्रम में पहुंचा. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब उसकी गाड़ी कार्यक्रम स्थल के बाहर रुकी तो वहां मौजूद कई लोग प्रभावित हुए. गाड़ी पर लगे प्रतीक और उसके पहनावे ने माहौल को और प्रभावशाली बना दिया था. लेकिन कार्यक्रम स्थल पर पहले से मौजूद लोगों की नजरें उसकी गतिविधियों पर टिकी हुई थीं. जैसे ही उसकी पहचान और दस्तावेजों का सत्यापन शुरू हुआ, पूरा मामला बदल गया. कुछ ही देर में उसे और उसके साथ मौजूद लोगों को हिरासत में ले लिया गया.
ब्रिगेडियर की वर्दी, गाड़ी पर झंडा और नकली पहचान पत्र
जांच के दौरान जो चीजें सामने आईं, उन्होंने अधिकारियों का ध्यान खींचा. आर्यन वर्मा ब्रिगेडियर रैंक की वर्दी में था. वह टाटा हैरियर वाहन में चल रहा था, जिस पर वन-स्टार प्लेट और सेना मुख्यालय से जुड़ा झंडा लगा हुआ था. तलाशी में एक कथित फर्जी ब्रिगेडियर पहचान पत्र बरामद हुआ. इसके अलावा एक एयर पिस्टल, एएमसी रेजिमेंटल केन और सेना से जुड़ी दिखने वाली कुछ अन्य सामग्री भी मिली. उसके साथ मौजूद दो युवक काले कपड़ों में थे और कथित तौर पर खुद को एनएसजी कमांडो जैसी छवि में प्रस्तुत कर रहे थे. वहीं चालक के पास भारत सरकार का पहचान पत्र पाया गया. इन सभी पहलुओं को लेकर पुलिस और अन्य एजेंसियां अलग-अलग स्तर पर जांच कर रही हैं.
पूछताछ में सामने आई कहानी
पुलिस सूत्रों के मुताबिक पूछताछ के दौरान आर्यन ने बताया कि उसका सपना सेना में डॉक्टर बनने का था. उसने NEET परीक्षा दी, लेकिन सफलता नहीं मिली. इसके बावजूद उसने घर पर यह बात नहीं बताई. बताया जाता है कि उसने अपनी मां को यह कह दिया कि उसका चयन AFMC में हो गया है. मां की तबीयत खराब रहती थी और वह उन्हें निराश नहीं करना चाहता था. पूछताछ में उसने दावा किया कि इसी झूठ को बनाए रखने के लिए उसने सेना से जुड़ी वर्दी और अन्य सामान जुटाना शुरू कर दिया. उसने कथित रूप से नोएडा और गुरुग्राम से वर्दी व अन्य सामग्री एकत्र की. इसके बाद उसने अपने पिता की गाड़ी पर भी सेना के वरिष्ठ अधिकारी जैसी पहचान दर्शाने वाले चिन्ह लगवा लिए. हालांकि पुलिस इन दावों की स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है और अभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है.
21 साल की उम्र और 'ब्रिगेडियर' बनने की कहानी
इस मामले की सबसे ज्यादा चर्चा आर्यन की उम्र को लेकर हो रही है. आमतौर पर सेना में ब्रिगेडियर का पद लंबे सैन्य अनुभव और कई वर्षों की सेवा के बाद मिलता है. ऐसे में 21 वर्ष की उम्र में किसी व्यक्ति का ब्रिगेडियर की वर्दी में घूमना लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया.
क्या बोली पुलिस
सीओ सिटी पंकज पंत के अनुसार, आर्यन वर्मा पुत्र अनिल वर्मा निवासी दुर्गा एन्क्लेव, थाना रोजा से पूछताछ की जा रही है. उसके पास से एक नकली पिस्तौल और अन्य सामग्री बरामद हुई है. उसके साथ मौजूद दो सिक्योरिटी गार्ड और एक ड्राइवर से भी पूछताछ की जा रही है. पुलिस का कहना है कि इस मामले में तहरीर प्राप्त हो चुकी है. मुकदमा दर्ज कर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जाएगी. आगे की जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर कार्रवाई की जाएगी.
एक झूठ, जो बहुत दूर तक चला गया
फिलहाल जांच जारी है और कई सवालों के जवाब अभी आने बाकी हैं. लेकिन इतना जरूर है कि NEET में असफलता के बाद मां को दिलासा देने के लिए बोले गए कथित एक झूठ ने ऐसी कहानी का रूप ले लिया, जिसकी चर्चा अब पूरे प्रदेश में हो रही है. कल तक जो युवक कथित तौर पर ब्रिगेडियर बनकर घूम रहा था, आज वही पुलिस और जांच एजेंसियों के सवालों का सामना कर रहा है. शहीद संग्रहालय में पहुंचा वह कार्यक्रम शायद उसके लिए सम्मान का मंच नहीं, बल्कि उस कहानी का आखिरी अध्याय साबित हुआ, जिसे उसने खुद लिखा था. अब आगे की कहानी पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रिया तय करेगी.