प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 और 29 अप्रैल को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी यानी काशी जा रहे हैं. वहां वो 50 हजार महिलाओं के बीच एक बड़ा सम्मेलन करेंगे और 14 किलोमीटर लंबा रोड शो भी करेंगे. लेकिन यह सब सिर्फ काशी के लिए नहीं है. दरअसल 29 अप्रैल को पश्चिम बंगाल में चुनाव का दूसरा और आखिरी चरण है. और BJP की पूरी कोशिश है कि काशी से उठने वाली आवाज सीधे बंगाल के वोटरों तक पहुंचे.
पश्चिम बंगाल में इन दिनों चुनाव हो रहे हैं. 29 अप्रैल को दूसरे और आखिरी चरण में 142 सीटों पर वोटिंग होनी है. इन सीटों पर BJP और TMC यानी ममता बनर्जी की पार्टी के बीच सीधी टक्कर है. चुनाव प्रचार 27 अप्रैल की शाम को बंद हो गया है. लेकिन ठीक अगले दिन यानी 28 अप्रैल को मोदी काशी में 50 हजार महिलाओं के बीच होंगे. यह कोई संयोग नहीं है.
नारी शक्ति वंदन सम्मेलन क्या है?
28 अप्रैल को वाराणसी के BLW परिसर में एक बहुत बड़ा कार्यक्रम होगा जिसका नाम है नारी शक्ति वंदन सम्मेलन. इसमें करीब 40 से 50 हजार महिलाएं शामिल होंगी. यह कार्यक्रम पूरी तरह महिलाओं पर केंद्रित होगा.
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BJP की महिला शाखा यानी भारतीय जनता महिला मोर्चा इसे संभालेगी. लखपति दीदी जैसी सरकारी योजनाओं से जुड़ी महिलाओं को यहां सम्मानित किया जाएगा. बूथ स्तर तक संपर्क करके महिलाओं को जोड़ा गया है ताकि यह सिर्फ एक सभा न लगे बल्कि एक बड़े जनआंदोलन जैसा दिखे.
BJP की असली रणनीति क्या है?
BJP इस पूरे कार्यक्रम के जरिए विपक्षी पार्टियों जैसे कांग्रेस, सपा, टीएमसी और डीएमके को महिला विरोधी बताने की कोशिश करेगी. बंगाल में BJP पहले से ही महिला सुरक्षा को बड़ा चुनावी मुद्दा बना चुकी है. काशी में यह बड़ा महिला सम्मेलन उसी मुद्दे को और ताकत देने के लिए है. इसकी तस्वीरें और वीडियो पूरे देश में और खासकर बंगाल में फैलाए जाएंगे.
काशी को ही क्यों चुना?
यह सोचने वाली बात है कि BJP ने इस संदेश के लिए काशी को ही क्यों चुना. इसकी एक बहुत गहरी वजह है. काशी और बंगाल का रिश्ता सदियों पुराना है. यह सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक और आर्थिक रिश्ता भी है.
बंगाल की मशहूर दानवीर रानी भवानी ने काशी में कई घाट, मंदिर और धर्मशालाएं बनवाई थीं जो आज भी मौजूद हैं. काशी में बंगाली टोला जैसे इलाके हैं जहां बंगाली संस्कृति आज भी जिंदा है. दुर्गा पूजा और काली पूजा के वक्त काशी का एक बड़ा हिस्सा मिनी बंगाल जैसा लगता है. काशी में करीब 70 हजार बंगाली वोटर भी हैं जो पिछले चार दशकों से BJP का समर्थन करते आए हैं.
इसी रिश्ते को BJP राजनीतिक हथियार बना रही है. सम्मेलन में दो दर्जन से ज्यादा बंगाली महिलाएं पारंपरिक बंगाली पोशाक में शंख बजाएंगी. स्वागत भी बंगाली तरीके से होगा. यह सिर्फ एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि बंगाल के वोटरों को यह बताने का तरीका है कि BJP उनकी संस्कृति और पहचान को समझती है और उसका सम्मान करती है.
काशी और बंगाल के बीच नई कनेक्टिविटी
प्रधानमंत्री मोदी के वाराणसी के सांसद बनने के बाद से काशी और बंगाल के बीच कई बड़े काम हुए हैं. वाराणसी से हल्दिया तक गंगा नदी मार्ग विकसित किया गया है जिससे मालवाहक और पर्यटक जहाज चल सकते हैं. यह उत्तर प्रदेश, बिहार और बंगाल को एक आर्थिक रास्ते से जोड़ता है.
वाराणसी से कोलकाता के बीच छह लेन सड़क परियोजना पर काम चल रहा है. वाराणसी से हावड़ा के बीच हाईस्पीड रेल कॉरिडोर का सर्वे पूरा हो चुका है. उत्तर प्रदेश, बिहार और बंगाल को जोड़ने वाले करीब 2600 करोड़ रुपए के रेल और सड़क पुल का शिलान्यास भी होने वाला है.
BJP इन सब परियोजनाओं को अपना विकास मॉडल बताती है और काशी को उसका सबसे बड़ा उदाहरण. जब प्रधानमंत्री मोदी काशी से इन परियोजनाओं का जिक्र करते हैं तो बंगाल तक यह संदेश जाता है कि विकास के जरिए कैसे बदलाव लाया जा सकता है.
14 किलोमीटर का रोड शो क्यों खास है?
29 अप्रैल को प्रधानमंत्री मोदी काशी में 14 किलोमीटर लंबा रोड शो करेंगे. वाराणसी का सांसद बनने के बाद यह उनका सबसे लंबा रोड शो होगा. इससे पहले 2024 में उन्होंने सिर्फ 5 किलोमीटर का रोड शो किया था. यह रोड शो BLW से शुरू होकर मंडुवाडीह, लहरतारा, पुलिस लाइन, लहुराबीर और मैदागिन होते हुए काशी विश्वनाथ मंदिर तक जाएगा. इसके बाद मोदी मंदिर में दर्शन करेंगे.
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इस रोड शो की तस्वीरें और वीडियो बंगाल सहित पूरे देश में फैलेंगी. धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक प्रतीकों का यह मेल प्रधानमंत्री मोदी की राजनीति की खास पहचान है. बंगाल में जो वोटर परंपरा और अपनी पहचान को लेकर गहरी भावना रखते हैं उन तक यह संदेश पहुंचाने की कोशिश है.