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नोएडा एयरपोर्ट से 15 जून से शुरू होंगी कमर्शियल उड़ानें, NCR को मिलेगा नया एयर कनेक्टिविटी हब

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से अब उड़ानों का इंतज़ार खत्म होने वाला है. 15 जून 2026 से यहां कमर्शियल उड़ानें शुरू हो जाएंगी, जिससे दिल्ली-NCR और पूरे उत्तर भारत को एक नया हवाई हब मिलेगा. पहले फेज में यह एयरपोर्ट 1.2 करोड़ यात्रियों को सेवा देगा, जिसे आगे चलकर 7 करोड़ तक ले जाने की योजना है.

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नेट जीरो उत्सर्जन वाला देश का आधुनिक ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट (File Photo)
नेट जीरो उत्सर्जन वाला देश का आधुनिक ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट (File Photo)

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से 15 जून से कमर्शियल उड़ानें शुरू होने जा रही हैं. इसका मतलब साफ है कि अब NCR और उत्तर भारत के लोगों को एक नया एयर कनेक्टिविटी हब मिलने वाला है. जो लोग अब तक दूसरे शहरों के एयरपोर्ट पर निर्भर थे, उनके लिए यह बड़ी राहत की खबर है. 

15 जून 2026 से यहां से नियमित फ्लाइट्स शुरू होंगी. यह सिर्फ एक नई शुरुआत नहीं है, बल्कि पूरे इलाके के लिए एक बड़ा बदलाव भी है. लंबे समय से जिस एयरपोर्ट का इंतजार था, अब वह काम करने के लिए तैयार है और लोगों की यात्रा आसान होने वाली है.

उड़ानों की शुरुआत से बदलेगा पूरे इलाके का कनेक्शन

दरअसल, इस एयरपोर्ट का उद्घाटन 28 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था. इसके बाद जरूरी काम पूरे किए गए और हाल ही में एयरोड्रोम सिक्योरिटी प्रोग्राम यानी ASP को मंजूरी मिल गई. इस मंजूरी के बाद अब उड़ानें शुरू करने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है. इस एयरपोर्ट के शुरू होते ही न केवल लोगों का आना-जाना आसान होगा, बल्कि आसपास के इलाकों में व्यापार और पर्यटन को भी नई रफ्तार मिलेगी. जल्द ही कई बड़ी एयरलाइंस भी यहां से अपना कामकाज शुरू करने वाली हैं. नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को इस तरह बनाया गया है कि इसके पहले फेज में ही हर साल करीब 1.2 करोड़ यात्री सफर कर सकेंगे. आगे चलकर इसका विस्तार किया जाएगा, जिससे सालाना 7 करोड़ से ज्यादा यात्रियों के यहां से उड़ान भरने की उम्मीद है.

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यह एयरपोर्ट पर्यावरण के लिहाज से भी काफी आधुनिक है, क्योंकि इसे 'नेट जीरो उत्सर्जन' वाला ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाया गया है. इसे पीपीपी (PPP) मॉडल पर तैयार किया गया है, जिसमें सरकार और निजी क्षेत्र की भागीदारी है. 15 जून से यहां कमर्शियल उड़ानें शुरू होने के बाद जेवर और आसपास के पूरे इलाके की तस्वीर बदल जाएगी और कनेक्टिविटी के मामले में यह एयरपोर्ट उत्तर भारत का सबसे अहम हिस्सा बन जाएगा.

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