हाल के दिनों में सुर्खियों में रहे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ पॉक्सो सहित अन्य गंभीर आरोपों में एफआईआर दर्ज की गई है. एडीजे रेप एवं पॉक्सो स्पेशल कोर्ट के निर्देश पर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के विरुद्ध झूंसी थाने में मुकदमा कायम किया गया. पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 351(2) तथा पॉक्सो एक्ट की धाराएं 3, 4(2), 5, 6, 16 और 17 के तहत दोनों नामजद आरोपियों के साथ 2-3 अज्ञात व्यक्तियों को भी अभियुक्त बनाया है.
अब इस एफआईआर के सिलसिले में झूंसी थाने की पुलिस टीम हरदोई पहुंची, जहां कथित पीड़ित नाबालिग लड़कों के बयान दर्ज किए गए. सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने बालकों से अलग-अलग और सामूहिक रूप से पूछताछ की. बयान के दौरान बच्चों ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सहित अन्य व्यक्तियों पर गंभीर आरोप लगाए. बताया जा रहा है कि बच्चों ने मथुरा-वृंदावन निवासी श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा लगाए गए आरोपों की भी पुष्टि की है.
दोनों पीड़ित शिष्यों का कलम बंद बयान और वीडियो रिकॉर्डिंग पर भी बयान दर्ज हुआ. पुलिस ने उनका मेडिकल भी कराया है.सूत्रों के अनुसार दोनों शिष्यों ने एफआईआर में दर्ज यौन उत्पीड़न के बयान को ही दोहराया है. दोनों शिष्यों के बयान देने के बाद अवमुक्तेश्वरानंद पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है.
यह मामला उस समय सामने आया जब आशुतोष ब्रह्मचारी ने अदालत में अर्जी दाखिल कर माघ मेले के दौरान नाबालिग लड़कों के साथ दुष्कर्म का आरोप लगाया था. इसी अर्जी पर सुनवाई करते हुए पॉक्सो एक्ट की विशेष अदालत ने झूंसी थाने को मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था. विशेष न्यायाधीश विनोद कुमार चौरसिया के निर्देश के बाद पुलिस ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी और तीन अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया.
हरदोई में दर्ज बयानों के बाद पुलिस टीम प्रयागराज लौट आई है. अधिकारियों का कहना है कि अब पीड़ितों का मेडिकल परीक्षण कराया जाएगा और उपलब्ध तथ्यों व साक्ष्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी. जांच एजेंसियां इलेक्ट्रॉनिक और प्रत्यक्ष साक्ष्यों की भी पड़ताल कर रही हैं.
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस सतर्कता से हर पहलू की जांच कर रही है. फिलहाल आरोपों की सत्यता अदालत और जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी, लेकिन नाबालिगों के ताजा बयानों ने इस प्रकरण को और गंभीर बना दिया है.