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NGO Job Scam: ट्रेनिंग से लेकर जॉइनिंग तक सब फर्जी, यूपी के 150 युवाओं को झटका

लखनऊ में NGO में नौकरी और 90 हजार रुपये सैलरी का झांसा देकर करीब 150 युवाओं से एक करोड़ रुपये की ठगी का मामला सामने आया है. फर्जी संस्थाओं के नाम पर रजिस्ट्रेशन और ट्रेनिंग फीस वसूली गई, यहां तक कि जॉइनिंग लेटर भी दिए गए. फील्ड में पहुंचने पर पूरा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ. पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

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मंत्रालय परिसर में कराया फर्जी इंटरव्यू. (Photo: AI-generated)
मंत्रालय परिसर में कराया फर्जी इंटरव्यू. (Photo: AI-generated)

लखनऊ में नौकरी दिलाने के नाम पर एक ऐसा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसने बेरोजगार युवाओं की उम्मीदों को गहरा झटका दिया है. NGO में काम और 90 हजार रुपये तक की सैलरी का लालच देकर करीब 150 लोगों से लगभग एक करोड़ रुपये ठग लिए गए. मामला तब खुला, जब ट्रेनिंग और जॉइनिंग के बाद युवाओं को फील्ड में भेजा गया और वहां पूरी कहानी ही उलट गई.

जानकारी के मुताबिक, आरोपियों ने खुद को स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा बताते हुए दो संस्थाओं बेक फाउंडेशन और जीवन पथ फाउंडेशन के नाम पर भर्ती शुरू की. दावा किया गया कि उन्हें टीबी जागरूकता अभियान का काम मिला है और इसके लिए बड़े स्तर पर युवाओं की जरूरत है. बात को भरोसेमंद बनाने के लिए नौकरी को सरकारी प्रोजेक्ट से जुड़ा बताया गया और सैलरी 31,500 रुपये से लेकर 90,000 रुपये तक बताई गई. नौकरी की तलाश में जुटे युवाओं के लिए यह ऑफर आकर्षक था. गोरखपुर, देवरिया और महाराजगंज समेत कई जिलों से युवक-युवतियां लखनऊ पहुंचे. यहां उनसे रजिस्ट्रेशन, ट्रेनिंग और सिक्योरिटी के नाम पर 90 हजार से लेकर 1 लाख 10 हजार रुपये तक जमा कराए गए. धीरे-धीरे यह संख्या बढ़ती गई और करीब 150 लोगों से कुल मिलाकर लगभग एक करोड़ रुपये वसूले गए.

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होटल में दी गई ट्रेनिंग 

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि आरोपियों ने पूरी प्रक्रिया को बेहद व्यवस्थित तरीके से अंजाम दिया. युवाओं को भरोसे में लेने के लिए लखनऊ के महानगर इलाके के एक होटल में ट्रेनिंग कराई गई. वहां प्रेजेंटेशन के जरिए काम समझाया गया, फील्ड में क्या करना है इसकी जानकारी दी गई और टीम बनाकर अभियान चलाने की बात कही गई. इसके बाद सभी को नियुक्ति पत्र भी दे दिए गए, जिन्हें देखकर किसी को शक की गुंजाइश नहीं बची. ट्रेनिंग पूरी होने के बाद जब युवाओं को उनके-अपने जिलों में काम शुरू करने के लिए भेजा गया, तब इस पूरे खेल की असलियत सामने आई. जिन विभागों के नाम पर काम करने की बात कही गई थी, वहां पहुंचने पर अधिकारियों ने साफ कर दिया कि ऐसा कोई प्रोजेक्ट उनके पास नहीं है और न ही इन संस्थाओं का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड है. यह सुनते ही युवाओं के पैरों तले जमीन खिसक गई.

मोबाइल बंद, लटका ताला 

सच्चाई सामने आने के बाद जब पीड़ितों ने आरोपियों से संपर्क करने की कोशिश की, तो सभी मोबाइल नंबर बंद मिले. विकासनगर इलाके में जिस दफ्तर से यह पूरा काम संचालित हो रहा था, वहां भी ताला लटका मिला. एक झटके में पूरा नेटवर्क गायब हो चुका था. जिन लोगों ने अपनी जमा पूंजी या उधार लेकर पैसे जमा किए थे, वे अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं. इस घटना से प्रभावित युवाओं में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जो छोटे शहरों और कस्बों से बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर आए थे. किसी ने परिवार से उधार लिया, तो किसी ने कर्ज लेकर पैसे जमा किए. अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी मेहनत की कमाई वापस पाने की है.

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पुलिस से हुई शिकायत 

मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़ितों ने पुलिस से शिकायत की. इसके बाद लखनऊ के विकासनगर थाने में तीन आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है. पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी. साथ ही आरोपियों की तलाश के लिए टीमें भी लगाई गई हैं. फिलहाल इस पूरे मामले में पीड़ितों की नजर पुलिस कार्रवाई पर टिकी है. उन्हें उम्मीद है कि आरोपियों की गिरफ्तारी होगी और उनकी रकम वापस मिल सकेगी. 

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