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अमीर बनने का ख्वाब, ट्यूशन से निकाले जाने की खुन्नस... कानपुर की टीचर कैसे बनी अपने छात्र की 'कातिल'

Kanpur Kushagra Case: बताया जा रहा है कि फीस के अलावा अक्सर रचिता को कुशाग्र के घर से आर्थिक मदद भी मिल जाया करती थी. लेकिन कुछ महीने पहले कुशाग्र के घरवालों ने ट्यूशन बंद कर दिया. जिससे फीस के साथ-साथ उसकी आर्थिक मदद का जरिया भी बंद हो गया था. वहीं, उसके ऊपर लोन और घर खर्च का बोझ बढ़ता जा रहा था.

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पुलिस की गिरफ्त में कुशाग्र के तीनों हत्यारोपी
पुलिस की गिरफ्त में कुशाग्र के तीनों हत्यारोपी

कानपुर में कुशाग्र हत्याकांड के तीनों आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आ चुके हैं. लेकिन हत्या के मोटिव को लेकर पुलिस की थ्योरी पर सवाल उठ रहे हैं. पुलिस का कहना है कि ट्यूशन टीचर रचिता से नजदीकी कुशाग्र की हत्या वजह बनी जबकि घरवालों के मुताबिक, बिना तथ्य कुशाग्र को लेकर बेबुनियाद दावे किए जा रहे हैं. असल वजह फिरौती है. फिलहाल, पुलिस हर एंगल से जांच-पड़ताल कर रही है. इस बीच एक और तथ्य सामने आया है. जिसमें हत्या की वजह रचिता की अमीरी की चाहत और उसे ट्यूशन से निकालने की खुन्नस बताई गई है. 

दरअसल, रचिता करीब 6 साल से कुशाग्र को ट्यूशन पढ़ा रही थी. इस दौरान उसने घरवालों का विश्वास जीत लिया. बाद में वो कुशाग्र के छोटे भाई आदि को भी पढ़ाने लगी. उसे करीब पांच हजार रुपये फीस मिलती थी, जो कि उसके लिए मुफीद था.  

आर्थिक मदद का जरिया बंद हो गया था

बताया जा रहा है कि फीस के अलावा अक्सर रचिता को कुशाग्र के घर से आर्थिक मदद भी मिल जाया करती थी. लेकिन कुछ महीने पहले कुशाग्र के घरवालों ने ट्यूशन बंद कर दिया. उन्होंने अपने बच्चों को रचिता से पढ़ाने से मना कर दिया. रचिता इस बात से खफा थी. क्योंकि, फीस के साथ-साथ उसकी आर्थिक मदद का जरिया भी बंद हो गया था.

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वहीं, उसके ऊपर लोन और घर खर्च का बोझ बढ़ता जा रहा था. बॉयफ्रेंड प्रभात और कुशाग्र हत्याकांड के मुख्य आरोपी संग उसे घर भी बसाना था. पैसों की चाहत में रचिता और प्रभात ने  कुशाग्र की किडनैपिंग का खौफनाक प्लान बना डाला. 

पुलिस के खुलासे पर कुशाग्र के परिवार ने उठाए सवाल

कुशाग्र के चाचा संजय कनोडिया के मुताबिक, मार्च में घर में एक बर्थ डे पार्टी थी जिसमें हमने रचिता को बुलाया था. वो अपने बॉयफ्रेंड संग आई थी. वारदात से करीब महीने भर पहले भी वह प्रभात संग घर आई थी. काश, उसी समय हम लोग उसके इरादे भांप जाते. 

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वहीं, पुलिस के खुलासे पर संजय कनोडिया कहते हैं- पुलिस ने बगैर किसी सबूत के हमारे भतीजे का चरित्र हनन कर दिया. वह 15-16 साल का छोटा बच्चा था. टीचर 25 साल की थी. दोनों के बीच संबंध कैसे हो सकते हैं. उसको (टीचर) हम बेटी जैसे मानते थे. वह अक्सर घर आती जाती थी. टीचर प्रभात से प्रेम करती थी. उससे शादी करने जा रही थी, तो हमारे भतीजे से क्यों प्रेम करेगी या मेरा भतीजा उससे क्यों प्रेम करेगा? 

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रचिता और प्रभात ने जुटा ली थी कुशाग्र की पूरी जानकारी 

दरअसल, कुशाग्र के घर जाकर, उसके आने-जाने वाले रास्तों की रेकी करके और उससे मुलाकात करके रचिता और प्रभात ने पूरी जानकारी जुटा ली थी. वो बस मौके का इंतजार कर रहे थे. वारदात से तीन दिन पहले उन्होंने नारियल की रस्सी भी खरीद ली थी. कमरे में रजाई-गद्दा भी डाल दिया था. यानि कुशाग्र की किडनैपिंग का प्लान तैयार था. लेकिन फिर ऐसा क्या हुआ कि उसकी फिरौती की रकम मिलने से पहले ही हत्या कर दी गई. 

फिलहाल, पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई. किडनैपिंग, फिरौती, प्रेम प्रसंग हर एंगल से जांच-पड़ताल की जा रही है. डीसीपी सेंट्रल ने बताया कि हत्याकांड की तह तक जाने के लिए आरोपियों को कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी. आरोपियों और उनके परिजनों की कॉल डिटेल निकालकर उसे खंगाला जा रहा है. वहीं, 15-20 दिन के भीतर कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल करने के साथ ही केस को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाए जाने की अपील अदालत में की जाएगी. 

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