लखनऊ अग्निकांड के बाद यूपी में शुरू हुई बिल्डिंगों का जांच अभियान अब बड़े-बड़े रसूखदारों के दरवाजे तक पहुंचने लगा है. कानपुर के जाजमऊ इलाके में ऐसा ही एक दृश्य देखने को मिला, जब कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) की टीम सीधे उस इमारत तक पहुंच गई जिसका संबंध विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के परिवार से बताया जा रहा है. कुछ ही देर में अधिकारियों ने निरीक्षण किया, दस्तावेज खंगाले और फिर बेसमेंट में चल रही गतिविधियों पर कार्रवाई करते हुए कोचिंग संस्थान और रेस्टोरेंट दोनों को सील कर दिया.
लखनऊ हादसे के बाद बदला प्रशासन का रुख
राजधानी लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड ने शासन और प्रशासन को झकझोर दिया था. हादसे के बाद मुख्यमंत्री स्तर से सुरक्षा मानकों की समीक्षा के निर्देश दिए गए. इसके बाद प्रदेशभर में उन भवनों की पहचान शुरू हुई जहां बेसमेंट का उपयोग नियमों के विपरीत किया जा रहा है. कानपुर में भी केडीए, फायर विभाग और स्थानीय प्रशासन ने संयुक्त रूप से कई भवनों की जांच शुरू की. जांच का फोकस उन इमारतों पर था जहां बेसमेंट में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं और सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था. इसी क्रम में अधिकारियों की टीम जाजमऊ क्षेत्र स्थित उस बिल्डिंग तक पहुंची, जिसका स्वामित्व विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के भाई बिट्टू महाना से जुड़ा बताया जा रहा है.
बेसमेंट में मिला कोचिंग सेंटर, साथ में चलता मिला रेस्टोरेंट
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कि भवन के बेसमेंट में कोचिंग संस्थान संचालित किया जा रहा था. इसके अलावा उसी हिस्से में रेस्टोरेंट का संचालन भी किया जा रहा था. जांच के दौरान सुरक्षा व्यवस्थाओं और भवन उपयोग से जुड़े कई बिंदुओं पर सवाल खड़े हुए. अधिकारियों का कहना था कि बेसमेंट का जिस प्रकार इस्तेमाल किया जा रहा था, वह निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं था. सबसे बड़ा सवाल यह था कि यदि किसी आपात स्थिति में आग या अन्य दुर्घटना हो जाती, तो वहां मौजूद छात्रों और कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकालना कितना आसान होता. इन्हीं बिंदुओं को आधार बनाते हुए केडीए ने मौके पर ही कार्रवाई शुरू कर दी. कुछ ही देर में सीलिंग की औपचारिक प्रक्रिया पूरी की गई और कोचिंग संस्थान तथा रेस्टोरेंट दोनों पर ताला लगा दिया गया.
कार्रवाई से मचा हड़कंप
जैसे ही सीलिंग की खबर इलाके में फैली, आसपास के व्यापारियों और स्थानीय लोगों की भीड़ जुटने लगी. लोगों के बीच चर्चा थी कि प्रशासन ने पहली बार किसी प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से जुड़े भवन पर इतनी सख्ती दिखाई है. कई लोग इसे शासन की जीरो टॉलरेंस नीति का उदाहरण बता रहे थे, जबकि कुछ लोगों का कहना था कि शहर में ऐसे कई और भवन हैं जहां वर्षों से बेसमेंट का उपयोग नियमों के विपरीत किया जा रहा है.
बिट्टू महाना ने उठाए सवाल
कार्रवाई के बाद विधानसभा अध्यक्ष के भाई बिट्टू महाना ने केडीए की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि केवल उनकी बिल्डिंग में ही बेसमेंट का उपयोग नहीं हो रहा है, बल्कि पूरे शहर में बड़ी संख्या में ऐसे भवन मौजूद हैं जहां इसी तरह की गतिविधियां संचालित हो रही हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी पूर्व सूचना के सीधे सीलिंग की कार्रवाई कर दी गई. बिट्टू महाना का कहना था कि अधिकारियों से बातचीत के दौरान उन्होंने सहयोग का आश्वासन दिया था. यदि किसी तरह की कमी थी तो उसे दूर करने के लिए भी तैयार थे, लेकिन उन्हें सुधार का अवसर दिए बिना ही भवन सील कर दिया गया. उनका दावा है कि कार्रवाई से पहले विधिवत नोटिस दिया जाना चाहिए था.
प्रशासन का संदेश साफ
अधिकारियों के मुताबिक, लखनऊ जैसी घटनाओं से सबक लेते हुए प्रदेशभर में उन भवनों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है जहां बड़ी संख्या में लोग एकत्रित होते हैं. कोचिंग सेंटर, अस्पताल, होटल, रेस्टोरेंट और व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स इस अभियान के मुख्य केंद्र में हैं. प्रशासन का मानना है कि यदि समय रहते नियमों का पालन नहीं कराया गया तो भविष्य में बड़े हादसे हो सकते हैं.