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दिल्ली से फ्लाइट पकड़ कानपुर आते थे ओटी असिस्टेंट! नोएडा- गाजियाबाद से भी जुड़े अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट के तार

Kanpur Illegal kidney transplant racket updates: कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट के खिलाफ कमिश्नरी पुलिस ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है. पुलिस ने दो शातिर ओटी असिस्टेंट को गिरफ्तार किया है, जो दिल्ली-NCR के बड़े अस्पतालों में काम करते थे और किडनी तस्करी के इस काले खेल में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे.

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कानपुर में पुलिस ने किया किडनी रैकेट का पर्दाफाश (Photo- ITG)
कानपुर में पुलिस ने किया किडनी रैकेट का पर्दाफाश (Photo- ITG)

कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट नेटवर्क के खिलाफ कमिश्नरी पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो ओटी असिस्टेंट को गिरफ्तार किया है. ये दोनों आरोपी हाल ही में आहूजा नर्सिंग होम में हुए अवैध ट्रांसप्लांट के दौरान मौजूद थे. पुलिस अब इस मामले में शामिल एक फरार डॉक्टर की तलाश में जुटी है.

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कुलदीप सिंह राघव और राजेश कुमार के रूप में हुई है. कुलदीप हापुड़ का निवासी है और गाजियाबाद के शांतिगोपाल नर्सिंग होम में ओटी तकनीशियन के तौर पर कार्यरत है, जबकि राजेश कुमार गाजियाबाद का रहने वाला है और नोएडा के सर्वोदय हॉस्पिटल में काम करता है. पुलिस ने दोनों को कानपुर के दलहन क्रॉसिंग इलाके से दबोचा.

जांच में सामने आया है कि दोनों तकनीशियन हर केस के लिए 35 से 40 हजार रुपये लेते थे. अवैध ऑपरेशन के लिए वे दिल्ली से फ्लाइट के जरिए कानपुर पहुंचे थे. सर्जरी के दौरान इनकी भूमिका उपकरण और दवाओं की व्यवस्था करना थी.

डीसीपी कासिम आबिदी के मुताबिक, इस पूरे रैकेट में अन्य लोगों की भी संलिप्तता है, जिनकी तलाश के लिए लुकआउट नोटिस जारी किया गया है. पुलिस टीम नेटवर्क से जुड़े सभी आरोपियों तक पहुंचने के लिए लगातार दबिश दे रही है.

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बेगूसराय के डोनर के बयान ने हिलाया पुलिस महकमा

पुलिस के अनुसार, बिहार के बेगूसराय जिले के एक किडनी डोनर आयुष को ICU में होश आने के बाद उसका बयान दर्ज किया गया. आयुष ने बताया कि आर्थिक तंगी के कारण उसने अपनी जमीन गिरवी रख दी थी. दिल्ली के एक व्यक्ति ने टेलीग्राम के जरिए उसे फंसाया और बाद में उसकी मुलाकात आरोपी डॉक्टरों से कराई गई. 

पीड़ित ने बताया कि शुरू में उसे किडनी दान करने के लिए 9 लाख रुपये देने का वादा किया गया था, जिसे बाद में घटाकर 6 लाख रुपये कर दिया गया लेकिन आखिर में उसे केवल 3.5 लाख रुपये ही मिले, जिसको लेकर गिरोह के सदस्यों के बीच विवाद भी हुआ।

पुलिस ने बताया कि अनुराग, अफजल और वैभव मेरठ के एक अस्पताल से जुड़े थे, जबकि रोहित गिरोह का सरगना था और अपनी टीम के साथ ट्रांसप्लांट की पूरी प्रक्रिया अंजाम देता था. वह दवाइयां और उपकरण अपने साथ लाता था.

पुलिस के मुताबिक, सर्जरी से पहले सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए जाते थे, अस्पतालकर्मियों को छुट्टी पर भेज दिया जाता था और किडनी दान करने वाला और रिसीवर को अलग-अलग स्थानों पर रखा जाता था.

पुलिस ने बताया कि अब तक कानपुर के एक अस्पताल में ऐसे 8 ट्रांसप्लांट की पुष्टि हुई है, जबकि सबूत 40 से 50 मामलों की ओर इशारा करते हैं. पुलिस

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कानपुर पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि इस मामले में फरार डॉक्टरों रोहित उर्फ राहुल, अनुराग उर्फ अमित, अफजल और वैभव को पकड़ने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं.

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