उत्तर प्रदेश में यूजीसी बिल को लेकर बढ़ते विरोध के बीच भाजपा के सांसद साक्षी महाराज और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने पार्टी लाइन से हटकर अपनी ही सरकार को असहज कर दिया है. साक्षी महाराज ने ओबीसी और एससी समाज की गोलबंदी को लेकर आगाह किया, वहीं बृजभूषण ने इसे गांवों में 'करंट' की तरह फैलने वाला मुद्दा बताया. यह अंतर्द्वंद फरवरी 2026 के आखिरी सप्ताह में तब खुलकर सामने आया जब यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में छात्रों का प्रदर्शन तेज हो गया. इस राजनीतिक अस्थिरता का लाभ उठाने के लिए अखिलेश यादव ने सॉफ्ट हिंदुत्व का कार्ड खेलते हुए नया नारा बुलंद किया है.
साक्षी महाराज की '90 बनाम 10' वाली चेतावनी
उन्नाव सांसद साक्षी महाराज ने सवर्ण समाज के विरोध पर चिंता जताते हुए एक बड़ा राजनीतिक संकेत दिया है. उन्होंने कहा कि यदि देश का 90 प्रतिशत (ओबीसी और एससी) समाज इस विरोध को अपने खिलाफ मानकर एकजुट हो गया, तो सवर्ण समाज से कोई विधायक या सांसद नहीं बन पाएगा. साक्षी महाराज ने सलाह दी है कि इस मामले को बहुत ज्यादा तूल नहीं देना चाहिए और निजी स्वार्थों के बजाय राष्ट्रहित में पीएम मोदी और सीएम योगी पर विश्वास करना चाहिए.
बृजभूषण का जमीनी आकलन: 'गांवों में है करंट'
पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने जमीनी हकीकत बयां करते हुए दावा किया कि केवल सवर्ण ही नहीं, बल्कि पिछड़ा और दलित समाज भी इस कानून के पक्ष में नहीं है. उन्होंने कहा कि दिल्ली में बैठकर कुछ लोग भले ही दलितों के पक्ष में होने का दावा करें, लेकिन गांवों में स्थिति अलग है बृजभूषण के मुताबिक, समाज का कोई ऐसा वर्ग नहीं बचा है जो इस बिल का विरोध न कर रहा हो. संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भी कानून में बदलाव की गुंजाइश की बात कहकर बीच का रास्ता अपनाने की सलाह दी है.
अखिलेश यादव का 'सनातन' कार्ड और भाजपा की घेराबंदी
इस अंतर्द्वंद को भांपते हुए अखिलेश यादव ने भाजपा को उसी की पिच पर घेरने की तैयारी कर ली है. उन्होंने 'भाजपा हटाओ, सनातन बचाओ' का नया नारा देते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का वीडियो साझा किया और भाजपा पर संतों के अपमान का आरोप लगाया. अखिलेश को लगता है कि शंकराचार्य के मुद्दे और यूजीसी बिल से भाजपा का पारंपरिक समर्थक वर्ग नाराज है. सपा अब इसी नाराजगी को भुनाकर भाजपा के कोर वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है.