उत्तर कैडर के आईएएस रिंकू सिंह राही ने इस्तीफा दे दिया है लेकिन यह इस्तीफा अपने आप में अनोखा है. अनोखा इसलिए कि क्योंकि नौकरी छोड़ने की जो वजह बताई गई वो बेहद दिलचस्प है. उसमें कहा गया कि जब बतौर आईएएस काम करने का मौका नहीं मिल रहा और विभाग में उनकी कोई उपयोगिता नहीं है तो वह इस नौकरी में नहीं रहना चाहते. हालांकि, यह इस्तीफा उनका तकनीकी है. 'तकनीकी त्यागपत्र' का मतलब कि वह पूर्ववर्ती सेवा में जाना चाहते हैं यानी वह पीसीएस अधिकारी बनना चाहते हैं. रिंकू सिंह कैसे पूर्ववर्ती सेवा में जा सकेंगे? क्यों आईएएस की नौकरी छोड़ना चाहते हैं? इन तमाम सवालों के जवाब खुद रिंकू सिंह ने अपने 7 पेज के 'तकनीकी त्यागपत्र' में दिए है. आइये जानते हैं पूरी कहानी...
2023 बैच के आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही ने काम न मिलने और उपेक्षा से आहत होकर अपना तकनीकी इस्तीफा सरकार को भेज दिया है. जुलाई 2025 में शाहजहांपुर के पुवाया में एसडीएम रहते हुए वकीलों के सामने उठक-बैठक लगाने का वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें राजस्व परिषद से संबद्ध किया गया था. परिषद में दो महीने तक कोई जिम्मेदारी न मिलने पर उन्होंने 'नो वर्क नो पे' के आधार पर वेतन लेने से इनकार कर दिया. रिंकू राही ने अपनी पुरानी सेवा में लौटने की इच्छा जताते हुए स्पष्ट किया है कि वे जनता के पैसे की बर्बादी नहीं चाहते.
भ्रष्टाचार के खिलाफ मिली 7 गोलियां
रिंकू राही के संघर्ष की कहानी साल 2009 से शुरू होती है, जब वे मुजफ्फरनगर में जिला समाज कल्याण अधिकारी थे. उन्होंने विभाग में हो रहे 100 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया था. इस ईमानदारी की कीमत उन्हें अपनी जान जोखिम में डालकर चुकानी पड़ी. 26 मार्च 2009 को उन पर बैडमिंटन खेलते समय जानलेवा हमला हुआ और बदमाशों ने उन्हें 7 गोलियां मारीं. इस हमले में उनकी एक आंख पूरी तरह खराब हो गई और चेहरे पर गंभीर चोटें आईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी.
धमकी और सिस्टम की बेरुखी
इस्तीफे में राही ने खुलासा किया कि घोटाले के दौरान तत्कालीन प्रमुख सचिव ने उन्हें फोन पर धमकी दी थी कि ईमानदारी नहीं छोड़ी तो गन्ने के खेत में कंकाल मिलेगा. विडंबना यह रही कि जिस घोटाले की वजह से उन पर हमला हुआ, उसकी फाइल दबा दी गई और मुख्य आरोपी भी छूट गया. आईएएस बनने का सपना उन्होंने इसलिए देखा था ताकि वे जनता की बेहतर सेवा कर सकें, लेकिन वर्तमान तैनाती में उन्हें एक प्रोग्रामर तक उपलब्ध नहीं कराया गया, जिससे वे जनहित के काम कर सकें.
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16 प्रयासों के बाद मिली थी सफलता
रिंकू सिंह राही ने हार न मानने का जज्बा दिखाते हुए 16 प्रयासों के बाद 2023 में आईएएस की कुर्सी हासिल की थी. इसके लिए उन्होंने दिव्यांगता आरक्षण का लाभ भी अंतिम समय में लिया. उनका तर्क है कि जनता के पैसे से मिलने वाली तनख्वाह पर बिना काम के उनका कोई हक नहीं है. फिलहाल उनका राजनीति में जाने का कोई इरादा नहीं है; वे केवल काम करने की आजादी चाहते हैं. अब गेंद सरकार के पाले में है कि उनके इस तकनीकी इस्तीफे पर क्या निर्णय लिया जाता है.