लखनऊ में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के चर्चित अधिकारी अभिषेक प्रकाश की सेवा में वापसी हो गई है. करीब एक साल के निलंबन के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें फिर से बहाल करते हुए नई जिम्मेदारी सौंप दी है. शासन की ओर से जारी आदेश के बाद प्रशासनिक हलकों में इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है.
उत्तर प्रदेश शासन ने अभिषेक प्रकाश को सचिव, सामान्य प्रशासन के पद पर तैनाती दी है. माना जा रहा है कि निलंबन खत्म होने के बाद यह उनकी प्रशासनिक वापसी का अहम चरण है. उनकी नई तैनाती को राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है और अब सभी की नजरें उनके कार्यभार ग्रहण करने पर टिकी हैं.
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शासन ने जारी किया बहाली का आदेश
उत्तर प्रदेश शासन की ओर से IAS अभिषेक प्रकाश की बहाली का आधिकारिक आदेश जारी किया गया है. नियुक्ति अनुभाग-5 के विशेष सचिव IAS विजय कुमार की ओर से यह आदेश जारी किया गया. आदेश के अनुसार 15 मार्च 2026 से अभिषेक प्रकाश को दोबारा सेवा में बहाल माना जाएगा.
सरकार ने स्पष्ट किया है कि 14 मार्च 2026 तक की अवधि को निलंबन अवधि माना जाएगा. इसके बाद से उनकी सेवा में वापसी का आदेश प्रभावी होगा. शासन ने यह भी कहा है कि बहाली के बावजूद उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई जारी रहेगी.
एक दिन पहले हुई बहाली, अब मिली तैनाती
अभिषेक प्रकाश को एक दिन पहले ही उत्तर प्रदेश सरकार ने सेवा में बहाल किया था. इसके बाद अब उन्हें सचिव, सामान्य प्रशासन की जिम्मेदारी सौंप दी गई है. उनकी पोस्टिंग को लेकर प्रशासनिक स्तर पर लगातार चर्चाएं चल रही थीं.
बताया गया कि इन्वेस्ट यूपी में सीईओ रहते हुए कमीशन के मामले में IAS अभिषेक प्रकाश को निलंबित किया गया था. मामले की जांच के बाद अब उनका निलंबन समाप्त कर दिया गया है और उन्हें नई तैनाती दे दी गई है. सरकार के इस फैसले के बाद उनकी प्रशासनिक भूमिका को लेकर नई उम्मीदें जताई जा रही हैं.
हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत
बता दें कि अभिषेक प्रकाश को 20 मार्च 2025 को भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के बाद सस्पेंड किया गया था. उन पर आरोप लगा था कि उन्होंने 'SAEL Solar P6 प्राइवेट लिमिटेड' नामक कंपनी से एक बिचौलिए के जरिए 5% कमीशन की मांग की थी. कंपनी के प्रतिनिधि की शिकायत पर जांच के बाद यह बड़ी कार्रवाई की गई थी.
फरवरी 2026 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाया. कोर्ट ने माना कि अभिषेक प्रकाश के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि के लिए कोई ठोस प्रमाण मौजूद नहीं हैं. साक्ष्यों के अभाव में कोर्ट ने उनके खिलाफ दाखिल चार्जशीट को पूरी तरह रद्द कर दिया, जिससे उनकी बहाली का रास्ता साफ हो गया.