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हनुमानगढ़ी में नमाज वाले बयान पर बढ़ी सियासत, अलीगढ़ में शाही चीफ मुफ्ती और सपा नेता बोले, निष्पक्ष जांच हो

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हनुमानगढ़ी में नमाज पढ़ाए जाने संबंधी बयान पर अलीगढ़ में शाही चीफ मुफ्ती मौलाना चौधरी इफ्राहीम हुसैन और समाजवादी पार्टी छात्र सभा के महानगर अध्यक्ष मोहम्मद मोहसिन मेवाती ने प्रतिक्रिया दी. दोनों ने कहा कि ऐसे बयान समाज में तनाव बढ़ा सकते हैं. यदि पहले ऐसा हुआ है तो सरकार को इसकी जांच करानी चाहिए.

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मौलाना चौधरी इफ्राहीम हुसैन और मोहम्मद मोहसिन मेवाती. (Photo: ITG)
मौलाना चौधरी इफ्राहीम हुसैन और मोहम्मद मोहसिन मेवाती. (Photo: ITG)

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हनुमानगढ़ी में नमाज पढ़ाए जाने संबंधी बयान को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत तेज हो गई है. इस मुद्दे पर अलीगढ़ में शाही चीफ मुफ्ती उत्तर प्रदेश मौलाना चौधरी इफ्राहीम हुसैन और समाजवादी पार्टी छात्र सभा के महानगर अध्यक्ष मोहम्मद मोहसिन मेवाती ने प्रतिक्रिया दी. दोनों ने कहा कि धार्मिक मामलों पर ऐसे बयान देने से बचना चाहिए और यदि अतीत में ऐसा कोई मामला हुआ है तो सरकार इसकी जांच कराए.

शाही चीफ मुफ्ती मौलाना चौधरी इफ्राहीम हुसैन ने कहा कि इस तरह के बयान धार्मिक भावनाओं को भड़काने वाले हो सकते हैं. उनका कहना था कि नेताओं को ऐसे मुद्दों पर बोलते समय सावधानी बरतनी चाहिए. साथ ही उन्होंने कहा कि ऐसे बयान समाज में एक-दूसरे के प्रति नफरत पैदा कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री द्वारा जिस घटना का जिक्र किया गया है, वह वास्तव में हुई है, तो सरकार को उसकी निष्पक्ष जांच करानी चाहिए. जांच के बाद ही सच्चाई सामने आएगी और उसी आधार पर आगे की कार्रवाई होनी चाहिए.

समाजवादी पार्टी छात्र सभा के महानगर अध्यक्ष मोहम्मद मोहसिन मेवाती ने भी कहा कि हर धर्म की अपनी इबादतगाह होती है. उन्होंने कहा कि हर शख्स को अपनी आस्था के अनुसार अपने धर्मस्थल पर पूजा या इबादत करने का अधिकार है. लेकिन किसी दूसरे धर्म के पूजा स्थल पर जाकर इबादत करना उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि यदि ऐसा कभी हुआ है तो वह गलत है और उसकी भी जांच होनी चाहिए.

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योगी के बयान पर मुफ्ती और सपा नेता की एक जैसी राय

उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक मुद्दों पर ऐसे बयान समाज में तनाव बढ़ा सकते हैं. इसलिए सभी राजनीतिक दलों और नेताओं को इस तरह के बयानों से बचना चाहिए. दरअसल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बयान में कहा था कि पूर्व की सरकार के दौरान अयोध्या के हनुमानगढ़ी में नमाज पढ़वाई गई थी. उन्होंने सवाल उठाया था कि क्या कोई जामा मस्जिद में हनुमान चालीसा का पाठ कर सकता है. इसी बयान के बाद यह राजनीतिक और धार्मिक बहस शुरू हुई है.

इस बीच वर्ष 2003 की एक घटना का भी जिक्र किया जा रहा है. उस समय उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी और मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री थे. उसी दौरान हनुमानगढ़ी के महंत ज्ञानदास ने इफ्तार पार्टी का आयोजन किया था. इस कार्यक्रम में बाबरी मस्जिद मामले के पक्षकार हाशिम अंसारी और मुस्लिम नेता सादिक अली, जिन्हें बाबू टेलर के नाम से भी जाना जाता है, सहित कई मुस्लिम प्रतिनिधि शामिल हुए थे.

नमाज वाले बयान पर अलीगढ़ में शुरू हुई नई बहस

मुख्यमंत्री के बयान और उसके बाद आई प्रतिक्रियाओं के बीच अब यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है. शाही चीफ मुफ्ती और समाजवादी पार्टी छात्र सभा के नेता दोनों का कहना है कि यदि किसी घटना को लेकर विवाद है तो उसका समाधान जांच के जरिए होना चाहिए, न कि ऐसे बयानों के जरिए जो समाज में तनाव पैदा करें.
 

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