ग्रेटर नोएडा स्थित बिसरख कोतवाली पुलिस ने फर्जी वेबसाइट बनाकर बहुराष्ट्रीय कंपनियों (एमएनसी) में नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगारों से ठगी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने गिरोह के सरगना समेत तीन आरोपियों को शुक्रवार को इटेड़ा गोल चक्कर के पास सर्विस रोड से गिरफ्तार किया.
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हिसार (हरियाणा) निवासी विकास डाबर (34), औरैया निवासी अरुण कुमार (28) और बुलंदशहर निवासी वैभव कुमार (23) के रूप में हुई है. पुलिस ने इनके कब्जे से कंप्यूटर, तीन मोबाइल, छह विभिन्न कंपनियों के फर्जी जॉब ऑफर लेटर और 7 हजार 600 रुपये नकद बरामद किए हैं. पुलिस के अनुसार यह गिरोह पिछले पांच माह से सक्रिय था और अब तक 20 से अधिक लोगों से 10 लाख रुपये से ज्यादा की ठगी कर चुका है.
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शिकायत के बाद पुलिस ने बनाई विशेष टीम
डीसीपी सेंट्रल नोएडा ने बताया कि पुलिस को शिकायत मिली थी कि कुछ लोग एमएनसी कंपनियों में अच्छी सैलरी पर नौकरी दिलाने का झांसा देकर बेरोजगारों से पैसे मांग रहे हैं. बाद में उन्हें फर्जी ऑफर लेटर भेजकर ठगी की जा रही है. शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई.
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधिकारियों के निर्देशन में एक विशेष टीम गठित की गई. तकनीकी साक्ष्यों और गोपनीय सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने वर्तमान में आम्रपाली गोल्फ होम्स सोसायटी, गौड़ सिटी-2 में रहने वाले विकास डाबर, सेक्टर-45 नोएडा निवासी अरुण कुमार और खोड़ा कॉलोनी गाजियाबाद निवासी वैभव कुमार को गिरफ्तार किया.
फर्जी वेबसाइट और ईमेल से करते थे ठगी
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी myworkdayjobs.com और mailhostinger.com नाम की फर्जी वेबसाइट बनाकर नामी बहुराष्ट्रीय कंपनियों में नौकरी दिलाने का लालच देते थे. वे नौकरी तलाश रहे युवाओं का डाटा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और डार्क वेब के माध्यम से हासिल करते थे. इसके बाद उन लोगों से संपर्क कर उन्हें 5 लाख रुपये प्रतिवर्ष तक की सैलरी वाली नौकरी का भरोसा दिलाते थे.
आरोपी नौकरी लगवाने के नाम पर वार्षिक पैकेज का 15 से 20 प्रतिशत तक कमीशन लेने की शर्त रखते थे. शुरुआत में वे टोकन मनी के रूप में 40 हजार से 60 हजार रुपये तक एडवांस लेते थे. इसके बाद नामी कंपनियों की तर्ज पर फर्जी ई-मेल आईडी बनाकर अभ्यर्थियों को जॉब ऑफर लेटर भेजते थे, जिनमें कंपनी का लोगो, जॉइनिंग डेट और अन्य विवरण इस तरह तैयार किए जाते थे कि वे असली प्रतीत हों.
जॉइनिंग के समय खुलता था ठगी का राज
जब अभ्यर्थियों को ऑफर लेटर मिलता था तो उन्हें नौकरी मिलने का भरोसा हो जाता था और वे शेष रकम भी आरोपियों के बताए बैंक खातों में ऑनलाइन ट्रांसफर कर देते थे. लेकिन जब वे संबंधित कंपनी में जॉइनिंग के लिए पहुंचते थे, तब उन्हें पता चलता था कि ऐसा कोई ऑफर जारी ही नहीं किया गया है.
इस दौरान आरोपी पीड़ितों को तकनीकी समस्या या दस्तावेजों में त्रुटि का बहाना बनाकर कुछ समय तक गुमराह करते रहते थे. कई मामलों में वे किसी दूसरी कंपनी के नाम से नया फर्जी ऑफर लेटर भेजकर भी लोगों को भ्रमित करते थे. आरोपी कंप्यूटर सिस्टम की मदद से फर्जी दस्तावेज तैयार करते थे. बरामद जॉब ऑफर लेटर में तीन अल्टांस कंपनी और तीन नॉर्थवेस्ट रिवेन्यू साइकिल मैनेजमेंट कंपनी के नाम शामिल हैं.
डिजिटल पेमेंट से लेते थे पैसे
पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे नौकरी तलाश रहे लोगों को पहले अपने जाल में फंसाते थे और उन्हें 30 हजार से 60 हजार रुपये तक मासिक सैलरी वाली नौकरी दिलाने का भरोसा देते थे. सौदा तय होने के बाद वे एडवांस राशि लेते और फर्जी ऑफर लेटर जारी कर देते थे.
आरोपी मोबाइल फोन के माध्यम से पीड़ितों से बातचीत करते थे और फोनपे, पेटीएम तथा गूगल पे जैसे डिजिटल माध्यमों से पैसे मंगाते थे. पुलिस अब बरामद मोबाइल फोन और बैंक खातों की जांच कर रही है. साथ ही आरोपियों द्वारा बनाई गई फर्जी वेबसाइट को भी बंद करा दिया गया है.
निजी कंपनियों के अनुभव का उठाया फायदा
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार मुख्य आरोपी विकास डाबर बीबीए पास है और करीब एक साल पहले एक विदेशी हेल्थकेयर कंपनी में क्लेम सेटलमेंट का काम करता था. अरुण कुमार बीकॉम पास है और विकास के साथ मिलकर इस काम की शुरुआत की थी. वहीं वैभव कुमार बीएससी पास है और उसने भी निजी कंपनियों में काम किया है.
पुलिस के मुताबिक, तीनों आरोपियों ने अपने पुराने अनुभव का फायदा उठाकर नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का नेटवर्क तैयार किया था. गिरोह के सदस्य मुख्य रूप से मथुरा, बिजनौर, बागपत और हरियाणा के हिसार सहित कई क्षेत्रों के युवाओं को निशाना बनाते थे. पुलिस मामले में आगे की जांच कर रही है.