उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में 3 फरवरी को हुई शिवशंकर दुबे की हत्या का पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है. पुलिस के मुताबिक, हत्या किसी बाहरी हमलावर ने नहीं बल्कि उनके छोटे भाई अजय शंकर दुबे ने की थी. घटना करनैलगंज कोतवाली क्षेत्र के नारायण मांझा गांव के दुल्हिन पुरवा की है.
परिवार की ओर से पहले पांच सगे पट्टीदारों के खिलाफ जमीनी रंजिश में हत्या का मुकदमा दर्ज कराया गया था. लेकिन पुलिस जांच में सच्चाई सामने आने के बाद वे सभी निर्दोष साबित हुए. एसपी विनीत जायसवाल ने बताया कि आरोपी अजय शंकर दुबे को गिरफ्तार कर लिया गया है.
आर्थिक सहयोग से इनकार बना हत्या की वजह
एसपी विनीत जायसवाल के अनुसार अजय शंकर दुबे यूपीएससी (UPSC) की तैयारी कर बड़ा अफसर बनने का सपना देख रहा था. वह पढ़ाई में मेधावी था. उसने हाईस्कूल में 76%, इंटर में 68% और स्नातक में 77% अंक हासिल किए थे. वह दिल्ली के एक कोचिंग सेंटर में तैयारी कर रहा था और खर्च के लिए बड़े भाई पर निर्भर था.
जब उसने दूसरे कोचिंग में दाखिले के लिए एक लाख रुपये मांगे तो बड़े भाई शिवशंकर दुबे ने मना कर दिया और गांव आकर खेती में हाथ बंटाने को कहा. इसी बात से अजय नाराज हो गया और उसने हत्या की योजना बनाई.

सुनियोजित तरीके से की वारदात
एसपी विनीत जायसवाल ने बताया कि अजय ने घटना से करीब एक हफ्ते पहले करनैलगंज से चाकू खरीदा और 31 जनवरी को उसकी धार तेज कराई. 3 फरवरी की रात वह जेब में चाकू और लाल मिर्च पाउडर की पुड़िया लेकर भाई के साथ खेत में सिंचाई करने गया. मौके का फायदा उठाकर उसने भाई की आंखों में मिर्च पाउडर फेंका और गले पर ताबड़तोड़ वार किए.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में 17 चाकू के घाव मिले. हत्या के बाद उसने भाई की जेब से 31 हजार 500 रुपये निकालकर छिपा दिए और बाहर आकर अज्ञात हमलावरों की कहानी गढ़ दी. पुलिस की तकनीकी और मैन्युअल जांच में विरोधाभास सामने आने पर वह टूट गया और सच कबूल कर लिया. खुलासे में लगी टीम को एसपी ने 25 हजार रुपये इनाम देने की घोषणा की है. मामले में वैधानिक कार्रवाई जारी है.