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तो क्या बेटियों की घर में होती थी पिटाई... गाजियाबाद ट्रिपल सुसाइड जांच में पुलिस को मिला नया सुराग

गाजियाबाद के टीला मोड़ क्षेत्र में तीन नाबालिग बहनों की आत्महत्या के मामले में पुलिस डिजिटल जांच तेज कर रही है. बच्चियों के दो बेचे गए मोबाइल फोन रिकवर किए जाएंगे. पिता ने बताया कि बच्चियां कोरियन पर्सनैलिटी बना चुकी थीं और कोरिया जाने की जिद करती थीं. पुलिस डायरी, मोबाइल और ऐप्स की जांच कर रही है.

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गाजियाबाद में तीन बहनों की मौत ने मचाई सनसनी. (Photo: ITG)
गाजियाबाद में तीन बहनों की मौत ने मचाई सनसनी. (Photo: ITG)

गाजियाबाद के थाना टीला मोड़ क्षेत्र स्थित भारत सिटी में तीन नाबालिग बहनों द्वारा आत्महत्या किए जाने के मामले में अब लगातार नए तथ्य सामने आ रहे हैं. यह मामला न सिर्फ झकझोरने वाला है बल्कि समाज, अभिभावकों और सिस्टम के लिए गंभीर चेतावनी भी माना जा रहा है. पुलिस के मुताबिक बच्चियों के पास दो मोबाइल फोन थे. एक फोन उन्होंने 7 से 8 महीने पहले बेच दिया था, जबकि दूसरा फोन करीब 15 दिन पहले बेचा गया था. पुलिस अभी तक ये फोन रिकवर नहीं कर पाई है, लेकिन अब पुराने फोन को भी रिकवर करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है.

बताया जा रहा है कि पहली मां का फोन फिलहाल बच्चियां इस्तेमाल कर रही थीं. इस फोन को पुलिस ने सीज कर लिया है और फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है. पुलिस अब डायरी, मोबाइल फोन, ऐप्स और डिजिटल गतिविधियों की गहन जांच कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बच्चियों पर किसी तरह का दबाव, चुनौती या टास्क तो नहीं था.

पुलिस बेचे गए मोबाइल फोन रिकवर करने में जुटी

पुलिस सूत्रों के अनुसार सुसाइड नोट में लिखा है कि मार खाने से अच्छा है कि सुसाइड कर लें. हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मारपीट के कोई निशान नहीं मिले हैं. रिपोर्ट में शॉक और हैमरेज की पुष्टि हुई है. गिरने से चोट और अत्यधिक खून बहने की बात सामने आई है. शरीर पर अन्य कोई चोट के निशान नहीं मिले हैं. इस मामले में पिता के बयान भी सामने आए हैं. उन्होंने बताया कि बच्चों ने अपना नाम बदल लिया था और उन्होंने कोरियन पर्सनैलिटी बना ली थी. पिता ने कहा कि बच्चियां पिछले तीन से चार साल से कोरियन ड्रामा और वीडियो देख रही थीं.

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पिता के मुताबिक बच्चियां कहती थीं कि उन्हें कोरिया जाना है. वो इंडियन नाम से गुस्सा हो जाती थीं और इंडिया के नाम पर खाना तक नहीं खाती थीं. उनका कहना था कि अगर कोरिया नहीं मिला तो वो मर जाएंगी. पिता ने बताया कि उसी दिन शाम को उन्होंने बच्चों से बात की थी. उन्होंने कहा था कि खाना खाकर सो जाओ. बच्चियों ने फिर कोरिया जाने की बात दोहराई. पिता ने पूछा कि वहां जाकर क्या करोगे.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मारपीट के निशान नहीं मिले

साथ ही उन्होंने बताया कि मोबाइल उन्होंने शाम करीब 7 बजे लिया था लेकिन बच्चियां 10 बजे फिर ले गईं. रात 12 बजे तक मोबाइल देखा गया. इसके बाद पत्नी फोन वापस लाई. फिर बच्चियां कंबल से निकलीं और मंदिर वाले कमरे में गईं. अंदर से लॉक कर लिया. उसके बाद नीचे तीनों के शव मिले.

पिता ने कहा कि उन्होंने एक दो बार गुस्सा किया था और बच्चों के मोबाइल पर कोरियन वीडियो, डांस और ड्रामे देखे थे. बच्चियां ट्यूशन जाती थीं. अगर फोन से उनकी डीपी हटाई जाती थी, जिस पर उनके बदले हुए नाम लिखे थे, तो वो खाना नहीं खाती थीं. उन्होंने बताया कि जमीन पर फैमिली की फोटो रखी हुई थी. कई बार समझाने की कोशिश की गई. टीचर ने भी कहा था कि पहले इनके माइंड को चेंज करो. पिता को कोरियन कल्चर के बारे में दो तीन महीने पहले ही पता चला था. पुलिस फिलहाल पूरे मामले की डिजिटल और मानसिक पहलुओं से जांच कर रही है.

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