वाराणसी में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गंगा नदी में बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि आज स्थिति यह हो गई है कि कोई मांस और मदिरा का सेवन कर रहा है तो कोई गंगा में क्रूज चलाकर होटल जैसी व्यवस्था बनाकर लोगों को रुकवा रहा है. यह सब अनाचार की श्रेणी में आता है और इससे गंगा की पवित्रता प्रभावित हो रही है.
शंकराचार्य ने अपने विद्यामठ आश्रम से मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि पहले नावों पर इस तरह की कोई व्यवस्था नहीं होती थी, लेकिन अब नावों में आड़ बनाकर सुविधाएं दी जा रही हैं. उन्होंने कहा कि जब गंगा को माई की जगह कमाई का साधन बना दिया गया, तो फिर कमाई के नजरिए से कई तरह की गतिविधियां शुरू हो जाती हैं. इसका सीधा असर यह होता है कि लोग पैसे देकर कुछ भी करने की सोच रखते हैं.
गंगा में क्रूज और होटल व्यवस्था पर शंकराचार्य की आपत्ति
उन्होंने कहा कि जब नाविक भी इसे कमाई का जरिया मानने लगते हैं तो वे भी इसी सोच के साथ काम करने लगते हैं कि जो करना है, पैसे देकर करो. यही सोच गंगा की पवित्रता के लिए नुकसानदायक है. मुस्लिम युवकों पर कार्रवाई के सवाल पर उन्होंने कहा कि वो इस विषय में नहीं पड़ना चाहते. उनका कहना है कि गंगा को मां माना जाता है और इसे कमाई का साधन नहीं बनाया जाना चाहिए.
सरकार और पंडित सवाल पर भी साधा निशाना
यूपी एसआई परीक्षा में पंडित से जुड़े सवाल पर उन्होंने मौजूदा सरकार पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि सरकार गौ और ब्राह्मण के खिलाफ काम कर रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग उनके बीच आकर उनका वेश धारण कर उन्हें नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं और हर हिंदू को ऐसे लोगों से सावधान रहने की जरूरत है.