योगी कैबिनेट में शामिल नए मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा हो गया है. भूपेंद्र चौधरी को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) विभाग और मनोज पांडे को खाद्य, रसद एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की जिम्मेदारी मिली है. दोनों कैबिनेट मंत्री हैं. अजीत पाल सिंह को खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रसाधन विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है. सोमेंद्र तोमर को राजनीतिक पेंशन, सैनिक कल्याण और प्रांतीय रक्षक दल विभाग की जिम्मेदारी दी गई है. दोनों अपने-अपने विभागों में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) होंगे.
कृष्णा पासवान को पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है. कैलाश सिंह राजपूत को ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत विभाग की जिम्मेदारी दी गई है. सुरेंद्र दिलेर को राजस्व और हंसराज विश्वकर्मा को लघु सूक्ष्म एवं मध्यम उद्योग की जिम्मेदारी सौंपी गई है. ये चारों अपने-अपने विभागों में राज्य मंत्री होंगे. उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार 10 मई को हुआ था. राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने जनभवन में नए मंत्रियों को शपथ दिलाई थी.
मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए 2027 साधने की कोशिश
योगी कैबिनेट में 6 नए मंत्रियों- भूपेंद्र चौधरी, मनोज पांडेय, सुरेंद्र दिलेर, कैलाश राजूपत, कृष्णा पासवान और हंसराज विश्वकर्मा को जगह मिली थी. वहीं, दो अन्य मंत्रियों सोमेंद्र तोमर और अजीत पाल सिंह का प्रमोशन किया गया. ये दोनों पहले राज्य मंत्री थे. भाजपा ने इस मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए 2027 की शुरुआत में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सामाजिक, जातिगत और क्षेत्रीय समीकरण साधने की कोशिश की है. खासतौर पर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) फार्मूले की काट के तौर पर इसे देखा जा रहा है.
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यह मंत्रिमंडल विस्तार किसी बड़े राजनीतिक प्रयोग की बजाय भाजपा की स्पष्ट ‘सोशल इंजीनियरिंग’ रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. योगी सरकार में जिन 6 नए मंत्रियों को शामिल किया गया है, उनमें से 5 दलित और ओबीसी समुदाय से हैं, जबकि एक मंत्री ब्राह्मण बिरादरी से. ब्राह्मण, जाट, दलित, पासी, वाल्मीकि, लोध और अन्य पिछड़ा वर्ग के विभिन्न समुदायों को प्रतिनिधित्व देकर भाजपा ने 2027 विधानसभा चुनाव से पहले अपने सामाजिक आधार को और मजबूत करने का संदेश देने की कोशिश की है.
मंत्रिमंडल में 22 सवर्ण, 25 OBC और 10 दलित मंत्री
मार्च 2022 में बनी योगी 2.0 सरकार में कुल 52 मंत्रियों ने शपथ ली थी. उस समय मंत्रिमंडल में 21 सवर्ण, 20 ओबीसी और 8 दलित नेताओं को जगह दी गई थी. इसके अलावा 1 आदिवासी, 1 मुस्लिम और 1 सिख चेहरे को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था. उत्तर प्रदेश विधानसभा की सदस्य संख्या के लिहाज से राज्य मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री समेत कुल 60 मंत्री हो सकते हैं. अब तीसरे और अंतिम मंत्रिमंडल विस्तार के बाद योगी सरकार के सभी 60 मंत्री पद भर चुके हैं. मौजूदा मंत्रिमंडल में 22 सवर्ण, 25 ओबीसी और 10 दलित मंत्री हैं. इसके अलावा 1 आदिवासी, 1 मुस्लिम और 1 सिख मंत्री भी शामिल हैं.
नए मंत्रियों के जरिए भाजपा ने कैसे साधे समीकरण?
रायबरेली जिले के ऊंचाहार से सपा के बागी विधायक मनोज पांडेय को कैबिनेट मंत्री बनाकर बीजेपी ने एक बार फिर ब्राह्मण संतुलन साधने की कोशिश की है. मनोज पांडेय के बागी होने के बाद सपा ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था और वर्तमान में वह निर्दलीय विधायक के रूप में विधानसभा के सदस्य हैं. इसके अलावा बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी की कैबिनेट में वापसी पश्चिमी यूपी में जाट प्रतिनिधित्व को मजबूत करने की कोशिश मानी जा रही है. वह वर्तमान में एमएलसी हैं.
वाल्मीकि समुदाय से आने वाले सुरेंद्र दिलेर को भाजपा द्वारा दलित मतदाताओं के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, जबकि कैलाश राजपूत को मंत्री बनाकर पार्टी ने लोध मतदाताओं के बीच अपने समर्थन को मजबूत करने की कोशिश की है. वाराणसी के एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा को शामिल कर बीजेपी ने पूर्वांचल में गैर-यादव ओबीसी वोट बैंक को साधने का स्पष्ट संदेश दिया है. वहीं, फतेहपुर की खागा सीट से विधायक कृष्णा पासवान के जरिए पार्टी ने गैर-जाटव दलित वोट बैंक को साधने की कोशिश की है.