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'काली पट्टी बांध कर मनाएं ईद', आजम खान की अपील पर भड़के मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी

ईरान-इजरायल मुद्दे पर विरोध के बीच आजम खान के काली पट्टी बांधकर ईद मनाने के बयान पर मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने कड़ी आपत्ति जताई है. उन्होंने कहा कि ईद खुशी का दिन है, इसे ग़म में न बदलें और कोई प्रदर्शन न करें. मुसलमानों से सिर्फ दुआ करने की अपील की गई. साथ ही ज्यादा भीड़ होने पर मस्जिदों में कई बार नमाज़ कराने की सलाह दी गई, ताकि सड़कों पर नमाज़ और किसी विवाद से बचा जा सके.

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मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि ईद के दिन कोई भी काले कपड़े ना पहने. Photo ITG
मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि ईद के दिन कोई भी काले कपड़े ना पहने. Photo ITG

ईरान-इजरायल युद्ध को लेकर तमाम मुस्लिम संगठन किसी न किसी तरीके से विरोध जता रहे हैं. आजम खान के काली पट्टी बांध कर ईद मानने वाले बयान पर बरेली के मौलाना भड़क गए. ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने बयान जारी करके कहा है कि ईद के दिन कोई भी काले कपड़े ना पहने. कोई प्रदर्शन न करे, बस ईरान की कामयाबी के लिए दुआ करे. और सड़को पर नमाज न पढ़े, बल्कि नमाज़ी ज्यादा हो तो मस्जिद में एक जमात के बजाए दो य तीन जमात कर लें.

उन्होंने कहा कि जेल में बंद सपा नेता आजम खान ने मुसलमानों से अपील की है कि ईद के दिन काली पट्टी बांधें और ईरान के समर्थन में प्रदर्शन करें. इस पर मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ईद खुशी का दिन है, ग़म मनाने का नहीं. रमज़ान शरीफ़ का पूरा महीना मुसलमान इबादत में बिताते हैं, उसके बाद ईद का दिन खुशी मनाने और एक-दूसरे को मुबारकबाद देने का होता है. ऐसे में इस दिन को ग़म में बदलना समझदारी नहीं, बल्कि गलत फैसला होगा. उन्होंने देश के मुसलमानों से अपील की कि किसी भी राजनीतिक व्यक्ति के बहकावे में न आएं और ईरान की कामयाबी के लिए दुआ करें.

क्या बोले थे आजम खान?
मौलाना ने कहा कि समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान, जो इस समय जेल में बंद हैं, उनसे मिलने मुरादाबाद निवासी सपा नेता यूसुफ मलिक जेल गए थे. वहां आजम खान ने उनसे कहा कि बाहर जाकर मीडिया के जरिए मुसलमानों तक उनका संदेश पहुंचाया जाए कि ईरान-अमेरिका जंग के मद्देनजर मुसलमान काले कपड़े पहनें, हाथों में काली पट्टी बांधें और नमाज़ के बाद प्रदर्शन करें. इस पर मौलाना ने कहा कि ईद जैसे पवित्र और खुशी के दिन को इबादत के लिए सुरक्षित रखें और कोई भी ऐसा काम न करें जिससे इस दिन की बदनामी हो या किसी तरह का विवाद खड़ा हो.

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उन्होंने आगे कहा कि ईद के दिन बूढ़े, बच्चे और जवान सभी नमाज़ पढ़ने के लिए बड़ी संख्या में निकलते हैं. ईदगाहों में जगह ज्यादा होने के कारण एक बार में नमाज़ हो जाती है, लेकिन शहरों की छोटी मस्जिदों में भीड़ ज्यादा होने से सभी लोग एक साथ नमाज़ नहीं पढ़ पाते. ऐसी स्थिति में कई बार सड़कों और गलियों में नमाज़ पढ़नी पड़ती है. इस समस्या के समाधान के लिए शरीयत में व्यवस्था है कि इमाम बदलकर एक से अधिक बार जमात कराई जा सकती है. अगर भीड़ ज्यादा हो तो इमामों को चाहिए कि दूसरी, तीसरी या जरूरत के अनुसार कई जमातें कराएं, ताकि सभी लोग आसानी से नमाज़ अदा कर सकें और किसी तरह का विवाद न हो.

अंत में मौलाना ने देशवासियों को ईद की मुबारकबाद दी और कहा कि नमाज़ का अच्छे से इंतजाम करें, देश के मौजूदा हालात को देखते हुए टकराव और विवाद से बचें तथा सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें.

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