scorecardresearch
 

बीएचयू में 33 पेड़ काटने पर 2.65 करोड़ रुपये का पर्यावरणीय जुर्माना, NGT ने वसूली के लिए यूपीपीसीबी को दिए तीन महीने

वाराणसी स्थित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में 33 पेड़ों की अवैध कटाई के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को 2.65 करोड़ रुपये से अधिक की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति वसूलने की प्रक्रिया तीन महीने में पूरी करने का निर्देश दिया है. एनजीटी ने कहा कि पहले दिए गए आदेश का समय पर पालन नहीं किया गया.

Advertisement
X
बीएचयू ने 978 पौधे लगाए, निरीक्षण में 859 स्वस्थ मिले. (File Photo: ITG)
बीएचयू ने 978 पौधे लगाए, निरीक्षण में 859 स्वस्थ मिले. (File Photo: ITG)

वाराणसी स्थित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में 33 पेड़ों की कथित अवैध कटाई के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को बड़ा निर्देश दिया है. एनजीटी ने यूपीपीसीबी को तीन महीने के अंदर  विश्वविद्यालय से 2,65,06,877.08 रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति वसूलने की प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहा है. यह राशि विश्वविद्यालय परिसर में पेड़ों की अवैध कटाई के आकलन के आधार पर तय की गई है.

राष्ट्रीय हरित अधिकरण की अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने 7 जुलाई को यह आदेश पारित किया. यह आदेश गुरुवार को सार्वजनिक किया गया. पीठ ने कहा कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पहले ही पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की राशि का आकलन कर चुका है और इसे लगाने की प्रक्रिया चल रही है.

एनजीटी ने अपने आदेश में कहा कि अगस्त 2025 में भी यूपीपीसीबी को तीन महीने के भीतर पूरी कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था. हालांकि बोर्ड निर्धारित समय सीमा के भीतर इस आदेश का पालन नहीं कर सका. ऐसे में परिस्थितियों को देखते हुए अधिकरण ने एक बार फिर तीन महीने का अतिरिक्त समय दिया है और इस अवधि में पूरी प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है.

अगस्त 2025 में भी एनजीटी ने दिए थे कार्रवाई के निर्देश

Advertisement

अधिकरण ने अपने आदेश में कहा कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पहले दिए गए निर्देश के अनुसार तीन महीने में कार्रवाई पूरी नहीं की. इसलिए अब विस्तारित समय सीमा के भीतर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति से जुड़ी सभी कार्यवाही पूरी की जाए. यह पूरा मामला अधिवक्ता सौरभ तिवारी की तरफ से दायर याचिका से शुरू हुआ था. याचिका में आरोप लगाया गया था कि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के करीब 1300 एकड़ में फैले परिसर के भीतर बड़ी संख्या में पेड़ों की अवैध कटाई की गई है. इस शिकायत पर सुनवाई करते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने एक संयुक्त जांच समिति का गठन किया था.

संयुक्त समिति ने अपनी जांच में पाया कि विश्वविद्यालय परिसर में कुल 33 पेड़ अवैध रूप से काटे गए थे. इनमें सात चंदन के पेड़ शामिल थे, जबकि बाकी 26 पेड़ अन्य प्रजातियों के थे. समिति की रिपोर्ट के आधार पर एनजीटी ने अगस्त 2025 में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का आकलन करने और तीन महीने के भीतर वसूली की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया था.

निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी जब कार्रवाई पूरी नहीं हुई तो याचिकाकर्ता सौरभ तिवारी ने अधिकरण में एक निष्पादन आवेदन दायर किया. इसमें उन्होंने पहले दिए गए आदेश को लागू कराने की मांग की. याचिकाकर्ता के अनुसार उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने उन्हें बताया था कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ और सर्वोच्च न्यायालय के कुछ आदेशों के कारण पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की वसूली शुरू नहीं की जा सकी थी. इसी वजह से प्रक्रिया में देरी हुई.

Advertisement

हालिया सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से पेश वकील ने अधिकरण को बताया कि अब पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की राशि तय कर दी गई है और उसकी वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. इसके बाद अधिकरण ने बोर्ड को विस्तारित अवधि के भीतर पूरी कार्रवाई पूरी करने का निर्देश दिया. सुनवाई के दौरान अधिकरण ने प्रभागीय वन अधिकारी की ओर से पेश रिपोर्ट का भी संज्ञान लिया. रिपोर्ट में बताया गया कि विश्वविद्यालय ने क्षतिपूरक पौधरोपण के तहत वर्ष 2025 में कुल 978 पौधे लगाए हैं. निरीक्षण के दौरान इनमें से 859 पौधे जीवित और स्वस्थ पाए गए.

 पौधरोपण के साथ क्षतिपूर्ति की वसूली भी पूरी करनी होगी

अधिकरण ने अपने आदेश में कहा कि क्षतिपूरक पौधरोपण की दिशा में हुई प्रगति को रिकॉर्ड पर लिया जाता है. हालांकि इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की वसूली की प्रक्रिया अलग है और उसे भी निर्धारित समय के भीतर पूरा किया जाना जरूरी है. अब उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को तीन महीने के भीतर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति से संबंधित सभी कानूनी प्रक्रिया पूरी कर अधिकरण के आदेश का पालन करना होगा. इस मामले पर आगे की कार्रवाई पर भी सभी की नजर रहेगी.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement