जहां आज रिश्ते जमीन के टुकड़ों पर तौले जाते हैं, वहीं बागपत में एक शख्स ने अपने चार माह के बेटे के वजन के बराबर सिक्के तौलकर मंदिर में दान कर दिए. इसके पीछे की वजह ने हर किसी को भावुक कर दिया. इस शख्स ने मन्नत मांगी थी कि उसका मर चुका भाई वापस आ जाए तो वो वजन बराबर सिक्के दान करेगा. और अब घर जन्मे इस बच्चे में उसे अपना भाई नज़र आया और उसका नाम भी अपने भाई में नाम पर रख दिया.
दरअसल, बागपत के छपरौली कस्बे में रहने वाले अक्षय की यह कहानी पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है. फल का ठेला लगाने वाले अक्षय के छोटे भाई रोहित की नवंबर 2024 में बीमारी के चलते मौत हो गई थी. भाई के जाने का गम इतना गहरा था कि अक्षय ने भगवान से मन्नत मांगी कि अगर उसका भाई किसी रूप में वापस मिला, तो वह मंदिर में उसके वजन के बराबर सिक्कों का दान करेगा.
कुदरत ने ऐसा संयोग रचा कि भाई रोहित की मौत के ठीक एक साल बाद 1 नवंबर 2025 को अक्षय की पत्नी ने एक बेटे को जन्म दिया और हैरानी की बात यह कि बच्चे का जन्म उसी तारीख को हुआ, जिस तारीख को रोहित की मौत हुई थी. अक्षय ने इसे सिर्फ इत्तेफाक नहीं, बल्कि भगवान का संकेत माना. उसने अपने बेटे का नाम भी रोहित ही रखा. मन्नत पूरी होने पर अक्षय ने अपने करीब चार माह के बेटे को तराजू पर बैठाया और सिक्कों से तौल दिया. तौल में आए करीब 9 हजार 200 रुपये के सिक्के उसने मंदिर में दान कर दिए.
आज तक संवाददाता से फोन पर बातचीत में अक्षय ने कहा, 'मेरे बेटे के रूप में मेरा भाई वापस आ गया है. इससे बड़ी खुशी मेरे लिए कुछ नहीं हो सकती.' लेकिन एक बात साफ है कि इंसानियत आस्था और भाईचारे की यह कहानी आज उस समाज के लिए नज़ीर बन गई है, जहां रिश्ते अक्सर स्वार्थ की भेंट चढ़ जाते हैं. फिलहाल यह अनोखा मामला पूरे क्षेत्र में भावनाओं और चर्चा का केंद्र बना हुआ है.