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'कुछ लोग जाग कर भी रहते हैं मदहोश...', CM योगी के 12 बजे उठने वाले बयान पर अखिलेश का पलटवार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बबुआ 12 बजे सोकर उठता है वाले बयान पर अखिलेश यादव ने पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि . लेकिन होश में नहीं आते और आंखें दिन भर बंद रहती हैं. ऐसे लोग जाग कर भी मदहोश रहते हैं.

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अखिलेश यादव और योगी आदित्यनाथ. (Photo: ITG)
अखिलेश यादव और योगी आदित्यनाथ. (Photo: ITG)

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर हमला बोला था. उन्होंने कहा था कि 12 बजे सोकर उठने वाले बबुआ को कहां फुर्सत थी कि गरीबों के बारे में सोच सकें. जिस प्रदेश का मुखिया 12 बजे सोकर उठता होगा, उसके लिए कोई सूर्योदय की बात करेगा तो वो उसे सपना मानेगा. वहीं अब सीएम योगी के इस तंज पर अखिलेश यादव ने पलटवार किया है. 

कुछ लोग उठ तो जाते हैं, लेकिन आंखें दिन भर बंद रहती हैं

अखिलेश यादव ने कहा कि कुछ लोग नींद से तो उठ जाते हैं. लेकिन होश में नहीं आते और आंखें दिन भर बंद रहती हैं. ऐसे लोग जाग कर भी मदहोश रहते हैं. अखिलेश यादव यहीं नहीं रुके, उन्होंने माघ मेले में अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर भी बयान दिया. उन्होंने कहा कि सुना है कि एक कोई सतुआ बाबा और बथुआ बाबा हैं. वैसे ये सीजन तो बथुआ का है. 

यह भी पढ़ें: 'किसी संत की सरकार में ऐसा होता है क्या... सतुआ बाबा को हमने भी देखा', शंकराचार्य विवाद पर बरसे अखिलेश यादव

इस दौरान अखिलेश यादव ने कार्यकर्ताओं से सावधान रहने की भी अपील की है. उन्होंने कहा कि जो लोग विज्ञापन देकर धोखा दे रहे हैं. सोचिए देश कहां पहुंच गया और हमें कहा रहना चाहिए था. इसलिए संविधान के तहत देश चले और संविधान के तहत फैसले हों. आज तो इस सरकार ने शंकराचार्य के सामने भी संकट पैदा कर दिया.   

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वहीं इससे पहले भी अखिलेश यादव ने अपने एक्स पर एक पोस्ट किया था. जिसमें उन्होंने लिखा था कि मुख्यमंत्री मंच पर अपने झूठ का प्रपंच न फैलाएं और शिक्षा में सुधार का असत्य राग न अलापें.

CM योगी ने अखिलेश यादव को लेकर दिया था ये बयान

अखिलेश यादव को लेकर सीएम योगी ने एक कार्यक्रम में कहा था कि 12 बजे सोकर उठने वाले बबुआ को कहां फुर्सत थी कि गरीबों के बारे में सोच सके. जिस प्रदेश का मुखिया 12 बजे सोकर उठता होगा, उसके लिए कोई सूर्योदय की बात करेगा तो वो उसे सपना मानेगा. 

क्योंकि उसे देश दुनिया की कोई जानकारी नहीं होगी और वह लेना भी नहीं चाहेगा. उन्हें पता था ही नहीं कि बेसिक शिक्षा उनके समय में बंजर हो चुकी थी, माध्यमिक शिक्षा नकल का अड्डा बन चुकी थी. चंद माफिया नौजवान के भरोसे के साथ खिलवाड़ करते थे.

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