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ये कैसी ममता? आगरा में नवजात को झाड़ियों में फेंक गए अपने, बेगानों ने सीने से लगाया; अस्पताल में इलाज जारी

आगरा के शमसाबाद में झाड़ियों में लावारिस मिला नवजात शिशु मानवता की मिसाल बन गया. ग्रामीणों और दंपति नीतू-मान सिंह ने शोर सुनकर उसे बचाया। 1.2 किलो वजन का यह प्रीमैच्योर बच्चा फिलहाल नाजुक हालत में मेडिकल कॉलेज में भर्ती है. पुलिस मासूम को लावारिस छोड़ने वालों की तलाश कर रही है.

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झाड़ियों में मिले नवजात का अस्पताल में इलाज जारी (Photo- ITG)
झाड़ियों में मिले नवजात का अस्पताल में इलाज जारी (Photo- ITG)

उत्तर प्रदेश के आगरा से एक झकझोर देने वाली घटना सामने आई है. थाना शमसाबाद क्षेत्र के चितौरा गांव में एक नवजात शिशु झाड़ियों में लावारिस हालत में मिला. वह रो रहा था, असहाय था और जिंदगी के लिए जूझ रहा था. हालांकि, इस दर्दनाक घटना के बीच कुछ लोगों ने मानवता की मिसाल भी पेश की.

दरअसल, मंगलवार देर शाम लाखन सिंह के खेत के पास काम कर रहे मजदूरों को बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी. आवाज सुनते ही वे तुरंत उस दिशा में पहुंचे. वहां झाड़ियों में एक नवजात पड़ा मिला. धीरे-धीरे आसपास के ग्रामीण भी मौके पर जुट गए.

इसी दौरान गांव के मान सिंह अपनी पत्नी नीतू देवी के साथ वहां पहुंचे. दोनों ने बच्चे को सुरक्षित उठाया और तुरंत पुलिस व स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी.

सूचना मिलते ही पुलिस और डॉक्टरों की टीम मौके पर पहुंची. नवजात को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) शमसाबाद ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार शुरू किया.

चिकित्सकों के अनुसार बच्चा प्रीमैच्योर है, उसका वजन करीब 1 किलो 200 ग्राम है और उसकी स्थिति नाजुक बनी हुई है. बेहतर इलाज के लिए उसे सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है, जहां उसका उपचार जारी है.

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कार्यवाहक मुख्य चिकित्सा अधिकारी नंदन सिंह ने बताया कि सूचना मिलते ही मेडिकल टीम मौके पर पहुंची और बच्चे को तत्काल इलाज मुहैया कराया गया. फिलहाल, पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आखिर किसने इस मासूम को इस तरह बेसहारा छोड़ दिया.

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