उत्तर प्रदेश के शिकोहाबाद में 18 महीने के मासूम आरव की हत्या के मामले में आरोपी जितेंद्र पाठक उर्फ विराज के परिवार की कई अहम बातें सामने आई हैं. बदायूं जिले के शेखूपुर कस्बे के रहने वाले विराज के तीन भाइयों सोनू, राजीव और मुनीश ने उसके अतीत और व्यवहार को लेकर कई खुलासे किए हैं. परिवार के अनुसार करीब 28 वर्षीय विराज ने बदायूं शहर के इस्लामिया इंटर कॉलेज से हाईस्कूल तक पढ़ाई की थी.
अप्रैल 2010 में पिता की अचानक मौत के बाद परिवार की आर्थिक और सामाजिक स्थिति प्रभावित हुई, जिसके चलते उसकी पढ़ाई बीच में ही छूट गई. इसके बाद उसने मारुति वैन चलाकर टैक्सी का काम किया, लेकिन उसमें उसका मन नहीं लगा. बाद में उसने घर के पास एक छोटी परचून की दुकान शुरू कर दी.
भाई सोनू पाठक के मुताबिक करीब दो साल पहले परिवार ने अपनी पुश्तैनी जमीन बेचकर विराज के लिए एक बड़ा प्रोविजनल स्टोर खुलवाया था. दुकान का कारोबार भी अच्छा चल रहा था. परिवार और आसपास के लोगों का कहना है कि विराज स्वभाव से शांत था और किसी से लड़ाई-झगड़ा नहीं करता था. हालांकि पिछले कुछ महीनों से उसके व्यवहार में बदलाव देखा जा रहा था. परिवार के लोगों के अनुसार वह दुकान पर बैठकर घंटों किसी से फोन पर बात करता रहता था. कई बार वह दुकान बंद करके एक-दो दिन के लिए बाहर भी चला जाता था. उस समय घरवालों को इसकी वजह नहीं पता थी.
भाइयों ने बताया कि शिकोहाबाद में मासूम आरव की हत्या के तुरंत बाद विराज ने अपने बड़े भाई राजीव को फोन किया था. फोन पर वह रो रहा था. उसने सिर्फ इतना कहा था, भैया, मेरे साथ बहुत बड़ा धोखा हो गया है. बड़े भाई राजीव ने उसके स्वभाव में आए बदलाव के पीछे एक पुरानी घटना का भी जिक्र किया. उनके अनुसार वर्ष 2020-21 में किसी विवाद के दौरान विराज के सिर पर लोहे की रॉड से हमला हुआ था. इस हमले में उसे गंभीर चोट लगी थी और लंबे समय तक बरेली के वेदांता अस्पताल में उसका इलाज चला था.
2020 में सिर पर हुआ था जानलेवा हमला
परिवार का कहना है कि इस घटना के बाद वह कुछ हद तक चिड़चिड़ा और गुस्सैल हो गया था. हालांकि उसका गुस्सा घर तक ही सीमित रहता था. भाइयों का दावा है कि उसने कभी किसी बच्चे या बाहरी व्यक्ति के साथ अभद्र व्यवहार नहीं किया था. इसके बावजूद परिवार इस जघन्य अपराध से पूरी तरह टूट चुका है.
चिड़चिड़ा और गुस्सैल हो गया था आरोपी
भाइयों ने साफ कहा कि विराज ने जो किया, वह बेहद गलत और खौफनाक है. उनका कहना है कि एक मासूम बच्चे के साथ हुई इस हैवानियत को किसी भी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता और इसकी कोई माफी नहीं हो सकती. बदायूं के शेखूपुर से सामने आई परिवार की यह कहानी एक ऐसे व्यक्ति की तस्वीर पेश करती है, जिसे लोग सामान्य और शांत स्वभाव का मानते थे, लेकिन जिसकी सनक ने एक मासूम की जान ले ली.