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30 लाख का नुकसान, घर में दो पत्नियां और साली भी... ट्रिपल सुसाइड में अब जांच का नया एंगल

गाजियाबाद ट्रिपल सुसाइड केस में नए खुलासों से मामला और पेचीदा हो गया है. शेयर ट्रेडिंग में पिता को 20–30 लाख रुपये का नुकसान हुआ था, वहीं बच्चियों ने अपनी डिजिटल पहचान बदलकर कोरियन पर्सनैलिटी बना ली थी. उस रात घर में मौसी की मौजूदगी, दरवाजा अंदर से बंद होना, मोबाइल छीने जाने का तनाव और सुसाइड नोट में कोरिया को लेकर जुनून जांच को नई दिशा दे रहे हैं.

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 गाजियाबाद सुसाइड केस में कंफ्यूज कर रही पिता की बातें (Photo: ITG)
गाजियाबाद सुसाइड केस में कंफ्यूज कर रही पिता की बातें (Photo: ITG)

शेयर ट्रेडिंग में करीब 20 से 30 लाख रुपये का नुकसान, घर में लगातार बढ़ता तनाव, डिजिटल दुनिया में खोती जाती तीन नाबालिग बच्चियों की पहचान और उस रात फ्लैट में आई साली. गाजियाबाद के ट्रिपल सुसाइड केस में अब हर नया तथ्य कहानी को सुलझाने के बजाय और उलझा रहा है. कल तक यह मामला सिर्फ ऑनलाइन कोरियन गेम और डिजिटल एडिक्शन से जुड़ा दिख रहा था, लेकिन अब पिता के लगातार बदले हुए बयानों, पुलिस सूत्रों की जानकारी ने इस केस की थ्योरी ही बदल दी है.

अब सवाल यह नहीं रह गया है कि बच्चियों ने जान क्यों दी, बल्कि यह भी कि उस रात घर के भीतर क्या-क्या हुआ, किन हालात ने तीनों को एक साथ इस फैसले तक पहुंचाया और क्या यह सब अचानक हुआ या धीरे-धीरे तैयार होती गई एक मानसिक स्थिति का नतीजा था.

20-30 लाख का नुकसान

तीनों बहनों के पिता चेतन कुमार शेयर ट्रेडिंग का काम करते हैं. उन्होंने पुलिस को बताया है कि पिछले कुछ समय में उन्हें 20 से 30 लाख रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ था. हालांकि उन्होंने साफ कहा कि यह नुकसान इतना बड़ा नहीं था कि उसकी वजह से बच्चियां आत्महत्या जैसा कदम उठाएं. फिर भी पुलिस मान रही है कि आर्थिक दबाव, सीमित संसाधन और घर का माहौल इन सबका मनोवैज्ञानिक असर बच्चियों पर पड़ा हो सकता है. 

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उस रात घर में थी साली, नाम भी आया सामने

जांच में सामने आया एक अहम और संवेदनशील तथ्य यह है कि घटना वाली रात फ्लैट में दोनों पत्नियों की सबसे छोटी बहन भी मौजूद थी. हालांकि पुलिस फिलहाल इसे संदेह के तौर पर पेश नहीं कर रही, लेकिन यह साफ है कि उस रात घर में सामान्य से एक सदस्य ज्यादा था. जांच अधिकारी यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या उस रात कोई बातचीत, माहौल या घटना ऐसी थी, जिसने बच्चियों की मानसिक स्थिति को और अस्थिर कर दिया.

दरवाजा नहीं खोला, अंदर से हुई आखिरी बातचीत

पिता के बयान के मुताबिक, बच्चियां मंदिर वाले कमरे में चली गई थीं और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया था. यह तथ्य जांच का अहम हिस्सा बन गया है. सवाल उठ रहे हैं कि क्या उस समय बच्चियां पहले से किसी निर्णय पर पहुंच चुकी थीं, या यह एक भावनात्मक टकराव का आखिरी दौर था.

नाम बदले, नई पहचान बनाई

पुलिस के मुताबिक यह अब साफ हो चुका है कि तीनों बहनों ने अपने नाम बदल लिए थे. उन्होंने कोरियन नाम अपनाए और उसी पहचान के साथ सोशल मीडिया पर सक्रिय थीं. अगर मोबाइल से उनकी डीपी हटाई जाती, जिसमें उनके बदले हुए नाम लिखे होते थे, तो वे खाना तक नहीं खाती थीं. यह सिर्फ पसंद नहीं, बल्कि पहचान से जुड़ा गहरा भावनात्मक जुड़ाव था.

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कोरिया जाना था, इंडिया से नाराज़गी

पिता ने बताया कि बच्चियां बार-बार कहती थीं हमें कोरिया जाना है, वहीं पढ़ेंगे. इतना ही नहीं, वे इंडियन शब्द सुनकर नाराज हो जाती थीं. कुछ मौकों पर भारत के नाम पर खाना खाने से भी इनकार कर देती थीं. वे साफ कहती थीं कि अगर कोरिया नहीं मिला तो वे मर जाएंगी. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, बच्चियों ने सोशल मीडिया पर एक अकाउंट बनाया था, जहां उनके फॉलोअर्स तेजी से बढ़ रहे थे. करीब 10 दिन पहले पिता को इसकी जानकारी मिली. उन्होंने अकाउंट डिलीट कर दिया और मोबाइल छीन लिया. इसके बाद बच्चियां गहरे सदमे में चली गईं क्योंकि वे कोरियन ड्रामा और वीडियो नहीं देख पा रही थीं.

मोबाइल छीना, लौटाया गया, फिर वही रात

बताया जा रहा है कि घटना वाले दिन शाम करीब 7 बजे पिता ने मोबाइल लिया. रात 10 बजे बच्चियों ने फिर फोन ले लिया. रात 12 बजे तक मोबाइल देखा गया, फिर पत्नी ने फोन वापस ले लिया. इसके बाद बच्चियां कंबल से निकलकर मंदिर वाले कमरे में गईं, अंदर से लॉक किया और फिर वही हुआ जिसने सभी को हिला दिया.

सुसाइड नोट और डायरी के शब्द

सुसाइड नोट और डायरी में लिखी पंक्तियां जांच को और जटिल बना रही हैं We are love Korean… love love love… sorry.  इस डायरी में जो लिखा है, सब सच है… Read now. I am really sorry… sorry papa. 
आगे लिखा है कोरियन हमारी जान थी. जितना उन्हें चाहते थे, उतना घरवालों को भी नहीं. इंडियन आदमी से शादी कभी नहीं.

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दो बहनें साथ, तीसरी अलग

जांच में यह भी सामने आया है कि दो बहनों ने एक-दूसरे का हाथ पकड़कर साथ छलांग लगाई, जबकि तीसरी बहन ने पूजा कक्ष की खिड़की से अलग छलांग लगाई. यह पैटर्न किसी अचानक लिए गए फैसले से ज्यादा पहले से बनी मानसिक तैयारी की ओर इशारा करता है.

दो साल से स्कूल से दूरी

तीनों बहनें करीब दो वर्षों से स्कूल नहीं जा रही थीं. टीचर्स ने पिता से कहा था कि पहले बच्चियों का माइंडसेट बदला जाए. धीरे-धीरे उनकी दुनिया असल जिंदगी से कटकर मोबाइल और डिजिटल कंटेंट तक सिमट गई. पुलिस को कोरियन टास्क-बेस्ड गेम के संकेत मिले हैं, लेकिन अधिकारी मानते हैं कि मामला सिर्फ गेम तक सीमित नहीं है. एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक  जब बच्चे अपनी असली पहचान छोड़कर डिजिटल पहचान में जीने लगते हैं, तो फैसले भी उसी दुनिया के हिसाब से लेने लगते हैं. 

जांच अब मल्टी-डायमेंशनल

उत्तर प्रदेश पुलिस इस केस को अब सिर्फ आत्महत्या नहीं मान रही. मोबाइल डेटा, चैट, सोशल मीडिया, डायरी और पारिवारिक बातचीत हर पहलू की जांच हो रही है. डीजीपी राजीव कृष्ण ने कहा है कि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले हर परत को समझा जाएगा.

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