क्या आपने कभी सोचा है कि खाना खाते या पानी पीते समय किसी व्यक्ति का दिल अचानक रुक सकता है? सुनने में यह किसी फिल्म की कहानी जैसा लगता है, लेकिन ब्रिटेन की एक महिला के साथ ऐसा ही हो रहा था. हालत इतनी गंभीर हो गई थी कि उसे हर बार खाना खाते समय डर लगता था कि कहीं उसका दिल रुककर दोबारा चालू ही न हो.
मिरर की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन के हर्टफोर्डशायर के सेंट एल्बंस में रहने वाली 50 साल की सारा हॉल एक बेहद दुर्लभ बीमारी से जूझ रही थीं. इस बीमारी की वजह से खाना निगलते ही उनका दिल बहुत धीमा पड़ जाता था और कई बार कुछ समय के लिए रुक भी जाता था.
एक दिन में 12 बार रुका दिल
सारा की हालत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक बार सिर्फ 24 घंटे के भीतर उनका दिल 12 बार रुक गया था. खाना खाने या पानी पीने के दौरान उन्हें चक्कर आने लगते थे. आंखों के आगे अंधेरा छा जाता था और कई बार वे बेहोश होकर गिर पड़ती थीं.
धीरे-धीरे हालात इतने खराब हो गए कि उन्होंने सार्वजनिक जगहों पर खाना खाना लगभग बंद कर दिया. उन्हें हर वक्त यह डर सताता था कि कहीं खाना खाते समय उनका दिल रुक न जाए.
परिवार के लिए भी बन गया था डर का कारण
सारा दो बच्चों की मां हैं. उन्होंने बताया कि परिवार के साथ खाना खाना भी तनाव भरा अनुभव बन गया था. उनके पति को हर समय उनके पास बैठना पड़ता था ताकि अगर वे बेहोश हो जाएं तो तुरंत मदद कर सकें. वहीं बच्चे भी यह सोचकर परेशान रहते थे कि मां बिना बेहोश हुए खाना खत्म कर पाएंगी या नहीं.
सारा ने बताया कि बीमारी की वजह से उन्हें ड्राइविंग छोड़नी पड़ी और कई महीनों तक काम से भी छुट्टी लेनी पड़ी. सारा को पहली बार 39 साल की उम्र में बेहोशी और उल्टी जैसी परेशानी होने लगी थी. बाद में खाना खाते समय चक्कर आने लगे और समय के साथ लक्षण गंभीर होते गए.
उन्होंने सोचा कि शायद यह पेरिमेनोपॉज, लो ब्लड शुगर या शरीर में पानी की कमी की वजह से हो रहा है. लेकिन जब वे अपने बच्चों के सामने पारिवारिक लंच के दौरान बेहोश हो गईं, तब उन्हें लगा कि अब डॉक्टर से जांच करानी जरूरी है.
आखिर क्या निकली बीमारी?
विशेषज्ञ डॉक्टरों ने जांच के बाद पाया कि सारा को 'कार्डियोइनहिबिटरी स्वॉलो सिंकोप' नाम की बेहद दुर्लभ बीमारी है. दुनियाभर में अब तक इसके 150 से भी कम मामले दर्ज किए गए हैं.
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इस बीमारी में खाना या पानी निगलने पर शरीर की वैगस नर्व जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया देने लगती है. इसके कारण दिल की धड़कन अचानक बहुत धीमी हो जाती है या कुछ समय के लिए रुक भी सकती है. सारा के मामले में दिल एक मिनट तक के लिए रुक जाता था.
जब सामान्य इलाज से फायदा नहीं हुआ तो डॉक्टरों ने सारा को एक विशेष मेडिकल ट्रायल में शामिल किया. इसमें 'कार्डियोन्यूरल एब्लेशन' नाम की आधुनिक प्रक्रिया का इस्तेमाल किया गया. इस तकनीक में डॉक्टर शरीर की उन नसों को निशाना बनाते हैं जो दिल की धड़कन को असामान्य रूप से धीमा कर रही होती हैं.
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इसके लिए जांघ के रास्ते कैथेटर दिल तक पहुंचाया जाता है. फिर नसों की गतिविधि का नक्शा तैयार कर समस्या पैदा करने वाली कोशिकाओं को गर्मी की मदद से निष्क्रिय किया जाता है.कुछ साल पहले तक ऐसी गंभीर स्थिति वाले मरीजों को अक्सर पेसमेकर लगवाना पड़ता था.