समय के साथ अब घर बनाने का स्टाइल भी बदल गया है. अब बाजार में कई तरह की ईंट आने लगी है और लोग अलग-अलग तरीके से घर बना रहे हैं. अब सीमेंट ब्रिक भी काफी चर्चा में है. लोग जल्दी और मजबूत घर के लिए इनका इस्तेमाल कर रहे हैं. इसी बीच, सोशल मीडिया पर इन दिनों ऐसी ईंटों की चर्चा होती है, जो अंदर से खोखली होती है और ये सिर्फ एक ब्लॉक की तरह ही होती है. वैसे तो विदेश में इन ईंटों का इस्तेमाल ज्यादा होता था, लेकिन अब भारत में भी लोग इनका इस्तेमाल कर रहे हैं और इन्हें ज्यादा मजबूत माना जाता है.
अब सवाल है कि जो खोखली ईंट ट्रेंड में हैं, वो खोखली होने के बाद भी मजबूत क्यों मानी जाती है. तो समझते हैं इसका विज्ञान और साथ में ये भी जानते हैं कि इसकी रेट क्या है और ये किफायती है या नहीं.
कैसी है ये ईंट?
जिन खोखली ईंट की बात की जा रही है, उसकी फोटो आप नीचे देख सकते हैं, जिनसे आप समझ जाएंगे कि आखिर ये ईंट होती कैसी है. इसमें सिर्फ बाउंड्री होती है और ये बीच से खाली होती है और ये इंटरलॉक मैथड पर काम करती है. इन ईंट को इंटरलॉकिंग होलो कंक्रीट ब्लॉक या ग्रूटेड सेलुलर कंक्रीट ब्लॉक्स कहा जाता है. इन ब्लॉक्स के बीच में बड़े-बड़े छेद होते हैं. ये कई तरह की आती हैं, जिनमें कुछ ईंट में सरिया डाला जाता है जबकि कुछ में सीमेंट का घोल भरा जाता है. इसमें कुछ ईंट ऐसी होती हैं, जिन्हें बिना मसाले के ही लगाया जाता है और इंटरलॉक के जरिए एक दूसरे में फंसाया जाता है और फिर बीच में सीमेंट का मसाला भरा जाता है.

जब इन ईंटों से घर या कोई दीवार बनाई जाती है तो पहले इन्हें लगाया जाता है और फिर जो खाली जगह होती है, उसमें सीमेंट का मसाला भरा जाता है. इससे ये नीचे वाली ईंट के सीमेंट मसाले से इंटरलॉक का काम करती है और दीवार को मजबूती देती है. साथ ही ईंट के ब्लॉक में सीमेंट भरने से ये काफी ज्यादा मजबूत हो जाती है. दरअसल,कंक्रीट और लोहे के सरिये का जो जाल दीवार के अंदर बनता है, वह पूरी दीवार को एक सिंगल कंक्रीट पिलर जैसी मजबूती देता है. इन ब्लॉक्स की फिनिशिंग इतनी स्मूथ होती है कि इन पर सीधे पुट्टी और पेंट किया जा सकता है.
कितने की आती है एक ईंट?
ये सामान्य लाल वाली ईंट से थोड़ी महंगी होती है. इंडिया मार्ट पर व्यापारियों की ओर से की गई लिस्टिंग के अनुसार, ये 40 से 50 रुपये के बीच आती है. इसमें अलग पैटर्न के अलग दाम होते हैं. ये सामान्य ईंट से थोड़ी बड़ी होती है, लेकिन इससे निर्माण में मजदूरी के पैसे कम लगते हैं. हालांकि, इसमें सीमेंट और लोहे का खर्चा ज्यादा आता है. लेकिन, बाउंड्री वॉल, कंपाउंड वॉल, बेसमेंट की दीवारें इससे बनाने में मजबूती की टेंशन नहीं रहती. जब गुजरात में भूकंप आया था तो इससे घर बनाने को मंजूरी दे दी गई थी, क्योंकि भूकंप हाई जोन क्षेत्र में ये ईंट काफी कारगर साबित होती है.