हैदराबाद के एक तकनीकी कर्मचारी की कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में है. एंप्लॉयी ने दावा किया है कि जब उसका नवजात बच्चा अस्पताल के एनआईसीयू (NICU) में भर्ती था, तब भी उसके मैनेजर ने उसे पैटर्निटी लीव के दौरान काम करने के लिए मजबूर किया. इस एंप्लॉयी ने अपनी कहानी रेडिट पर शेयर की. उसने बताया कि उसका बच्चा समय से पहले पैदा हुआ था और उसे सांस लेने में दिक्कत होने की वजह से अस्पताल के आईसीयू में रखना पड़ा. यह परिवार के लिए बहुत मुश्किल समय था.
एंप्लॉयी के अनुसार, उसने अपने मैनेजर और एचआर को लगभग 5 महीने पहले ही बता दिया था कि वह अप्रैल में पितृत्व अवकाश (Paternity Leave) लेगा. इसके बावजूद, छुट्टी के दौरान भी उसे बार-बार कॉल किए गए और काम सौंपा गया. उसने लिखा कि उसने अपने मैनेजर को साफ बताया था कि उसकी स्थिति गंभीर है, फिर भी मैनेजर ने उसे फोन करके काम के बारे में पूछा और नए-नए टास्क दे दिए. इससे वह काफी परेशान हो गया. कर्मचारी ने यह भी कहा कि यह पहली बार नहीं था. उसने बताया कि पिछले साल जब उसकी पत्नी गर्भावस्था के दौरान अस्पताल में भर्ती थी, तब भी उसे देर रात तक काम करने के लिए कहा गया था, जबकि कोई जरूरी काम नहीं था.

सोशल मीडिया पर लोगों ने जमकर प्रतिक्रिया दी
इस बार जब उसने अपने परिवार को प्राथमिकता देने की कोशिश की, तो उसके मैनेजर ने कथित तौर पर उसे धमकी दी. मैनेजर ने कहा कि ऐसी बातें पहले बतानी चाहिए थीं और उसकी जगह कोई और भी काम कर सकता है. इस घटना से परेशान होकर कर्मचारी ने इसे पूरी तरह अनप्रोफेशनल बताया. उसने कहा कि इतनी बड़ी कंपनी में इस तरह का व्यवहार बहुत गलत है. यह पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने जमकर प्रतिक्रिया दी. कई लोगों ने मैनेजर के व्यवहार की आलोचना की और इसे असंवेदनशील बताया.
कुछ यूजर्स ने कर्मचारी को सलाह दी कि वह इस मामले की शिकायत एचआर या सीनियर अधिकारियों से करे. वहीं, कई लोगों ने कहा कि ऐसे समय में परिवार सबसे पहले आता है, इसलिए उसे अपने बच्चे और पत्नी के साथ रहना चाहिए. कुल मिलाकर, इस घटना ने एक बार फिर काम के माहौल और कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. लोग अब यह पूछ रहे हैं कि क्या कंपनियों को अपने कर्मचारियों की निजी जिंदगी और मुश्किल समय का ज्यादा सम्मान नहीं करना चाहिए.