scorecardresearch
 

अमेरिका से लौटते ही क्यों बदल जाता है व्यवहार? भारतीय महिला ने बताया बड़ा सच

एक भारतीय महिला का कहना है कि जहां अमेरिका में लोग काम के आधार पर पहचान बनाते हैं, वहीं भारत में अक्सर लोगों को गंभीरता से लिए जाने के लिए अपनी योग्यता और बैकग्राउंड बतानी पड़ती है, उनका यह अनुभव सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है और इस पर लोग अपनी-अपनी राय दे रहे हैं.

Advertisement
X
 एक भारतीय महिला ने अमेरिका और भारत के वर्क कल्चर में बड़ा अंतर बताया है.( Photo: Insta/@nupur.nri)
एक भारतीय महिला ने अमेरिका और भारत के वर्क कल्चर में बड़ा अंतर बताया है.( Photo: Insta/@nupur.nri)

आज के समय में विदेश में काम करने वाले भारतीयों यानी एनआरआई (Non-Resident Indians) की संख्या लगातार बढ़ रही है. कई लोग पढ़ाई या नौकरी के लिए अमेरिका जैसे देशों में जाते हैं और कुछ समय बाद भारत लौट आते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि विदेश और भारत में काम करने के तरीके और लोगों के व्यवहार में कितना फर्क होता है? इसी मुद्दे पर एक भारतीय महिला का वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

नूपुर दवे नाम की एक महिला, जो खुद को एनआरआई कंसल्टेंट बताती हैं, उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है. इस वीडियो में उन्होंने अमेरिका में काम करने और फिर भारत लौटने के बाद अपने अनुभव साझा किए हैं. नूपुर के अनुसार, दोनों देशों में लोगों के सोचने और बातचीत करने का तरीका काफी अलग है. नूपुर बताती हैं कि जब वह अमेरिका में काम कर रही थीं, तब उन्हें कभी भी अपनी पढ़ाई, नौकरी या उपलब्धियों के बारे में बताने की जरूरत महसूस नहीं हुई. उन्होंने कहा कि वहां लोग आपके काम और व्यवहार के आधार पर आपको पहचानते हैं, न कि इस बात से कि आपने कहां से पढ़ाई की है या किस बड़ी कंपनी में काम किया है. उस समय नूपुर एक बड़ी टेक कंपनी में काम कर रही थीं, लेकिन उन्होंने कभी इसका दिखावा नहीं किया.

Advertisement

भारत के लोग पहली मुलाकात में ये करते हैं 
हालांकि, जब वह भारत लौटीं तो उन्हें एक बड़ा बदलाव देखने को मिला. उन्होंने महसूस किया कि यहां लोगों को आपको गंभीरता से लेने के लिए अक्सर अपनी उपलब्धियों के बारे में बताना पड़ता है. अगर आप ऐसा नहीं करते, तो कई बार लोग आपको नजरअंदाज कर देते हैं- चाहे वह आम बातचीत हो या ऑफिस का काम. नूपुर के मुताबिक, भारत में कई लोग पहली मुलाकात में ही अपनी पढ़ाई या काम के बारे में बताते हैं. जैसे- मैं फलां कॉलेज से हूं या मैंने यहां काम किया है. पहली नजर में यह दिखावा लग सकता है, लेकिन असल में यह अपनी पहचान और भरोसा बनाने का एक तरीका होता है. उन्होंने यह भी कहा कि भारत में लोग अक्सर किसी को जानने से पहले उसकी पृष्ठभूमि समझना चाहते हैं. ऐसे में अपनी योग्यता बताना एक तरह से जरूरी हो जाता है, ताकि सामने वाला व्यक्ति आपको गंभीरता से ले और आपके साथ सही तरीके से पेश आए.

इस समस्या से बचने के लिए कई लोग आपसी जान-पहचान यानी रेफरेंस का सहारा लेते हैं. यानी अगर कोई भरोसेमंद व्यक्ति आपको किसी से मिलवाता है, तो सामने वाला व्यक्ति आपको ज्यादा महत्व देता है. लेकिन इसमें भी एक जिम्मेदारी जुड़ी होती है, क्योंकि जो व्यक्ति आपको मिलवा रहा है, उसकी साख भी दांव पर होती है. नूपुर का कहना है कि यह सब सांस्कृतिक अंतर का हिस्सा है. हर देश का अपना तरीका होता है, और लोगों की सोच भी उसी हिसाब से विकसित होती है. अमेरिका में जहां सिस्टम ज्यादा व्यवस्थित है और लोग सीधे काम पर ध्यान देते हैं, वहीं भारत में रिश्तों और पहचान का महत्व ज्यादा है.

Advertisement

वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है और लोग इस पर अलग-अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं. कुछ लोग नूपुर की बातों से सहमत हैं और मानते हैं कि भारत में दिखावे का दबाव बढ़ गया है. वहीं कुछ लोगों का कहना है कि यह पूरी तरह सही नहीं है और हर जगह अलग-अलग अनुभव हो सकते हैं. कुल मिलाकर, यह वीडियो एक अहम मुद्दे को सामने लाता है कि अलग-अलग देशों में काम करने और बातचीत करने का तरीका अलग होता है. यह हमें यह समझने में मदद करता है कि किसी भी समाज को उसकी परिस्थितियों और संस्कृति के हिसाब से देखना चाहिए, न कि तुलना के आधार पर.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement