बंगाल चुनाव में कांग्रेस को केवल दो सीटें मिली. इसमें भी एक सीट पर ऐसे शख्स ने जीत हासिल की, जिसका नाम एसआईआर (SIR) में कट गया था. वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए इस शख्स ने फिर कोर्ट का रुख किया. कई सुनवाई और काफी भागदौड़ के बाद उनका नाम वोटर लिस्ट में फिर से शामिल किया गया. फिर उन्होंने कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत भी हासिल की.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का रिजल्ट आने के बाद इस शख्स को सबसे भाग्यशाली प्रत्याशी कहा जा सकता है. यह अनोखी कहानी है फरक्का विधानसभा क्षेत्र से जीत दर्ज करने वाले मोताब शेख की. एसआईआर में नाम कट जाने के बाद भी वैध तरीके से इन्होंने कैसे वोटर लिस्ट में न केवल अपना नाम दर्ज करवाया, बल्कि चुनाव लड़कर जीत भी हासिल की.
मोताब शेख के लिए बंगाल में कांग्रेस के केवल दो उम्मीदवारों में से एक के रूप में जीत हासिल करना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है. लेकिन, यहां तक पहुंचने के उनके सफर की कहानी दूसरे प्रत्याशियों से उन्हें अलग करती है. चुनावी प्रक्रिया शुरू होने से कुछ सप्ताह पहले मतदाता सूची से उनका नाम हट गया था.
सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
बंगाल में नॉमिनेशन की प्रक्रिया नजदीक आने पर मोताब ने वोटर लिस्ट में नाम शामिल करवाने के अंतिम प्रयास के रूप में सुप्रीम कोर्ट की ओर रुख किया. मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने नवगठित अपीलीय न्यायाधिकरण को उनके मामले की समीक्षा करने का निर्देश दिया.
बंगाल में अपीलीय न्यायाधिकरण का गठन 5 अप्रैल को हुआ, जो पहले चरण के उम्मीदवारों के नामांकन दाखिल करने से एक दिन पहले था. शेख के लिए समय तेजी से बीत रहा था, क्योंकि उनके निर्वाचन क्षेत्र में भी पहले चरण में मतदान होना था.
सुप्रीम कोर्ट में समय पर की गई अपील ने उन्हें बंगाल के नए अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष पहली सुनवाई में शामिल होने का मौका दिलाया. उनके दस्तावेजों, जिनमें पासपोर्ट भी शामिल था, में कोई विसंगति नहीं पाई और उन्हें वैध मतदाता के रूप में शामिल करने का निर्देश दिया गया.
तकनीकी कारणों से कट गया था नाम
अपने आदेश में, कलकत्ता उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश, टीएस शिवज्ञानम, जो अपीलीय न्यायाधिकरण की अध्यक्षता कर रहे थे, ने कहा कि चुनाव आयोग ने न्यायिक अधिकारियों की देखरेख में हुई निर्णय प्रक्रिया के दौरान शेख को हटाए जाने से संबंधित घटनाओं का विवरण प्रदान न करने के लिए तकनीकी कारणों का हवाला दिया था.
ट्रिब्यूनल ने आगे यह भी नोट किया कि शेख के पास पासपोर्ट सहित वैध सबूत थे और रिकॉर्ड में उनके पिता के नाम में किसी भी प्रकार की कोई विसंगति नहीं थी. ट्रिब्यूनल के फैसले के बाद राहत की सांस लेते हुए शेख ने मीडिया से कहा कि अब वह अपना नामांकन दाखिल कर सकेंगे.
उन्हें न केवल नाम दर्ज कराने की मंजूरी मिली बल्कि वे लगभग 27 लाख आवेदकों में से स्वीकृत होने वाले पहले व्यक्ति बन गए. एक ऐसी प्रणाली में जिसने अब तक मुश्किल से 1,600 मामलों का निपटारा किया है.इससे उन्हें अपना नामांकन दाखिल करने की अनुमति मिल गई.शेख ने फरक्का में निर्णायक जीत दर्ज करते हुए भाजपा के सुधीर चौधरी को 8,000 से अधिक वोटों से हराया.