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'अपशकुन दूर करने के लिए' कुत्तों से कराई बच्चों की शादी

पहले बच्चे को दूल्हे की तरह सजाया जाता है. फिर उसकी आरती उतारने के बाद हल्दी लगाई जाती है. इसके बाद ढोल नगाड़े के साथ बारात निकलती है.

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प्रतीकात्मक फोटो.
प्रतीकात्मक फोटो.

दुनिया कहां से कहां जा पहुंची है, लेकिन समाज में ऐसे कई वर्ग हैं जिन्हें अंधविश्वासों ने अब तक बुरी तरह जकड़ रखा है. जमशेदपुर से सटे आदित्यपुर के आदिवासी बहुल इलाके पर भी ये बात लागू होती है. यहां माना जाता है कि अगर जन्म के बाद बच्चे को पहले ऊपर का दांत निकल आता है तो वो बड़ा अपशकुन होता है.

इस अपशुकन को दूर करने के लिए बच्चे की शादी कुत्ते से कराई जाती है. लड़का हो तो कुत्तिया से और लड़की हो तो कुत्ते से. आदित्यपुर के कुलुप टांडा में सोमवार शाम को अपशकुन दूर करने के लिए ऐसे ही मामले में 5 बच्चों की शादी कराई गई. सराईकेला जिले के आदित्यपुर में पश्चिमी सिंहभूम से लेकर पूर्वी सिंहभूम तक के बच्चों को अपशकुन दूर करने के नाम पर शादी के लिए यहां लाया जाता है.

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आरती उतारने के बाद लगाते हैं हल्दी
पहले बच्चे को दूल्हे की तरह सजाया जाता है. फिर उसकी आरती उतारने के बाद हल्दी लगाई जाती है. इसके बाद ढोल नगाड़े के साथ बारात निकलती है और लोग नाचते-गाते हैं. इसके बाद साल के पेड़ के नीचे जाकर शादी की रस्में पूरी होती हैं. सिंदूर दान किया जाता है.

जिन बच्चों की शादी हो रही थी उनके अभिभावकों का कहना था कि बुरे ग्रहों को काटने के लिए ये सब किया जाता है. बचपन में इसलिए ये करा दिया जाता है कि जिससे कि बड़े होने तक अपशकुन का असर खत्म हो जाए. इनका कहना है कि बड़े होने पर भी यही प्रक्रिया फिर अपनाई जाती है जिससे कि संतान का वैवाहिक जीवन सुख के साथ बीत सके. आदिवासी समाज में अपशकुन दूर करने का ये तरीका वर्षों से चला आ रहा है. इसे वो अपनी संस्कृति का हिस्सा मानते हैं.

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