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इजरायल में मिली 2100 साल पुरानी गोली! इस पर दुश्मनों के लिए लिखा था ये संदेश

इजराइल में पुरातत्वविदों को 2,100 साल पुरानी गोली मिली है. इस पर दुश्मनों के लिए व्यंग्यात्मक संदेश भी खुदे मिले हैं. पहली बार ऐसी कोई चीज मिली है, जिस पर दुश्मनों के लिए ताने लिखे गए हो.

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इजरायल में खुदाई में मिली 2100 साल पुरानी गुलेल की गोली (Representational Photo - Pexels)
इजरायल में खुदाई में मिली 2100 साल पुरानी गुलेल की गोली (Representational Photo - Pexels)

इजराइल में 2,100 साल पुरानी एक गुलेल की गोली मिली है. आर्कियोलॉजिस्ट ने पता लगाया है कि उस गोली पर  दुश्मन सेनाओं को टारगेट करते हुए एक तीखा संदेश खुदा हुआ है. वैज्ञानिकों को यह गोली हिप्पोस में एक प्राचीन सड़क के किनारे स्थित कब्रिस्तान क्षेत्र में मिली, जो कभी बीजान्टिन युग के दौरान एक प्रमुख बिशप का केंद्र था. हेलेनिस्टिक काल के दौरान, जो 323 ईसा पूर्व से लगभग 31 ईसा पूर्व तक चला. इस शहर को सुसिता के नाम से जाना जाता था.

फॉक्स न्यूज डिजिटल की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने इसे ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी का बताया है. इस गुलेग की गोली में ग्रीक शब्द "सीखो" खुदा हुआ था. प्राचीन, अंडाकार आकार की शीशे की गोली पर यूनानी लिपि के धुंधले निशान दिखाई देते हैं.

हाइफा विश्वविद्यालय के पुरातत्वविद् माइकल आइजेनबर्ग, जिन्होंने हाल ही में अपनी सहयोगी अर्लेटा कोवालेव्स्का के साथ जर्नल पीईक्यू में अपने निष्कर्ष प्रकाशित किया है. उनका मानना ​​है कि यह शब्द एक व्यंग्य या ताना है. 

मार्च में जारी बयान के अनुसार, आइजेनबर्ग ने कहा कि हिप्पोस में ही अब तक इस तरह के 69 प्रोजेक्टाइल की पहचान की गई है, लेकिन 'सीखो' शब्द अंकित होने वाला यह दुनिया की पहली गोली  है. यह शहर के रक्षकों की ओर से दुश्मनों के लिए एक ताना था, जो अपने दुश्मनों को आंख मारते हुए सबक सिखाना चाहते थे कि 'अपना सबक सीखो!'

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यह कलाकृति लगभग 3.2 सेंटीमीटर लंबी और 1.95 सेंटीमीटर चौड़ी है. इसका वजन 38 ग्राम है. खुदाई करने वालों ने गोली पर हुए समय के प्रभाव के नुकसान के संकेत मिले और उनका मानना ​​है कि इसका वजन कभी 45 ग्राम था.

अधिकारियों ने कहा कि यह गोली संभवतः शहर की दीवारों से शहर के रक्षकों ने शहर को घेरने के लिए आगे बढ़ रहे दुश्मन पर दागा था. शिलालेख वाली गुलेल की गोली मिलना बहुत दुर्लभ है. गुलेल की गोली पर यह ग्रीक शब्द मिलना दुनिया में पहली बार हुआ है.

उस समय शीशे की गोलियों को सस्ता लेकिन घातक माना जाता था. गुलेल की गोलियां एक सरल प्रक्रिया से पत्थर के सांचों में सीसा डालकर बनाई जाती थीं, जिसे सैन्य अभियान के दौरान भी किया जा सकता था.

अधिकारियों ने कहा कि कई  गोलियों को किसी सैन्य कमांडर के नाम, किसी शहर के नाम,  या 'पकड़ो!' जैसे व्यंग्यात्मक हास्य के उद्देश्य से बनाए गए प्रतीकों, जैसे त्रिशूल, बिजली का बोल्ट या बिच्छू से सजाया भी जाता था. 

आइजेनबर्ग ने कहा कि यह कलाकृति एक असामान्य और अभूतपूर्व खोज है. शिलालेख वाली गुलेल की गोली मिलना बहुत दुर्लभ है. गुलेल की गोली पर यह ग्रीक शब्द मिलना दुनिया में पहली बार हुआ है. 

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पिछले साल खुदाई में हिप्पोस में बुजुर्गों के लिए 1,600 साल पुराना एक ईसाई देखभाल केंद्र मिला, जो संभवतः दुनिया का सबसे पुराना नर्सिंग होम हो सकता है. इसके अलावा, हिप्पोस में पुरातत्वविदों ने पिछले साल मेटल डिटेक्टरों की बदौलत प्राचीन आभूषणों और सोने के सिक्कों का एक बड़ा भंडार खोजा था.

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