वर्क प्लेस पर समय पर पहुंचना आम बात मानी जाती है. समय की पाबंदी से काम सही तरीके से चलता है और बाकी कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव भी नहीं पड़ता. लेकिन अगर किसी कर्मचारी को सिर्फ थोड़ी सी देरी की वजह से नौकरी से निकाल दिया जाए, तो यह सवाल उठता है कि क्या यह फैसला सही था.
रेडिट पोस्ट से सामने आया मामला
यह मामला तब चर्चा में आया जब एक यूजर ने इसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर शेयर किया. पोस्ट के अनुसार एक कर्मचारी पिछले सात साल से कंपनी में काम कर रहा था और इस दौरान वह कभी भी देर से ऑफिस नहीं पहुंचा था,लेकिन एक दिन वह पहली बार 20 मिनट देर से पहुंचा और इसी वजह से कंपनी ने उसे नौकरी से निकाल दिया.
सहकर्मियों को कुछ दिन बाद पता चला
रेडिट पोस्ट के मुताबिक यह घटना मंगलवार को हुई थी. सहकर्मियों को इसके बारे में कुछ दिन बाद जानकारी मिली. पोस्ट में लिखा गया कि यह घटना मंगलवार को हुई और आज हमें पता चला कि पहली बार 20 मिनट देर से आने की वजह से उसे निकाल दिया गया.हालांकि पोस्ट में कंपनी का नाम या कर्मचारी की पहचान नहीं बताई गई.
सहकर्मी कर रहे विरोध की तैयारी
पोस्ट लिखने वाले यूजर ने बताया कि कर्मचारी के समर्थन में उसके सहकर्मी विरोध करने की तैयारी कर रहे हैं. यूजर ने लिखा कि अगले सोमवार मैं और मेरे सभी सहकर्मी जानबूझकर देर से ऑफिस आएंगे और ऐसा तब तक करेंगे, जब तक कंपनी उसे दोबारा नौकरी पर नहीं रखती.
देखें पोस्ट
सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग राय
यह मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसको लेकर बहस शुरू हो गई. कई लोगों ने कर्मचारी के समर्थन में प्रतिक्रिया दी.एक यूजर ने लिखा कि किसी अच्छे कर्मचारी को सिर्फ एक बार देर से आने पर नहीं निकाला जाता. लगता है कंपनी पहले से ही उसे हटाने का बहाना ढूंढ रही थी.एक दूसरे यूजर ने कहा कि संभव है कंपनी उसे निकालना चाहती थी और यह सिर्फ एक वजह बन गई.
कुछ लोगों ने दी सावधानी की सलाह
हालांकि कुछ लोगों ने सहकर्मियों के विरोध को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी. उनका कहना था कि ऐसा कदम उल्टा भी पड़ सकता है.कई यूजर्स ने अपने अनुभव भी साझा किए. एक व्यक्ति ने लिखा कि चार साल में पहली बार 15 मिनट देर से आने पर उसे भी नौकरी से निकाल दिया गया था.वहीं एक अन्य यूजर ने इस घटना को बहुत कठोर बताते हुए इसे खराब कार्यस्थल माहौल का उदाहरण बताया.