चीन के जियाओमीशा सी वर्ल्ड एक्वेरियम में असली की जगह नकली रोबोटिक 'शार्क व्हेल' मछलियों की प्रदर्शनी लगाकर लोगों को ठगा जा रहा था. वहां पहुंचे लोगों ने जब गौर से मछली को देखा तो माजरा कुछ और ही नजर आया. जब लोगों को इस बात का पता चला कि, असली बताकर नकली मछली दिखाई जा रही है तो वहां पहुंचे विजिटर्स ने खुद को ठगा समझा. फिर जमकर हंगामा किया.
असली मछलियों की जगह रोबोटिक शार्क दिखाने के खुलासे के बाद चीन की पूरी दुनिया में किरकिरी हुई. दरअसल, इस एक्ववेरियम में दुर्लभ बेशकीमती व्हेल शार्क बताकर उसकी एक रोबोटिक प्रतिकृति लोगों को दिखाई जा रही थी. यह सी वर्ल्ड पांच साल के बाद दोबारा पर्यटकों के लिए 1 अक्टूबर को खुला था.
दुनिया की सबसे बड़ी मछली दिखाने का किया था दावा
इस एक्वेरियम में दुनिया की सबसे बड़ी मछली का दावा किया जा रहा था. यहां 'शार्क व्हेल' नाम की मछली की लोगों के लिए प्रदर्शनी लगाई गई थी. सबसे बड़ी मछली को देखने के लिए वहां करीब एक लाख लोग पहुंचे थे. धीरे-धीरे लोगों का यह उत्साह कम होने लगा. क्योंकि लोगों को पता चला कि जिसे दुनिया की सबसे बड़ी मछली होने का दावा किया जा रहा है, वो तो मछली की महज एक मशीनी प्रतिकृति ही.
एक्वेरियम के संचालकों ने दी सफाई
इस नकली रोबोटिक मछली की असलियत पता चलते ही लोगों ने बवाल शुरू कर दिया और असली मछली देखने के लिए दिये गए पैसे को वापस करने की मांग करने लगे. इस पर एक्वेरियम के संचालकों ने सफाई दी कि रोबोट व्हेल शार्क का उद्देश्य आगंतुकों को धोखा देना नहीं था, बल्कि व्हेल शार्क को पकड़ने और व्यापार करने पर रोक लगाने वाले कानूनों का पालन करना था. फिर भी लोग सी वर्ल्ड एक्वेरियम से रिफंड की मांग पर अड़े रहे.
पहले भी कुत्ते को पांडा बताकर दिया था धोखा
जानवरों की प्रदर्शनी और धोखे को लेकर चीन को पहले भी इसी तरह के विवादों का सामना करना पड़ा है. एक बार यहां कुत्तों को पांडा जैसा दिखने के लिए स्प्रे-पेंट करने की घटना भी सामने आई थी. यह घटना चीन के जियांग्सू प्रांत के ताइझोउ चिड़ियाघर में हुई थी. उसे 1 मई को आगंतुकों के लिए नए जानवरों को देखने के लिए खोला गया था.