...यह जानना कि माता-पिता 'बस अगले कमरे में हैं', हमें मानसिक सुकुन देता है. अब उन्हें किसी इमरजेंसी कंडीशन में हजारों किलोमीटर दूर होने का डर नहीं है. सताता. अमेरिका में 12 साल तक रहने के बाद एक NRI ने भारत लौटने का अपना अनुभव शेयर किया है. उन्होंने बताया कि यह फैसला उनके जीवन के सबसे मुश्किल फैसलों में से एक था, लेकिन आज उन्हें लगता है कि उन्होंने सही कदम उठाया. इस NRI ने पिछले साल अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल के लिए भारत लौटने का निर्णय लिया था. उन्होंने कहा कि दूर देश में रहकर माता-पिता की बिगड़ती सेहत को संभालना उनके लिए मानसिक रूप से बहुत भारी हो गया था.
माता-पिता के पास रहकर मिली शांति
रेडिट पर लिखी अपनी पोस्ट में उन्होंने कहा- 'मैं पिछले साल भारत लौटा. यह शायद मेरे जीवन का सबसे कठिन फैसला था. अपने माता-पिता को अकेले स्वास्थ्य समस्याओं से जूझते देखना मेरे लिए असहनीय हो गया था.' भारत लौटने के बाद उन्हें अपने फैसले पर कोई पछतावा नहीं है. उन्होंने बताया कि सर्जरी के बाद माता-पिता के साथ रहना और उनकी देखभाल करना उनके लिए बहुत सुकून देने वाला अनुभव रहा. उन्होंने लिखा कि यह जानना कि माता-पिता 'बस अगले कमरे में हैं', उन्हें मानसिक शांति देता है. अब उन्हें किसी आपात स्थिति में हजारों किलोमीटर दूर होने का डर नहीं सताता.

रिमोट नौकरी और आर्थिक आजादी
भारत में लौटने के बाद उन्हें एक रिमोट जॉब मिल गई, जिससे उनकी आमदनी बनी हुई है. उन्होंने बताया कि अब उनके पास अच्छी सेविंग है और उन्हें अपने भविष्य पर पूरा नियंत्रण महसूस होता है. उन्होंने लिखा- 'यह जानना कि मैं जब चाहूं नौकरी छोड़ सकता हूं, इस एहसास को शब्दों में बयान करना मुश्किल है.'इसके साथ ही उन्होंने घर का बना खाना खाने, और बिना देश छोड़ने के डर के लंबे समय की प्लानिंग करने की खुशी भी शेयर की. इसके अलावा, अमेरिका से जुड़ी परेशानियां -जैसे इमिग्रेशन की चिंता, वीज़ा स्टैंपिंग, या नागरिकता से जुड़ी अनिश्चितताएं अब पूरी तरह खत्म हो चुकी हैं. उन्होंने कहा, 'अब न तो वीज़ा की चिंता है, न इमिग्रेशन की. मैं मानसिक रूप से पहले से कहीं ज्यादा शांत हूं.”
अमेरिका की ज़िंदगी से आज भी इमोशनल जुड़ाव
हालांकि, भारत लौटने से उन्हें शांति मिली है, लेकिन अमेरिका में छोड़ी गई ज़िंदगी को भूलना आसान नहीं रहा. उन्होंने कैलिफोर्निया में बिताए समय को एक सपने जैसा बताया. उन्होंने माना कि अमेरिका के साथ उनका इमोशनल जुड़ाव आज भी बना हुआ है. आज भी उनके पास अमेरिका का सोशल सिक्योरिटी नंबर, पहचान पत्र, बैंक अकाउंट और 401k रिटायरमेंट फंड मौजूद है. उन्होंने बताया कि उन्होंने अब तक भारत में कोई पैसा ट्रांसफर भी नहीं किया है. उन्होंने लिखा- यह सोचकर अजीब लगता है कि मैं अब शायद कभी अमेरिका वापस न जा पाऊं.' उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि सालों तक उस देश में रहने का भावनात्मक बोझ अब महसूस हो रहा है, जहां वे हमेशा खुद को थोड़ा अजनबी ही समझते थे.
लोगों ने भी शेयर किए अपने अनुभव
उनकी पोस्ट का टाइटल था- 9 महीने बाद... मुझे खुशी है कि मैंने भारत लौटने का फैसला लिया, लेकिन. इस पोस्ट पर कई लोगों ने अपनी भावनाएं शेयर कीं. एक यूजर ने लिखा- यह सोचकर दुखी मत हो कि वह समय खत्म हो गया. खुश रहो कि तुम्हें वह जीने का मौका मिला.' दूसरे ने कहा- दो अलग-अलग देशों में हमारी जड़ें जम जाती हैं, और यही अंदरूनी संघर्ष की वजह बनती है.
' एक और यूजर ने भावुक होकर लिखा- मैं तुम ही हूं, तुम मैं ही हो. बिल्कुल वही कहानी. कुछ लोगों ने कहा कि भारत लौटने के बाद परिवार और समाज से जुड़ाव तो बढ़ता है, लेकिन करियर और जीवन की कई संभावनाएं वहीं रुक जाती हैं. एक यूजर ने दिलासा देते हुए लिखा- कुछ महीने इंतज़ार करो. एक दिन ऐसा आएगा जब लगेगा कि तुम हमेशा से यहीं रहते आए हो.