देश में बढ़ते भ्रष्टाचार पर प्रभावी रोकथाम के लिये सशक्त लोकपाल के समर्थन में करीब 290 घंटे तक अनशन करने वाले ‘दूसरे गांधी’ अन्ना हजारे की विदेशी मीडिया ने भूरि-भूरि प्रशंसा की है.
अमेरिका के प्रतिष्ठित समाचार पत्र ‘न्यूयार्क टाइम्स’ ने लिखा, ‘‘भारतीय संसद ने शनिवार को भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चलाने वाले अन्ना हजारे के आगे आत्मसमर्पण कर दिया और करीब दो सप्ताह से चला आ रहा गतिरोध समाप्त हो गया. अन्ना हजारे के समर्थन में भारत के हजारों लोग सड़कों पर उतर आये थे.’’
पत्र ने लिखा, ‘‘एक दिन के मोलभाव और भाषणबाजी के बाद संसद ने हजारे की मुख्य मांगों को समर्थन देने वाले प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया. उन्होंने विधेयक में नौकराशाहों और लोकसेवकों की जांच करने के लिये स्वतंत्र भ्रष्टाचार निरोधी एजेंसी बनाने का सुझाव दिया है.’’
अमेरिका के प्रमुख वित्तीय अखबार ‘वाल स्ट्रीट’ जर्नल ने लिखा, ‘‘सरकार द्वारा भ्रष्टाचार निरोधी विधेयक में अन्ना हजारे की कई मांगों को स्वीकार कर लिये जाने के बाद गांधीवादी कार्यकर्ता ने भ्रष्टाचार से निपटने की देश की राजनीतिक इच्छा को परखने वाले इस आंदोलन से उपजे संकट को खत्म करते हुए 13 वें दिन रविवार सुबह अपना अनशन समाप्त कर दिया.’’
‘वाशिंगटन पोस्ट’ ने लिखा, ‘‘भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने अनशन से देश को प्रेरित करने वाले भारतीय सुधारवादी कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने संसद को अपने मुद्दों पर समर्थन देने के लिये बाध्य करने के बाद 12 दिन से चला आ रहा अपना अनशन समाप्त कर दिया.’’
ब्रिटेन के प्रमुख समाचार पत्र ’द गार्डियन’ ने लिखा है, ‘‘श्री अन्ना हजारे के पास गांधी की तरह कद और ख्वाहिश नहीं है. उन्होंने गांधी की तरह मुकाबला नहीं किया. हजारे एक ऐसे मुद्दे को लेकर खड़े हुए जो लोगों के लिए महत्वपूर्ण है.’’
एक अन्य अखबार डेली टेलीग्राफ’ लिखता है, महात्मा गांधी के स्मरण की वजह से भारत में अनशन करना लोगों को छू जाने वाला विषय है. गांधी ब्रिटिश शासन के खिलाफ यह रास्ता अपनाते थे.’’
चीन के समाचार पत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने अन्ना हजारे के अनशन तोड़ने पर लिखा, ‘‘जमीनी स्तर पर मिले जबर्दस्त समर्थन ने भ्रष्टाचार के आरोपों से दागदार मनमोहन सिंह की सरकार को आश्चर्य में डाल दिया. हजारे के स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती चिंताओं की पृष्ठभूमि में सरकार इस संकट से निकलने के लिये रास्ता ढूंढने लगी.’’
पाकिस्तान के प्रतिष्ठित समाचार पत्र ‘द न्यूज’ ने लिखा, ‘‘शनिवार को उस समय भारतीय संसद में इतिहास रचा गया जब दोनों सदन स्वतंत्र लोकपाल के लिये अन्ना हजारे के अभियान को जमीनी स्तर पर जनता से मिले जबर्दस्त समर्थन के बाद झुक गये.’’
पत्र ने लिखा, ‘‘रामलीला मैदान में उत्सव-सा माहौल था और लोग हजारे की ‘जीत’ पर नगाड़े बजा रहे थे और जश्न मना रहे थे.’’
बाग्लादेश के ‘बीडी न्यूज 24’ ने कहा, ‘‘गांधीवादी और भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चलाने वाले अन्ना हजारे ने नारियल पानी और शहद लेकर 13 दिन पुराना अपना अनशन समाप्त कर दिया. दशकों में यह भारत का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन रहा. इसने जहां सरकार की घेरेबंदी की और वहीं मध्य वर्ग ने इसका स्वागत किया.’’