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ईरान में जंग के बीच हो रही 'काली बारिश'! कितनी खतरनाक है इसकी एक-एक बूंद

Black rain Tehran Iran war
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तेहरान में युद्ध के बीच 'काली बारिश' हो रही है. यह इतनी खतरनाक है कि इसके संपर्क में आने से लोगों की तुरंत मौत हो सकती है या फिर लंबे समय के लिए लोग बीमार पड़ सकते हैं. ईरान की राजधानी तेहरान में अमेरिकी-इजरायली हवाई हमलों से ईरान के तेल संयंत्र उड़ा दिए गए. इससे निकले जहरीले धुएं के बादल हवा में फैल गए हैं. तेल और जहरीले केमिकल व गैस से बने इन बादलों से ही 'काली बारिश' हो रही है. (Photo - AP)
 

Black rain Tehran Iran war
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कालिख से काली पड़ी इमारतें, जले वाहन और उखड़ी सड़कें, घने-काले धुएं के बादल और सुलगते बड़े तेल संयंत्र, तेहरान का इन दिनों यही नजारा है.  ईरान की पेट्रोलियम सुविधाओं पर अमेरिका और इजरायल द्वारा की गई बमबारी के बाद , वातावरण में जहरीले धुएं के विशाल गुबार उठ रहे हैं. ये खतरनाक बादल बाद में घातक 'काली बारिश' के रूप में जमीन पर लौट रहे हैं और यह इतना गंभीर संकट साबित हुआ कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) सहित वैश्विक स्वास्थ्य अधिकारियों ने सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम चेतावनी जारी की है.इजरायली सेना (आईडीएफ) ने एक बयान में स्वीकार किया कि उन्होंने तेहरान में कई तेल भंडार फैसिलिटी पर हमला किया गया है. इससे भारी मात्रा में जहरीली गैस और धुआं वातावरण में फैल गया है. इसके साथ ही अधजले कच्चे तेल के महीन बूंदे भी हवा में तैर रही है. ये बादलों का रूप लेकर वापस जमीन पर बारिश की तरह बरस जा रहे हैं, जिनमें पानी के बदले गाढ़े तेल और जहरीले केमिकल्स की चिपचिपी बूंदें होती हैं. (Photo - AP)
 

Black rain Tehran Iran war
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पिछले सप्ताह, शहर की तेल सुविधाओं पर हुए हमलों के बाद, तेहरान के निवासियों ने काली बारिश होने की सूचना दी. 'काली बारिश' उस वर्षा के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला बोलचाल का शब्द है जो विस्फोट से निकले और भारी मात्रा में तेल से जलने के बाद गहरे धुएं, जिसमें प्रदूषण की मात्रा काफी ज्यादा और सघन होती है. वैसे जहरीले धुएं से बने बादल जब नीचे जमीन पर गिरते हैं तो उनकी बूंदे काली, गाढ़ी और चिपचिपी होती है. इन बादलों और इसकी बूंदों का रंग गहरा काला होता है. (Photo - AP)
 

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Black rain Tehran Iran war
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'काली बारिश' की असामान्य घटना तब होती है जब बड़ी मात्रा में कालिख, राख और हानिकारक रसायन वायुमंडल में पानी की बूंदों के साथ मिल जाते हैं और  वापस पृथ्वी पर गिर जाते हैं. डॉ. देओरस ने बीबीसी को समझाया कि बारिश की बूंदें छोटे स्पंज या चुंबक की तरह काम कर रही थीं, जो गिरते समय हवा में मौजूद हर चीज को चिपका लेती है. यही कारण है कि उस जगह के निवासियों ने ऐसी बारिश को 'काली बारिश' के तौर पर देखते हैं.  (Photo - AP)
 

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कार्नेगी मेलन विश्वविद्यालय में सिविल और पर्यावरण इंजीनियरिंग के प्रोफेसर पीटर एडम्स ने बताया कि ईरान के मामले में ईंधन तेल में हाइड्रोकार्बन के अधजले होने के कारण सूक्ष्म कालिख का निर्माण हुआ है.प्रोफेसर के अनुसार, तेल के जलने से पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (पीएएच) नामक यौगिकों और नाइट्रोजन ऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड जैसी जहरीली गैसों (जो अम्लीय वर्षा का कारण बनती हैं) का निर्माण भी हुआ है. (Photo - AP)
 

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हमलों के बाद, ईरान की रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने तेहरान और आसपास के इलाकों के निवासियों को चेतावनी जारी की कि बाद में होने वाली वर्षा अत्यधिक खतरनाक और अम्लीय साबित हो सकती है, जिससे त्वचा पर रासायनिक जलन और फेफड़ों को गंभीर क्षति हो सकती है.कालिख के ये छोटे-छोटे कण - जो एक सामान्य मानव बाल के रेशे से लगभग 40 गुना महीन होते हैं - फेफड़ों के ऊतकों में गहराई तक प्रवेश कर सकते हैं और रक्तप्रवाह में मिल सकते हैं, जिससे घातक श्वसन और हृदय संबंधी जटिलताएं या यहां तक ​​कि असमय मृत्यु भी हो सकती है. (Photo - Pexels)
 

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मिरर की रिपोर्ट के अनुसार , पिछले सप्ताह की बमबारी के बाद, तेहरान के निवासियों ने सांस लेने में कठिनाई और आंखों में जलन की शिकायत की. क्योंकि अमेरिकी-इजरायली सेना द्वारा कई तेल रिफाइनरियों और ईंधन डिपो को निशाना बनाए जाने के बाद ईरानी राजधानी और उसके आसपास के इलाकों में चिपचिपी और कोयले जैसी काली बारिश हुई. मिडिल ईस्ट के अन्य क्षेत्रों में भी घने और भारी काले धुएं के भयानक बादल देखे गए हैं. क्योंकि ईरान का अमेरिका और इज़रायल के साथ संघर्ष तेज हो गया है और इस्लामी गणराज्य ने प्रतिशोधात्मक हमलों में कई खाड़ी देशों को निशाना बनाया है. यदि संकट और भी बदतर होता रहा, तो 'काली बारिश' से खतरे में पड़ने वाले केवल ईरानी ही नहीं होंगे. (Photo - AP)
 

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विशेषज्ञ उन लोगों को तत्काल स्वास्थ्य संबंधी चेतावनी दे रहे हैं जो 'काली बारिश' के संपर्क में आए हैं, क्योंकि इस जहरीली बारिश के  संपर्क में आने से तत्काल और लंबे समय के खतरे हो सकते हैं. 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका-इजरायल की बमबारी शुरू होने के बाद से, बीबीसी ने ईरान की राजधानी तेहरान के आसपास स्थित उसके पेट्रोलियम प्रतिष्ठानों पर कम से कम चार सत्यापित हमलों की पुष्टि की है.तेहरान में लगभग 1 करोड़ निवासी रहते हैं और लाखों लोग पड़ोसी क्षेत्रों में बसते हैं. तेहरान के पास स्थित ईरानी तेल रिफाइनरियों और भंडारण सुविधाओं पर बमबारी के बाद, शहर के निवासियों ने घने धुएं और प्रदूषण की शिकायत की. इसके बारे में उन्होंने कहा कि यह सूरज की रोशनी को रोक रहा है, जिससे राजधानी के कई जिलों में जलने की तेज गंध फैल रही है. (Photo - Pixabay)
 

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विशेषज्ञों ने तुरंत चेतावनी दी कि वातावरण में तैर रहे घने काले बादलों में हानिकारण पॉल्यूटेंट की मात्रा काफी ज्यादा है.  वायु प्रदूषण में यह वृद्धि कथित तौर पर मुख्य रूप से तेहरान के आसपास केंद्रित है, जहां पेट्रोलियम संयंत्रों पर हमला हुआ और वे नष्ट हो गए.डेली स्टार के मुताबिक, रीडिंग विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. अक्षय देवरास ने बीबीसी को बताया कि ईरान में जो कुछ हुआ भी हो रहा है वह निश्चित रूप से अभूतपूर्व है क्योंकि यह सब मिसाइलों के गिरने और तेल रिफाइनरियों पर हवाई हमलों के कारण हो रहा है. (Photo - AP)
 

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  • 10/10

तेहरान की एक शिक्षिका लीला ने टाइम पत्रिका को बताया कि 7 मार्च को ईरान के तेल बुनियादी ढांचे पर अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए शुरुआती हमलों के बाद हवा सांस लेने लायक नहीं रह गई थी. मैं सिर्फ 15 मिनट के लिए कार में थी और इस हवा में सांस ले रही थी. मुझे पता भी नहीं कि यह क्या है, और अब मुझे सिरदर्द हो रहा है. मेरे चेहरे की त्वचा, खासकर मेरे होंठ, दुख रहे हैं और छिल गए हैं. तेहरान की रहने वाली नेगिन (नाम बदला हुआ) ने द गार्जियन को बताया कि हालात इतने भयावह हैं कि उनका वर्णन करना मुश्किल है. पूरे शहर में धुआं छाया हुआ है.  मुझे सांस लेने में बहुत तकलीफ हो रही है और आंखों व गले में जलन हो रही है. फिर भी लोगों को फिर भी बाहर जाना पड़ रहा है क्योंकि उनके पास कोई विकल्प नहीं है. (Photo - AP)

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