क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो ऑफिस की मीटिंग या घर के कामों के बीच चुपके से मोबाइल पर वेकेशन डेस्टिनेशंस की तस्वीरें स्क्रॉल करते हैं? अक्सर हम उन जगहों पर पहुंच तो जाते हैं, जिन्हें हमने सोशल मीडिया पर देखा होता है, लेकिन वहां की भीड़ और भागदौड़ हमें और ज्यादा थका देती है. साल 2026 इसी थकावट को मिटाने और घूमने के पुराने तरीकों को बदलने का साल है.
इस साल मुसाफिरों का मिजाज बदला हुआ है. अब लोग सिर्फ दिखावे के लिए नहीं, बल्कि सुकून के लिए घर से निकल रहे हैं. इंटरनेट पर मौजूद एआई (AI) बॉट्स और फेक रिव्यूज के दौर में, अब असली चुनौती उन अनसुने रास्तों को खोजने की है जहां यादें कैमरे के लेंस से नहीं, बल्कि दिल से बनती हैं. तो चलिए जानते हैं कि इस साल आपकी छुट्टियों का पूरा गेम प्लान कैसे बदलने वाला है और कौन से ठिकाने आपके होश उड़ाने को तैयार हैं.
इन ठिकानों पर फिदा हो रही है दुनिया
आज का मुसाफिर अब यह नहीं पूछता कि कहां जाना सस्ता है?, बल्कि वह यह पूछता है कि कहां जाना सार्थक है?. स्काईस्कैनर की ताजा रिपोर्ट भी इसी ओर इशारा करती है कि भारतीय सैलानी अब भीड़भाड़ वाले टूरिस्ट ट्रैप से ऊब चुके हैं. यही कारण है कि दक्षिण कोरिया का सियोल अब केवल केड्रामा के शौकीनों की पसंद नहीं रहा, बल्कि लोग वहां की गलियों में बसने वाली आम जिंदगी का हिस्सा बनने पहुंच रहे हैं. लोग वहां के छोटे-छोटे कैफे और लोकल फैशन को अपनी रफ्तार से महसूस करना चाहते हैं.
इसी राह पर चलते हुए कजाकिस्तान का अल्माटी उन लोगों के लिए नया हॉटस्पॉट बन गया है, जो शोर शराबे से दूर बर्फ की चादर ओढ़े पहाड़ों के बीच खो जाना चाहते हैं. यह शहर उन घुमक्कड़ों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं जो बिना किसी दबाव के कुदरत और संस्कृति का लुत्फ उठाना चाहते हैं. वहीं अगर अपने देश की बात करें, तो कोच्चि अपनी कलात्मक गलियों और बेहतरीन जायकों के साथ आज भी लिस्ट में टॉप पर है. कोच्चि की खासियत यह है कि यहां पहुंचकर आप समय को ठहरते हुए देख सकते हैं, जो इसे भागदौड़ वाली लाइफस्टाइल से दूर एक बेहतरीन ब्रेक बनाता है.
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लहरें बनेंगी आपकी हमसफर
जब शहर की तपिश और बिजी शेड्यूल दिमाग थका दे, तो समंदर की लहरें ही सबसे बड़ा सहारा होती हैं. देखा जाए तो 2026 में वॉटरब्रेक यानी समंदर के किनारे समय बिताना सबसे बड़ा आकर्षण बनने जा रहा है. अब बीच पर जाना सिर्फ एक जगह घूमना भर नहीं है. लोग अब सेशेल्स, फिलीपींस और जांजीबार जैसे उन अनसुने ठिकानों की तलाश में हैं, जहां पानी का नीला रंग मन को शांत कर दे. इतना ही नहीं, भारत के लक्षद्वीप को लेकर भी सैलानियों में एक अलग ही जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है.
समंदर की इसी चाहत ने भारत में क्रूज वेकेशन की एक नई लहर पैदा कर दी है. अब क्रूज का मतलब सिर्फ एक जहाज की सवारी नहीं, बल्कि समंदर के बीचोंबीच तैरती एक पूरी जादुई दुनिया है. यही वजह है कि अब मुसाफिरों को रटे रटाए टाइमटेबल पसंद नहीं आ रहे. लोग अब ऐसी क्रूज यात्राएं चुन रहे हैं, जहां वे अपनी मर्जी के मालिक हों और अपनी रफ्तार से घूम सकें. फिर वो चाहे दुबई हो, मालदीव हो या सिंगापुर, क्रूज पर सवार होकर दुनिया देखना अब पहले से कहीं ज्यादा आसान और शानदार अनुभव होने वाला है.
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लग्जरी की नई परिभाषा
एक जमाना था जब लग्जरी का मतलब सिर्फ एक आलीशान होटल का कमरा होता था, लेकिन अब खेल बदल चुका है. आज के मुसाफिर के लिए असली लग्जरी है वक्त. वह वक्त जिसमें उसे एक ही दिन में 10 टूरिस्ट स्पॉट घूमने की जल्दी न हो. अब लोग क्वालिटी पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं. यही वजह है कि अब लोग ऐसी ट्रिप्स प्लान कर रहे हैं, जहां वे एक दूसरे के करीब आ सकें और अच्छी यादें बना सकें. तकनीक और एआई आपकी टिकट तो बुक कर सकते हैं, लेकिन वह सुकून नहीं दे सकते जो एक शांत शाम को समंदर किनारे बैठकर अपनों के साथ मिलता है.