scorecardresearch
 

नैनीताल के पास बना है 'न्याय का मंदिर', यहां हुई थी 'विवाह' फिल्म की शूटिंग, जानेंं इसकी खासियत

नैनीताल के पास स्थित घोड़ाखाल मंदिर अपनी अनोखी परंपराओं के लिए वर्ल्ड फेमस है, न्याय के देवता गोल्ज्यू को समर्पित इस मंदिर में भक्त कागज पर अपनी अर्जी लिखकर न्याय मांगते हैं. मुराद पूरी होने पर यहां घंटियां चढ़ाई जाती हैं. फिल्म 'विवाह' की शूटिंग के बाद यह पर्यटकों के बीच और भी लोकप्रिय हो गया है.

Advertisement
X
ऊंची चोटी पर न्याय के देवता 'गोल्ज्यू' का मंदिर बना है. (PHOTO:ITG)
ऊंची चोटी पर न्याय के देवता 'गोल्ज्यू' का मंदिर बना है. (PHOTO:ITG)

Nainital Famous Ghorakhal Temple: उत्तराखंड के सबसे ज्यादा चर्चित टूरिस्ट प्लेस के बारे में सोचते ही सबसे पहला नाम दिमाग में नैनीताल का ही आता है. दिल्ली से नैनीताल की दूरी लगभग 300 से 320 किलोमीटर है और इसी वजह से गर्मियों की छुट्टियों में ज्यादातर परिवार वहां घूमने निकल जाते हैं. नैनीताल जाने वाले लोग नैनी झील, नैना देवी मंदिर, मॉल रोड, स्नो व्यू पॉइंट, टिफिन टॉप, भीमताल, सातताल और कैंची धाम जैसी जगहों पर जरूर जाते हैं.

मगर क्या आप जानते हैं कि वहां पर एक बड़ा ही प्रसिद्ध मंदिर है, जहां दूर-दूर से लोग दर्शन करने आते हैं. इस मंदिर की एक अलग खासियत है, जिसे जानने के बाद उत्तराखंड ही नहीं बल्कि दूसरे प्रदेशों से भी लोग वहां दर्शन के लिए आते हैं. अगली बार जब भी आप नैनीताल का ट्रिप प्लॉन करें तो इस मंदिर के दर्शन करने जरूर जाएं.

घोड़ाखाल मंदिर: न्याय के देवता का दरबार 

यह मंदिर गोल्ज्यू देवता का है, जिन्हें कुमाऊं की धरती पर न्याय के देवता कहा जाता है और लोगों में उनकी अटूट आस्था देखने को मिलती है. हम जिस मंदिर की बात कर रहे हैं वो नैनीताल के पास भवाली से महज पांच किमी की दूरी पर स्थित सैनिक स्कूल के पीछे चोटी पर बना घोड़ाखाल मंदिर का है, जिसे गोल्ज्यू मंदिर भी जाता है.  

Advertisement

‘विवाह’ फिल्म से जुड़ा खास कनेक्शन

शाहिद कपूर और अमृता राव की फिल्म विवाह तो आप सभी ने देखी होगी और सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि उस मूवी की कुछ शूटिंग इस मंदिर में भी हुई है. अगर आपने फिल्म देखी होगी तो उस फिल्म में शाहिद और अमृता की फैमिली एक मंदिर जाते हैं, जहां काफी सारी घंटियां बंधी होती है और वहां पर शाहिद का सिर भी एक घंटी से टकरा जाता है. वो सीन घोड़ाखाल मंदिर परिसर का ही है. 

क्यों कहा जाता है ‘घंटियों का मंदिर’

घोड़ाखाल मंदिर में स्थित गोल्ज्यू देवता का मंदिर है, जहां वो सफेद घोड़े पर सवार मूर्ति है, जिसके दर्शन लोग करते हैं. घोड़ाखाल मंदिर को घंटियों का मंदिर भी कहा जाता है, क्योंकि वहां पर हजारों घंटिया बंधी हुई हैं.गोलू देवता को स्थानीय संस्कृति में सबसे बड़े और त्वरित न्याय के देवता के रूप में पूजा जाता है और इन्हें राजवंशी देवता के तौर पर पुकारा जाता है. 

ऐसी मान्यता है कि यहां पर लोगों को न्याय जरूर मिलता है, अपनी जिंदगी में किसी भी न्याय पाने की आस में यहां आकर पर्ची पर अपनी अर्जी लगाते हैं. जब उनकी मुराद पूरी हो जाती है तो लोग यहां पर आकर घंटी बांधकर जाते हैं. ऐसा कहा जाता है कि न्याय के देवता के दरबार से कोई खाली हाथ नहीं जाता है और इसलिए लोग अपनी अर्जी लेकर यहां आते हैं. 

Advertisement

शादीशुदा जीवन से जुड़ी मान्यता

ऐसा भी कहा जाता है कि शादी के बाद जब नवविवाहित जोड़ा इस मंदिर में आता है तो उनका रिश्ता सात जन्मों के लिए बंध जाता है. उनकी शादीशुदा जिंदगी खुशियों से भर जाती है और इतना ही नहीं इस मंदिर में लोग शादी करने भी आते हैं. 

सिर्फ आस्था ही नहीं बल्कि ऊंची चोटी पर होने की वजह से यहां से बेहद खूबसूरत नजारा भी देखने को मिलता है, जिसकी वजह यहां टूरिस्ट जरूर आते हैं.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement