संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (United Nations Security Council-UNSC) संयुक्त राष्ट्र (UN) के छह प्रमुख अंगों में से एक है. इसकी स्थापना वर्ष 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की गई थी. सुरक्षा परिषद का मुख्य उद्देश्य दुनिया में अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना है. यह संयुक्त राष्ट्र का ऐसा निकाय है, जिसे शांति और सुरक्षा से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण निर्णय लेने का अधिकार प्राप्त है.
संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुसार, सुरक्षा परिषद अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए खतरे की पहचान कर सकती है, संघर्ष की स्थिति का आकलन कर सकती है और आवश्यकता पड़ने पर शांति बनाए रखने के लिए विभिन्न कदम उठा सकती है. परिषद शांति मिशन शुरू करने, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाने और कुछ परिस्थितियों में सैन्य कार्रवाई को मंजूरी देने का अधिकार भी रखती है. इसके अलावा, सुरक्षा परिषद द्वारा पारित कुछ प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों के लिए बाध्यकारी होते हैं.
सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं. इनमें पांच स्थायी सदस्य और 10 अस्थायी सदस्य शामिल हैं. स्थायी सदस्य रूस, चीन, अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस हैं. इन पांच देशों के पास वीटो (Veto) का अधिकार होता है. इसका अर्थ है कि यदि कोई स्थायी सदस्य किसी महत्वपूर्ण प्रस्ताव का विरोध करता है, तो वह प्रस्ताव पारित नहीं हो सकता, भले ही अन्य सदस्य उसका समर्थन करें.
सुरक्षा परिषद के 10 अस्थायी सदस्यों का चुनाव संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा दो वर्ष के कार्यकाल के लिए किया जाता है. परिषद की अध्यक्षता हर महीने अंग्रेजी वर्णमाला के क्रम के अनुसार एक सदस्य देश को सौंपी जाती है. इस तरह सभी सदस्य देशों को बारी-बारी से परिषद की अध्यक्षता करने का अवसर मिलता है.
सुरक्षा परिषद की पहली बैठक 17 जनवरी 1946 को लंदन के चर्च हाउस, वेस्टमिंस्टर में आयोजित की गई थी. शीत युद्ध के दौरान कई बार अमेरिका और तत्कालीन सोवियत संघ के बीच मतभेदों के कारण परिषद के कामकाज पर असर पड़ा. इसके बावजूद परिषद ने अलग-अलग समय पर कई अंतरराष्ट्रीय शांति अभियानों और संघर्षों से जुड़े मामलों पर निर्णय लिए.
1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशनों का दायरा बढ़ा. इसके बाद कई देशों में शांति स्थापना और संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में सहायता के लिए मिशन चलाए गए. हाल के वर्षों में यूक्रेन और गाजा जैसे मुद्दों पर स्थायी सदस्यों के वीटो अधिकार के इस्तेमाल के कारण सुरक्षा परिषद की कार्यप्रणाली और संरचना में सुधार की मांग भी लगातार उठती रही है.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के निर्णयों को लागू करने में संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशनों की भूमिका होती है. इन मिशनों में विभिन्न देशों के सैन्य, पुलिस और नागरिक कर्मचारी शामिल होते हैं. वर्तमान समय में दुनिया के कई हिस्सों में संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन सक्रिय हैं, जिनका संचालन सदस्य देशों के सहयोग और स्वीकृत बजट के माध्यम से किया जाता है.
पाकिस्तान ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक महीने की मेजबानी संभाली है. मेजबानी की शुरुआत में ही उसने भारत को घेरने की असफल कोशिश की है. इस कोशिश में उसने कश्मीर का मुद्दा उछाला है.
विदेश मंत्री एस जयशंकर न्यूयॉर्क में भारत की दावेदारी की शुरुआत करेंगे. एस जयशंकर संयुक्त राष्ट्र के मुख्यालय में एक विशेष कार्यक्रम में भारत की दावेदारी का ऐलान करेंगे. इसके साथ ही वे महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से भी मिलेंगे. इस अभियान के जरिए भारत खुद को विकासशील देशों की आवाज के तौर पर पेश करेगा, जो ग्लोबल फैसले लेने की प्रक्रिया में बड़ी भूमिका चाहते हैं. भारत साल 2028-29 के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थायी सीट पर दावेदारी पेश कर रहा है.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की 2028-29 अवधि के लिए अस्थायी सदस्य बनने के अभियान की शुरुआत करते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत एक सुरक्षित, शांतिपूर्ण और न्यायसंगत विश्व के निर्माण के लिए काम करेगा.
नेल्सन मंडेला का जिक्र इसलिए हो रहा है क्योंकि आज अगर वो जीवित होते तो 108 बरस के हो गए होते. संयुक्त राष्ट्र हर साल 18 जुलाई को नेल्सन मंडेला अंतरराष्ट्रीय दिवस के तौर पर मनाता है. जीवनभर रंगभेद से लड़ते रहे मंडेला ने अपनी जीवन के 27 साल जेल में गुजारे. उनका अमेरिका को लेकर रुख काफी मुखर और दो टूक था. वो अमेरिकी सरकार की विदेश नीति और उनकी साम्राज्यवादी सोच के खिलाफ थे.