टेंगरा मछली (Tengra Fish) भारत में पाई जाने वाली मीठे पानी की मछलियों में से एक है. यह खासतौर पर पश्चिम बंगाल, बिहार, असम, ओडिशा और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में लोकप्रिय है. बंगाल और पूर्वी भारत के कई क्षेत्रों में इसे भोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है. स्थानीय बाजारों में यह अलग-अलग आकार में मिलती है.
टेंगरा मछली कैटफिश यानी कैटफिश समूह की मछलियों में शामिल है. इसके शरीर पर सामान्य मछलियों की तरह बड़े शल्क नहीं होते. इसके मुंह के पास मूंछ जैसी संरचनाएं होती हैं, जिन्हें बार्बेल कहा जाता है. इनकी मदद से मछली पानी में भोजन तलाशती है. टेंगरा की कई प्रजातियां पाई जाती हैं और अलग-अलग क्षेत्रों में इसके नाम तथा पहचान में अंतर हो सकता है.
यह मछली आमतौर पर नदियों, तालाबों, झीलों और अन्य मीठे पानी के जलस्रोतों में पाई जाती है. कुछ प्रजातियां धीमी गति से बहने वाले पानी और तल के आसपास रहना पसंद करती हैं. यह छोटे जलीय जीवों, कीड़ों, लार्वा और अन्य उपलब्ध खाद्य पदार्थों को खाती है.
टेंगरा मछली अपने स्वाद और नरम मांस के कारण पसंद की जाती है. इसे सरसों के मसाले, हल्दी, मिर्च और अन्य पारंपरिक मसालों के साथ पकाया जाता है. बंगाली व्यंजनों में टेंगरा की झोल वाली सब्जी काफी लोकप्रिय है. बिहार और असम में भी इसे स्थानीय स्वाद के अनुसार बनाया जाता है. इसे तलकर या करी के रूप में परोसा जा सकता है.
पोषण की दृष्टि से मछली प्रोटीन का अच्छा स्रोत होती है. टेंगरा मछली में प्रोटीन के साथ शरीर के लिए जरूरी कुछ विटामिन और खनिज भी मिल सकते हैं. हालांकि, पोषक तत्वों की मात्रा मछली की प्रजाति, आकार और पकाने के तरीके पर निर्भर करती है.
टेंगरा मछली की उपलब्धता मौसम, स्थानीय जलस्रोतों और मछली पकड़ने की गतिविधियों पर निर्भर करती है. इसके प्राकृतिक आवासों का संरक्षण और मछली पकड़ने के नियमों का पालन इसकी उपलब्धता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है.