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श्री मुक्तसर साहिब

श्री मुक्तसर साहिब

श्री मुक्तसर साहिब

श्री मुक्तसर साहिब (Sri Muktsar Sahib) पंजाब के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में स्थित एक ऐतिहासिक शहर है. यह श्री मुक्तसर साहिब जिले का मुख्यालय भी है. इस शहर को आमतौर पर मुक्तसर के नाम से जाना जाता है. 

श्री मुक्तसर साहिब का इतिहास सिख धर्म से जुडी एक महत्वपूर्ण घटना से संबंधित है. पहले इस शहर को खिदराना या खिदराने दी ढाब के नाम से जाना जाता था. वर्ष 1705 में यहां मुगलों और सिखों के बीच युद्ध हुआ था, जिसे मुक्तसर की लड़ाई के नाम से जाना जाता है. इसी युद्ध के बाद इस स्थान का नाम मुक्तसर पडा. वर्ष 1995 में इसे जिले का मुख्यालय बनाया गया. इसके बाद वर्ष 2012 में पंजाब सरकार ने शहर का आधिकारिक नाम बदलकर श्री मुक्तसर साहिब कर दिया. हालांकि, आम बोलचाल में आज भी इसे मुक्तसर कहा जाता है.

शहर के शुरुआती इतिहास के बारे में बहुत अधिक लिखित जानकारी उपलब्ध नहीं है. ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, पहले यह इलाका अर्ध-रेगिस्तानी क्षेत्र था. यहां एक झील भी मौजूद थी, जिसके आसपास खिदराना नामक स्थान बसा हुआ था. उस समय इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति आज से अलग थी.

सतलुज नदी के बदलते मार्ग का भी इस इलाके के इतिहास पर प्रभाव पडा. माना जाता है कि ऐतिहासिक काल में सतलुज नदी का प्रवाह इस क्षेत्र के पूर्वी हिस्से तक पहुंचता था. नदी के मार्ग में बदलाव के कारण पुराने निर्माण और बस्तियां प्रभावित हुईं. इसके परिणामस्वरूप क्षेत्र में प्राचीन इमारतों और पुरातात्विक अवशेषों की संख्या सीमित रह गई.

श्री मुक्तसर साहिब जिले का संबंध सिख धर्म के दूसरे गुरु, गुरु अंगद देव जी से भी है. उनका जन्म इसी जिले के मत्ते दी सराय गांव में हुआ था, जिसे वर्तमान में सरायनागा के नाम से जाना जाता है. गुरु अंगद देव जी का जन्म वर्ष 1504 में हुआ था और उनका मूल नाम भाई लहणा था.

इस क्षेत्र के आसपास राजा सालबान से जुडी कुछ ऐतिहासिक मान्यताएं भी प्रचलित हैं. सरायनागा सहित कुछ स्थानों को इन मान्यताओं से जोडा जाता है. श्री मुक्तसर साहिब की पहचान मुख्य रूप से इसके ऐतिहासिक नाम, मुक्तसर की लड़ाई और सिख इतिहास से संबंधित घटनाओं के कारण रही है.

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