झींगा (Shrimp) एक छोटा जलीय जीव है, जिसे दुनिया के सबसे लोकप्रिय समुद्री खाद्य पदार्थों में गिना जाता है. यह क्रस्टेशियन (Crustacean) समूह का सदस्य है और डेकापोडा (Decapoda) गण से संबंधित होता है. झींगा समुद्र, खारे पानी और मीठे पानी, तीनों प्रकार के जल स्रोतों में पाया जाता है. दुनिया भर में इसकी सैकड़ों प्रजातियां मौजूद हैं, जिनका आकार, रंग और निवास स्थान अलग-अलग हो सकता है.
भारत में झींगा उत्पादन और निर्यात का बड़ा उद्योग है. देश के तटीय राज्यों जैसे आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, गुजरात, केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में बड़े पैमाने पर इसकी खेती और उत्पादन किया जाता है. आंध्र प्रदेश को भारत का प्रमुख झींगा उत्पादक राज्य माना जाता है. यहां समुद्री और एक्वाकल्चर (Aquaculture) दोनों माध्यमों से झींगा तैयार किया जाता है.
झींगा का शरीर लंबा और पतला होता है. इसके सिर पर लंबी एंटीना (स्पर्शक) और शरीर पर कठोर बाहरी खोल (Exoskeleton) होता है. समय-समय पर यह अपना पुराना खोल छोड़कर नया खोल विकसित करता है. अधिकांश झींगे समुद्र या नदी की तलहटी के पास रहते हैं और छोटे जलीय जीवों तथा जैविक पदार्थों पर निर्भर रहते हैं.
व्यावसायिक रूप से झींगा की कई प्रजातियां पाली जाती हैं. इनमें व्हाइटलेग श्रिम्प (Litopenaeus vannamei) और ब्लैक टाइगर श्रिम्प (Penaeus monodon) सबसे अधिक प्रसिद्ध हैं. इनका उपयोग घरेलू बाजार के साथ-साथ निर्यात के लिए भी किया जाता है.
खाद्य उद्योग में झींगा का उपयोग कई प्रकार के व्यंजन बनाने में किया जाता है. इसे ताजा, फ्रोजन, उबला हुआ, सुखाया हुआ और प्रोसेस्ड रूप में बाजार में बेचा जाता है. होटल, रेस्तरां और फूड प्रोसेसिंग उद्योग में इसकी मांग पूरे वर्ष बनी रहती है.
भारत दुनिया के प्रमुख झींगा निर्यातक देशों में शामिल है. देश से अमेरिका, चीन, जापान, यूरोपीय संघ और मध्य-पूर्व के कई देशों में बड़ी मात्रा में झींगा निर्यात किया जाता है. इसके निर्यात का प्रबंधन भारत का समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (MPEDA) करता है.
आज झींगा मत्स्य पालन, खाद्य उद्योग और अंतरराष्ट्रीय व्यापार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है. इसकी बढ़ती मांग के कारण भारत में आधुनिक एक्वाकल्चर तकनीकों के माध्यम से इसका उत्पादन लगातार बढ़ाया जा रहा है.
यहां जिस नीले झींगा मछली की फोटो आप देख रहे हैं. वो 10 करोड़ में एक बार दिखती है. बेहद दुर्लभ कॉटन कैंडी लॉब्स्टर. इसे हाल ही में एक मछुआरे ने अमेरिका के न्यू हैंपशायर तट के पास पकड़ा. जांच करने पर पता चला कि ये तो लगभग न दिखने वाले जीवों में से एक है.