राम वनगमन पथ (Ram Vangaman Path) का विकास एक धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन मार्ग के रूप में किया जा रहा है. उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यटन दस्तावेजों में अयोध्या, सुलतानपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज और चित्रकूट को इस मार्ग से जुड़े प्रमुख स्थानों में शामिल किया गया है. राज्य में अयोध्या से चित्रकूट तक राम वन गमन मार्ग के विकास का उल्लेख सरकारी दस्तावेजों में मिलता है.
उत्तर प्रदेश में इस मार्ग से जुड़े प्रमुख पड़ावों में अयोध्या, श्रृंगवेरपुर और चित्रकूट का उल्लेख मिलता है. प्रयागराज क्षेत्र में श्रृंगवेरपुर को राम के वनवास से जुड़ी परंपराओं वाला स्थान माना जाता है. चित्रकूट में भी राम के वनवास से संबंधित कई धार्मिक स्थल मौजूद हैं.
राम वनगमन पथ की अवधारणा केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है. इससे जुड़े धार्मिक और पौराणिक स्थलों का उल्लेख मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के विभिन्न क्षेत्रों में मिलता है. दक्षिण भारत में नासिक, हम्पी, भद्राचलम और रामेश्वरम जैसे स्थान रामायण की परंपराओं से जोड़े जाते हैं.
सरकारी स्तर पर इस मार्ग को पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करने का उद्देश्य इससे जुड़े स्थानों को सड़क, सुविधाओं और पर्यटन गतिविधियों से जोड़ना है. उत्तर प्रदेश की पर्यटन नीति में रामायण सर्किट के अंतर्गत अयोध्या, चित्रकूट और श्रृंगवेरपुर सहित कई स्थलों को शामिल किया गया है.
राम वनगमन पथ रामायण परंपरा में उस मार्ग के रूप में जाना जाता है, जिस पर भगवान राम ने माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ वनवास के दौरान यात्रा की थी. धार्मिक मान्यता के अनुसार यह यात्रा अयोध्या से शुरू होकर दक्षिण भारत होते हुए लंका तक पहुंचती है. इस मार्ग से जुड़े कई स्थान रामायण की घटनाओं से संबंधित माने जाते हैं. इसलिए धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भों से जुड़ा एक व्यापक पर्यटन मार्ग है. इसका विस्तार अलग-अलग राज्यों में रामायण से संबंधित मान्यताओं और स्थानीय परंपराओं के आधार पर देखा जाता है.
प्रयागराज के श्रृंगवेरपुर धाम में 4,400 करोड़ रुपये की राम वनगमन पथ परियोजना के तहत बन रही सड़क और पुल के क्षतिग्रस्त होने से निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं. करीब 100 मीटर के दायरे में सड़क कई जगह उखड़ गई और पुल पर भी बड़ी दरारें दिखाई दीं.