पीपीएसी (Petroleum Planning and Analysis Cell), जिसे आम तौर पर PPAC India कहा जाता है, भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाली एक महत्वपूर्ण संस्था है.यह संस्था देश के तेल और गैस क्षेत्र से जुड़ी जानकारी, आंकड़ों और विश्लेषण का काम करती है.
PPAC की स्थापना मुख्य रूप से पेट्रोलियम सेक्टर की योजना बनाने, डेटा इकट्ठा करने और सरकार को जरूरी सुझाव देने के लिए की गई थी. यह संस्था पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, प्राकृतिक गैस और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों से जुड़ी जानकारी तैयार करती है. देश में ईंधन की मांग, खपत, कीमतों और सप्लाई से जुड़े आंकड़े भी PPAC जारी करता है.
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव होने पर लोग अक्सर यह जानना चाहते हैं कि कीमतें कैसे तय होती हैं. ऐसे मामलों में PPAC का डेटा और रिपोर्ट काफी महत्वपूर्ण मानी जाती हैं. यह संस्था अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों, आयात और घरेलू खपत पर भी निगरानी रखती है.
PPAC समय-समय पर रिपोर्ट और सांख्यिकीय डेटा जारी करता है, जिनका उपयोग सरकार, तेल कंपनियां, रिसर्च संस्थान और मीडिया करते हैं. इसके जरिए सरकार ऊर्जा क्षेत्र की योजनाएं और नीतियां बनाने में मदद लेती है.
यह संस्था ऊर्जा सुरक्षा, ईंधन की उपलब्धता और पेट्रोलियम सेक्टर के बेहतर प्रबंधन से जुड़े मामलों में भी काम करती है. इसके अलावा, पेट्रोलियम उत्पादों की खपत और उत्पादन के ट्रेंड को समझने में PPAC की रिपोर्ट काफी उपयोगी मानी जाती है.
अहद अहमद कुछ साल पहले तक कभी पिता के साथ साइकिल के पंचर बनाते थे तो कभी मां का हाथ बटाते हुए महिलाओं के कपड़े सिलते थे, लेकिन अब जज बन चुके हैं. 30 अगस्त को यूपी में पीसीएस जे यानी ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की भर्ती के जो नतीजे जारी हुए, उसमें अहद अहमद का भी नाम है.