नानपारा (Nanpara) उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में स्थित एक कस्बा है. यहां नगर पालिका परिषद है. यह क्षेत्र भारत-नेपाल सीमा के पास स्थित है और इसके आसपास कई गांव तथा घने जंगल हैं. भौगोलिक स्थिति के कारण नानपारा का संबंध सीमावर्ती क्षेत्रों के आवागमन और व्यापार से जुड़ा हुआ है.
नानपारा समुद्र तल से लगभग 132 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. यह भारत-नेपाल सीमा से करीब 16 किलोमीटर और बहराइच जिला मुख्यालय से लगभग 36 किलोमीटर दूर है. यहां से सड़क और रेल मार्ग के जरिए आसपास के क्षेत्रों तक पहुंचा जा सकता है. रुपईडीहा के रास्ते नेपालगंज जाने के लिए भी इस क्षेत्र का उपयोग किया जाता है. लखनऊ की दूरी बहराइच के रास्ते लगभग 160 किलोमीटर है. नानपारा से सीतापुर, श्रावस्ती और बहराइच की ओर जाने वाले सड़क मार्ग भी जुड़े हुए हैं.
नानपारा का इतिहास पुराने ताल्लुकेदारी शासन से जुड़ा हुआ है. ब्रिटिश शासन के दौरान यहां नानपारा ताल्लुकेदारी एक प्रमुख जमींदारी क्षेत्र था. वर्ष 1763 में अवध के नवाब शुजाउद्दौला ने यहां के शासक परिवार को राजा की उपाधि प्रदान की थी. बाद में ब्रिटिश शासन ने भी इस उपाधि को मान्यता दी.
इतिहास से संबंधित विवरणों के अनुसार, नानपारा ताल्लुकेदारी के अधीन 439 गांव थे. इनमें से 438 गांव बहराइच जिले में और एक गांव बाराबंकी जिले में स्थित था. इस ताल्लुकेदारी का कुल क्षेत्रफल लगभग 1,210 वर्ग किलोमीटर बताया गया है. वर्ष 1632 में रसूल खान को इस क्षेत्र में बंजारों पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए शाही जिम्मेदारी दी गई थी. उनके वंशजों के शासनकाल में नानपारा का महत्व बढ़ा और बाद में यह ताल्लुकेदारी का प्रमुख केंद्र बना.
नानपारा के आसपास जंगल और प्राकृतिक क्षेत्र मौजूद हैं. यहां से दुधवा राष्ट्रीय उद्यान लगभग 100 किलोमीटर दूर स्थित है. भारत-नेपाल सीमा के निकट होने के कारण रुपईडीहा क्षेत्र भी यहां के आवागमन से जुड़ा है. नानपारा में जिला स्तर की प्रशासनिक व्यवस्था, बाजार और परिवहन संबंधी गतिविधियां स्थानीय जीवन का हिस्सा हैं.