मां कूष्माण्डा (Maa Kushmanda) देवी दुर्गा के नौ रूपों में से चौथा स्वरूप हैं. इन्हें सृष्टि की उत्पत्ति करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है. मान्यता है कि जब सृष्टि नहीं थी, तब इन्हीं की हल्की मुस्कान (कूष्माण्ड) से ब्रह्मांड की रचना हुई थी. इसलिए इन्हें ‘आदि स्वरूपा’ और ‘सृष्टि की जननी’ भी कहा जाता है.
मां कूष्माण्डा अष्टभुजा धारी हैं, इसलिए इन्हें अष्टभुजा देवी भी कहते हैं. इनके हाथों में कमल, धनुष, बाण, अमृत कलश, गदा, चक्र और जपमाला होती है. मां के एक हाथ में वरदमुद्रा होती है, जिससे वे अपने भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करती हैं. इनका वाहन सिंह है, जो शक्ति और साहस का प्रतीक है.
एक पौराणिक कथा के अनुसार, जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, तब चारों ओर अंधकार था. देवी कूष्माण्डा ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की. उन्होंने ही सूर्य को ऊर्जा प्रदान की, जिससे जीवन संभव हो सका. मां कूष्माण्डा की कृपा से भक्तों को आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है और उनके जीवन में प्रकाश व ऊर्जा का संचार होता है.
मां कूष्माण्डा की उपासना से भक्तों को रोग, शोक और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है. ऐसा माना जाता है कि इनकी कृपा से भक्तों को समृद्धि, दीर्घायु और तेजस्विता प्राप्त होती है. नवरात्रि के चौथे दिन इनकी आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है.
मां कूष्माण्डा का मंत्र
"ॐ कूष्माण्डायै नमः"
Chaitra Navratri 2026: देवी कवच पाठ का रहस्य यह है कि इसमें नकारात्मक ऊर्जा को सकारात्मक ऊर्जा में बदलने और साधक को सभी प्रकार की बुराइयों, अकाल मृत्यु, रोग, शत्रुओं, और मुकदमों जैसी बाधाओं से बचाने की अद्भुत शक्ति है. यह कवच मार्कंडेय पुराण का हिस्सा है, जो दुर्गा सप्तशती के अंतर्गत आता है, और इसका पाठ करने से मन शांत होता है, बुद्धि सुरक्षित रहती है, और धन, मान, तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है.
Chaitra Navratri 2026 Upay: चैत्र नवरात्र की शुरुआत हो चुकी है, जिसमें नौ दिनों तक मां दुर्गा के सभी स्वरूपों की पूजा की जाती है. इस दौरान जीवन की हर तरह की परेशानियों से राहत पाने के लिए कई सरल और प्रभावी उपाय बताए गए हैं. आइए जानते हैं उनके बारे में.
Chaitra Navratri 2026 Katha: चैत्र नवरात्र की आज से शुरुआत हो चुकी है. तो आइए अब सुनते हैं महिषासुर और मां दुर्गा से संबंधित चैत्र नवरात्र की व्रत कथा, जिसके बिना यह 9 दिन अधूरे माने जाते हैं.
Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्र का पावन पर्व आज से शुरू होने जा रहा है, जो भक्तों के लिए सुख-समृद्धि के द्वार खोलने वाला है. सनातन धर्म में इन नौ दिनों का विशेष महत्व है, जहां मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना कर जीवन की नकारात्मकता को दूर किया जा सकता है. आइए जानते हैं कि आज कितने बजे से कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त शुरू होगा.
Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा करना बहुत ही ज्यादा फलदायी माना जाता है. ज्योतिषियों के मुताबिक, इस दिन भक्तों को राशिनुसार मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए कुछ विशेष उपाय भी करने चाहिए.
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Shardiya Navratri 2025: मां दुर्गा की पूजा में आरती का विशेष महत्व है. उत्तर स्कंद पुराण में कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति मंत्र नहीं जानता, पूजा की विधि नहीं जानता, लेकिन आरती कर लेता है तो देवी-देवता उसकी पूजा को पूर्ण रूप से स्वीकार कर लेते हैं.
Shardiya Navratri 2025: नवरात्र में भक्त मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए कई तरह के उपाय करते हैं. ठीक इसी तरह आप पान के पत्ते से कुछ उपाय करके मां दुर्गा की विशेष कृपा पा सकते हैं. जानें उन खास उपायों के बारे में.
Shardiya Navratri 2025: मां दुर्गा के नौ स्वरूपों को समर्पित शारदीय नवरात्र में कुछ उपाय बेहद कारगर माने गए हैं. कहते हैं कि इन पवित्र दिनों में कुछ विशेष उपाय करने से धनधान्य की कभी कमी नहीं रहती है.
Shardiya Navratri 2025: हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्र का त्योहार बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है. इस दौरान मां दुर्गा की मूर्ति घर या मंदिरों में स्थापित की जाती है और 9 दिनों तक मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है. शारदीय नवरात्र आश्विन माह में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होती है और नवमी तिथि तक मनाई जाती है.