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डीपी यादव

डीपी यादव

डीपी यादव

धर्म पाल यादव, जिन्हें डीपी यादव (DP Yadav) के नाम से जाना जाता है, उत्तर प्रदेश के नेता रहे हैं. उनका जन्म 25 जुलाई 1948 को उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले के नोएडा स्थित सरफाबाद गांव में हुआ था. वह एक किसान परिवार से आते हैं. उनके पिता तेजपाल यादव डेयरी का व्यवसाय करते थे. शुरुआती जीवन गांव में बीता और बाद में उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा.

डीपी यादव ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत जनता दल से की. वर्ष 1989 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उन्होंने बुलंदशहर सीट से चुनाव लड़ा और विधायक चुने गए. इसके बाद वह राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री भी बने. उन्होंने बुलंदशहर से लगातार तीन बार विधानसभा चुनाव जीता और 1996 तक विधायक रहे.

संसदीय राजनीति में भी डीपी यादव ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई. वर्ष 1991 में उन्होंने संभल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन सफलता नहीं मिली. इसके बाद वह बहुजन समाज पार्टी में शामिल हुए और 1996 के लोकसभा चुनाव में संभल सीट से सांसद निर्वाचित हुए. वर्ष 1998 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर संभल से चुनाव लड़ा, लेकिन जीत हासिल नहीं कर सके. इसी अवधि में वह उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्यसभा के सदस्य भी रहे.

इसके बाद उन्होंने 2004, 2009 और 2014 के लोकसभा चुनाव भी अलग-अलग सीटों से लड़े, लेकिन इन चुनावों में उन्हें सफलता नहीं मिली. वर्ष 2007 में उन्होंने राष्ट्रीय परिवर्तन दल (आरपीडी) का गठन किया. उसी वर्ष सहसवान विधानसभा सीट से वह विधायक चुने गए. उनकी पत्नी उमलेश यादव भी बिसौली विधानसभा सीट से विधायक निर्वाचित हुईं. वर्ष 2012 में सहसवान से विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा.

डीपी यादव का परिवार भी लंबे समय से राजनीति से जुड़ा रहा है. उनकी पत्नी उमलेश यादव 2007 से 2012 तक विधायक रहीं. उनके दो बेटे, विकास यादव और कुणाल यादव, तथा दो बेटियां हैं. वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में उनके बेटे कुणाल सिंह यादव ने राष्ट्रीय परिवर्तन दल के उम्मीदवार के रूप में सहसवान सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें जीत नहीं मिली.

डीपी यादव का नाम कई चर्चित मामलों में भी सामने आया. उनके बेटे विकास यादव को नितीश कटारा हत्याकांड और जेसिका लाल हत्याकांड से जुड़े मामलों में अदालत द्वारा दोषी ठहराया गया. इन घटनाओं के कारण उनका परिवार लंबे समय तक सार्वजनिक और राजनीतिक चर्चाओं का विषय बना रहा.
 

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