कतला मछली (Catla Fish) दक्षिण एशिया में पाई जाने वाली मीठे पानी की मछली है. इसका वैज्ञानिक नाम लैबियो कतला (Labeo catla) है. यह कार्प परिवार की मछलियों में शामिल है. भारत, बांग्लादेश, म्यांमार, नेपाल और पाकिस्तान की नदियों तथा झीलों में यह प्राकृतिक रूप से पाई जाती है. इसके अलावा दक्षिण एशिया के कुछ अन्य क्षेत्रों में भी इसे लाया गया है. भारत और बांग्लादेश में कतला का पालन मछली उत्पादन के लिए किया जाता है.
कतला मछली को नेपाल और भारत के कुछ हिस्सों में भाकुरा के नाम से भी जाना जाता है. ओडिशा तक के क्षेत्रों में इस नाम का प्रचलन है. अलग-अलग इलाकों में स्थानीय भाषा और परंपरा के अनुसार इसका नाम बदल जाता है.
कतला मछली का सिर बड़ा और चौड़ा होता है. इसका निचला जबड़ा आगे की ओर निकला रहता है और मुंह ऊपर की तरफ खुलता है. इसके शरीर के ऊपरी हिस्से पर बड़े आकार के धूसर रंग के शल्क होते हैं. पेट का हिस्सा सफेद दिखाई देता है. इस मछली की लंबाई लगभग 182 सेंटीमीटर तक और वजन करीब 38.6 किलोग्राम तक दर्ज किया गया है.
कतला मछली पानी की ऊपरी और मध्य परतों में भोजन करती है. वयस्क मछलियां मुख्य रूप से प्राणी प्लवक खाती हैं. इनके गलफड़ों में मौजूद विशेष संरचनाएं पानी से छोटे जीवों को छानकर भोजन प्राप्त करने में सहायता करती हैं. छोटी कतला मछलियां प्राणी प्लवक के साथ पादप प्लवक भी खाती हैं. भोजन की उपलब्धता और पर्यावरण की परिस्थितियां इसके विकास को प्रभावित करती हैं.
कतला मछली सामान्य रूप से लगभग दो वर्ष की आयु में प्रजनन के लिए परिपक्व हो जाती है. इस समय इसका औसत वजन करीब दो किलोग्राम हो सकता है. हालांकि, इसकी वृद्धि और परिपक्वता पर पालन की परिस्थितियों, पानी की गुणवत्ता तथा भोजन का प्रभाव पड़ता है.
कतला मछली के वैज्ञानिक वर्गीकरण में समय के साथ बदलाव हुए हैं. पहले इसे कैटला नामक वंश की एकमात्र प्रजाति माना जाता था. बाद में इसके वर्गीकरण को लेकर संशोधन किए गए और इसे लैबियो वंश में रखा गया. दक्षिण-पूर्व एशिया में पाई जाने वाली जायंट बार्ब मछली से भी इसकी समानता बताई जाती है. दोनों मछलियों के सिर का आकार बड़ा होने के कारण इनके बीच भ्रम हो सकता है.